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Early Signs of Heart Attack: ऐसे मामलों के बाद अक्सर लोग कहते हैं, "उसे तो कोई बीमारी भी नहीं थी।" लेकिन सच यह है कि शरीर लंबे समय तक अंदर ही अंदर संकेत देता रहता है जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।

Heart Attack Symptoms in Young Adults: कुछ साल पहले तक हार्ट अटैक (Heart Attack) को बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था। लोगों का मानना था कि यह समस्या केवल 50 या 60 साल के बाद ही होती है लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। आज 20, 30 और 40 साल के युवा भी हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं। यही वजह है कि यह सवाल पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है कि आखिर कम उम्र में हार्ट अटैक क्यों आ रहा है?
सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई बार बिल्कुल स्वस्थ दिखने वाले लोगों को भी अचानक हार्ट अटैक आ जाता है। ऐसे मामलों के बाद अक्सर लोग कहते हैं, "उसे तो कोई बीमारी भी नहीं थी।" लेकिन सच यह है कि शरीर लंबे समय तक अंदर ही अंदर संकेत देता रहता है जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। इस लेख में हम समझेंगे कि कम उम्र में हार्ट अटैक क्यों होता है, इसके पीछे कौन-कौन से कारण हैं, किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है, शुरुआती लक्षण क्या हैं और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए।
हमारा दिल लगातार काम करता है और उसे भी सही तरीके से काम करने के लिए खून और ऑक्सीजन की जरूरत होती है। यह काम दिल की धमनियां (Coronary Arteries) करती हैं। जब इनमें चर्बी, कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थ जमा होने लगते हैं तो खून का प्रवाह कम हो जाता है। अगर किसी कारण से यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाए तो दिल की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और हार्ट अटैक हो जाता है।
इसके पीछे केवल एक कारण जिम्मेदार नहीं है। हमारी बदलती जीवनशैली, खान-पान और कई स्वास्थ्य समस्याएं मिलकर इसका खतरा बढ़ा देती हैं।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों तक बैठकर काम करना आम बात हो गई है। न के बराबर शारीरिक गतिविधि, जंक फूड, मीठे पेय, देर रात तक जागना और पर्याप्त नींद न लेना दिल की सेहत पर बुरा असर डालते हैं। धीरे-धीरे शरीर में मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं जो हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ा देती हैं।
सिगरेट, बीड़ी, वेपिंग और तंबाकू का कोई भी रूप दिल के लिए नुकसानदायक है। इनमें मौजूद हानिकारक रसायन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और खून के थक्के बनने की संभावना बढ़ा देते हैं। यही कारण है कि कम उम्र में धूम्रपान करने वालों में हार्ट अटैक का खतरा काफी ज्यादा देखा जाता है।
तनाव (Stress) केवल मानसिक स्वास्थ्य को ही नहीं बल्कि दिल को भी प्रभावित करता है। जब व्यक्ति लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो शरीर में ऐसे हार्मोन बढ़ जाते हैं जो ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा तनाव में लोग अक्सर ज्यादा खाना, धूम्रपान या शराब जैसी गलत आदतों की ओर भी बढ़ जाते हैं जिससे खतरा और बढ़ जाता है।
अगर कोई व्यक्ति रोजाना बहुत कम सोता है या उसकी नींद बार-बार टूटती है तो इससे भी दिल की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। अच्छी नींद शरीर को ठीक होने का समय देती है और दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती है।
उच्च रक्तचाप कई सालों तक बिना किसी लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर दिल पर अतिरिक्त दबाव डालता है और धमनियों को नुकसान पहुंचाता है।
जब खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) ज्यादा हो जाता है तो यह धमनियों में जमा होने लगता है। समय के साथ यही जमा हुआ पदार्थ खून के रास्ते को संकरा कर देता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
मधुमेह केवल ब्लड शुगर की बीमारी नहीं है। लंबे समय तक बढ़ी हुई शुगर रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा देती है।
ज्यादा वजन होने से केवल शरीर भारी नहीं होता बल्कि ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसी समस्याओं की संभावना भी बढ़ जाती है। यही कारण है कि मोटापा दिल की बीमारियों का एक बड़ा जोखिम माना जाता है।
अगर आपके माता-पिता, भाई या बहन को कम उम्र में हार्ट अटैक या दिल की बीमारी हो चुकी है तो आपका जोखिम भी सामान्य लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हार्ट अटैक होना तय है। सही जीवनशैली अपनाकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
हाँ, बिल्कुल। सिर्फ पतला दिखना या जिम जाना इस बात की गारंटी नहीं है कि दिल पूरी तरह स्वस्थ है। अगर किसी व्यक्ति में आनुवंशिक कारण, हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, तनाव या कोई छिपी हुई हृदय संबंधी समस्या है तो उसे भी हार्ट अटैक आ सकता है।
हर व्यक्ति में लक्षण एक जैसे नहीं होते लेकिन कुछ सामान्य संकेत इस प्रकार हो सकते हैं-
ध्यान रखें कि महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज के मरीजों में लक्षण अलग या हल्के भी हो सकते हैं।
अगर ऐसे लक्षण अचानक दिखाई दें तो उन्हें गैस या थकान समझकर नजरअंदाज न करें। तुरंत चिकित्सा सहायता लेना सबसे सुरक्षित कदम है।
अधिकांश मामलों में इसका खतरा कम किया जा सकता है। इसके लिए किसी महंगे इलाज की जरूरत नहीं बल्कि रोजमर्रा की कुछ अच्छी आदतें काफी मदद करती हैं। रोजाना कम से कम 30 मिनट तेज चाल से चलना या कोई भी शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित भोजन खाना, फल-सब्जियां और साबुत अनाज को आहार में शामिल करना, धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूर रहना, पर्याप्त नींद लेना, तनाव को नियंत्रित करना और समय-समय पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर तथा कोलेस्ट्रॉल की जांच कराते रहना दिल को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद करता है।
अगर आपकी उम्र 20 या 30 साल है और परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास है या आप धूम्रपान करते हैं, मोटापे से परेशान हैं, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्या है तो नियमित स्वास्थ्य जांच कराना समझदारी है। समय रहते जोखिम का पता चल जाए तो भविष्य में होने वाली गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।
Disclaimer : यह जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और शैक्षिक उद्देश्य के लिए दी गई है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए इस लेख में दिए गए किसी भी सुझाव या बचाव के तरीके को अपनाने से पहले अवश्य किसी योग्य डॉक्टर से परामर्श करें। इस जानकारी के उपयोग से होने वाले किसी भी परिणाम की जिम्मेदारी लेखक या वेबसाइट की नहीं होगी।
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