
Himachal : हिमाचल प्रदेश में बुधवार को प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला। कुल्लू की मणिकर्ण घाटी में बादल फट गया। इस हादसे में कई लोग लापता हो गए। बादल फटते ही अचानक पानी का सैलाब आ गया। जिससे दर्जनों घर और कैपिंग प्लेस क्षतिग्रस्त हो गया है। भारी बारिश के चलते मणिकर्ण घाटी में बाढ़ आ गई। बाढ़ के रौद्र रूप में कई लोग बह गए। साथ ही कई घर तबाह हो गए। कुल्लू के एसपी गुरदेव शर्मा ने कहा कि राहत बचाव दल मौके पर पहुंच रहे हैं। लोगों को बचाने की कोशिश चल रही है।
वहीं, ऐसे ही घटना 2013 में उत्तराखंड में देखी गई थी। उत्तराखंड त्रासदी के बाद ऐसी घटना आज हिमाचल में देखी जा रही है। 17 जून 2013 को उत्तराखंड में हुई अचानक मूसलधार वर्षा 340 मिलीमीटर दर्ज की गयी जो सामान्य बेंचमार्क 65.9 मिमी से 375 प्रतिशत ज्यादा थी, जिसके कारण बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुयी।
https://twitter.com/ANI/status/1544540417110134784?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1544540417110134784%7Ctwgr%5E%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=https%3A%2F%2Fhindi.oneindia.com%2Fnews%2Findia%2Fflood-hits-manikaran-valley-of-kullu-due-heavy-rainfall-houses-damaged-people-flew-himachal-pradesh-692364.htmlइसी दौरान अचानक उत्तरकाशी में बादल फटने के बाद असिगंगा और भागीरथी में जल स्तर बढ़ गया। वहीं लगातार होती रही बारिश की वजह से गंगा और यमुना का जल स्तर भी तेजी से बढ़ा। कुमाऊं हो या गढ़वाल मंडल, बारिश हर जगह बेतरह होती रही।
हरिद्वार में भी गंगा खतरे के निशान के करीब पहुंच गई जिसके चलते गंगा तट पर बसे सैकड़ों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया। उस वक्त भी हिमाचल प्रदेश में इसका व्यापक प्रभाव देखा गया था। गर्मियों के दौरान बर्फ पिघलने से जून के महीने में अमूमन यहां का मौसम नम होता है।
लेकिन व्यापक आपदा की स्थिति से मौसम विभाग का पूर्वानुमान ही सुरक्षा कवच बन सकता था। भारी बारिश के बारे में सरकारी एजेंसियों और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा पहले से व्यापक प्रचार नहीं दिया गया। इस वजह से हजारों लोगों के जीवन और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ।