Holika Dahan: होलिका दहन इस साल 03 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा और साल के पहले चंद्र ग्रहण के बीच मनाया जाएगा। पंडितों के अनुसार शुभ मुहूर्त शाम 06:22 बजे से रात 08:50 बजे तक रहेगा। इस दिन होलिका जलाने की सही विधि, पूजा सामग्री और सावधानियों के बारे में जानें।

होली का त्योहार भारत में सिर्फ रंगों तक सीमित नहीं है। इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है होलिका दहन जो फाल्गुन माह की पूर्णिमा पर मनाया जाता है। इस साल 2026 में होलिका दहन और साल का पहला चंद्र ग्रहण एक ही दिन 03 मार्च को पड़ रहा है जिससे यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन गया है। लंबा चंद्र ग्रहण और शुभ मुहूर्त दोनों का ध्यान रखते हुए पंडितों ने इस दिन होलिका जलाने का समय तय किया है। आइए विस्तार से जानते हैं इस दिन का शुभ समय, पंचांग और होलिका दहन की विधि।
इस साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा 2 मार्च की शाम 05:55 बजे से शुरू होकर अगले दिन 03 मार्च को शाम 05:07 बजे तक रहेगी। पंचांग के अनुसार, होलिका दहन 03 मार्च 2026 को ही आयोजित किया जाएगा। यह समय सूर्य और चंद्र की स्थिति के अनुसार तय किया गया है।
03 मार्च को लगने वाला चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में होगा। ग्रहण की शुरुआत दोपहर 03:20 बजे से होगी और इसका समापन शाम 06:47 बजे पर होगा। यह साल का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण होगा जिसकी अवधि 3 घंटे 27 मिनट है। चंद्र ग्रहण के समय और सूतक काल का ध्यान रखते हुए ही होलिका दहन का शुभ मुहूर्त तय किया गया है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 03 मार्च 2026 को होलिका जलाने का शुभ समय शाम 06:22 बजे से रात 08:50 बजे तक रहेगा। इस समय पर होलिका जलाना सबसे अधिक शुभ माना जाता है और परिवार में सुख-समृद्धि लाने वाला होता है।
इस प्रकार, 03 मार्च 2026 को होलिका दहन का त्योहार न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। चंद्र ग्रहण और पूर्णिमा का संयोजन इसे और भी विशेष बनाता है। सही समय और विधि के अनुसार होलिका जलाना परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली लाता है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।