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आखिर सोने की कीमत तय करता कौन है और किन कारणों से इसमें उतार-चढ़ाव आता है? लाखों लोगों के मन में यह सवाल आता है खासकर तब जब वे सोना खरीदने या उसमें निवेश करने की योजना बनाते हैं। आइए जानते हैं कि सोने की कीमत कैसे तय होती है और इसके पीछे कौन-कौन से कारक काम करते हैं।

भारत में सोना सिर्फ एक धातु नहीं है बल्कि निवेश, बचत और परंपरा का भी हिस्सा है। त्योहारों से लेकर शादी-ब्याह तक सोने की खरीदारी बड़े पैमाने पर होती है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सोने का भाव हर दिन बदलता क्यों है? एक दिन सोना महंगा हो जाता है तो दूसरे दिन सस्ता। आखिर सोने की कीमत तय करता कौन है और किन कारणों से इसमें उतार-चढ़ाव आता है? लाखों लोगों के मन में यह सवाल आता है खासकर तब जब वे सोना खरीदने या उसमें निवेश करने की योजना बनाते हैं। आइए जानते हैं कि सोने की कीमत कैसे तय होती है और इसके पीछे कौन-कौन से कारक काम करते हैं।
कई लोगों को ऐसा लगता है कि, भारत सरकार या किसी एक संस्था के द्वारा सोने की कीमत तय की जाती है लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। सोने की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार और मांग-आपूर्ति के आधार पर तय होती है। दुनिया भर में सोने की खरीद-बिक्री बड़े स्तर पर होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का जो भाव तय होता है उसका सीधा असर भारत समेत दूसरे देशों के बाजारों पर भी पड़ता है। भारत में सोने के दाम तय करते समय अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ-साथ रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क और स्थानीय टैक्स को भी ध्यान में रखा जाता है।
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात करता है। इसलिए वैश्विक बाजार में सोने की कीमत बढ़ने या घटने का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई देता है। यदि दुनिया भर में सोने की मांग बढ़ जाती है तो इसकी कीमत ऊपर जाती है। वहीं अगर निवेशक सोने से पैसा निकालकर दूसरे विकल्पों में निवेश करने लगते हैं तो कीमतों में गिरावट भी आ सकती है। यही कारण है कि अमेरिका, यूरोप, चीन और अन्य बड़े देशों की आर्थिक गतिविधियां भी सोने के भाव को प्रभावित करती हैं।
सोने का अंतरराष्ट्रीय कारोबार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है। इसलिए डॉलर की कीमत में बदलाव का असर भारत में सोने के दाम पर पड़ता है। अगर डॉलर मजबूत होता है और रुपया कमजोर होता है तो भारत को सोना आयात करने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं। इसका असर सोने की कीमत पर दिखाई देता है और भाव बढ़ सकते हैं। वहीं यदि रुपया मजबूत हो जाए तो आयात की लागत कम हो सकती है जिससे कीमतों पर दबाव कम पड़ता है।
किसी भी वस्तु की तरह सोने की कीमत भी मांग और आपूर्ति के नियम से प्रभावित होती है। भारत में त्योहारों, शादियों और विशेष अवसरों पर सोने की मांग तेजी से बढ़ जाती है। अक्षय तृतीया, धनतेरस और शादी के सीजन में अक्सर सोने की खरीदारी बढ़ती है। जब मांग बढ़ती है और आपूर्ति सीमित रहती है तो कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा सकती है। इसके विपरीत जब मांग कम होती है तो कीमतों में नरमी आ सकती है।
सोने को दुनिया भर में सुरक्षित निवेश माना जाता है। जब शेयर बाजार में गिरावट आती है, आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है या किसी देश में संकट की स्थिति बनती है तब निवेशक अक्सर सोने की ओर रुख करते हैं। ऐसे समय में सोने की मांग बढ़ जाती है और इसकी कीमत ऊपर जा सकती है। यही वजह है कि वैश्विक तनाव, युद्ध या आर्थिक मंदी के दौरान सोना चर्चा में रहता है।
अंतरराष्ट्रीय कीमत के अलावा भारत में सोने के दाम में कई अन्य खर्च भी शामिल होते हैं। जब सोना विदेश से आयात किया जाता है तो उस पर आयात शुल्क लगता है। इसके अलावा जीएसटी और अन्य लागतें भी जुड़ती हैं। यदि आप ज्वेलरी खरीदते हैं तो उसमें मेकिंग चार्ज भी शामिल होता है जो ज्वेलर के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार और स्थानीय बाजार के भाव में अंतर दिखाई देता है।
जब लोग सोने का भाव देखते हैं तो अक्सर 24 कैरेट और 22 कैरेट के अलग-अलग रेट दिखाई देते हैं। 24 कैरेट सोना लगभग शुद्ध सोना माना जाता है और इसमें मिलावट बहुत कम होती है। वहीं 22 कैरेट सोने में कुछ अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं ताकि उससे मजबूत आभूषण बनाए जा सकें। शुद्धता में अंतर होने के कारण दोनों की कीमतें भी अलग होती हैं।
आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय कीमत सभी के लिए समान होती है लेकिन स्थानीय टैक्स, परिवहन लागत, मांग और व्यापारिक खर्चों के कारण अलग-अलग शहरों में सोने के भाव में थोड़ा अंतर दिखाई दे सकता है। इसीलिए दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, जयपुर या चेन्नई में सोने की कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिलता है।
सोने की कीमत पर कई वैश्विक और स्थानीय कारक असर डालते हैं इसलिए इसका सटीक अनुमान लगाना आसान नहीं होता। हालांकि आर्थिक स्थिति, ब्याज दरों, डॉलर की मजबूती, वैश्विक तनाव और मांग के आधार पर बाजार विशेषज्ञ संभावित रुझानों का अनुमान लगाते हैं। फिर भी सोने के भाव में अचानक बदलाव संभव है।
आसान भाषा में समझें तो सोने की कीमत मुख्य रूप से पांच चीजों पर निर्भर करती है जिनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर-रुपया विनिमय दर, मांग और आपूर्ति, आर्थिक परिस्थितियां और सरकारी कर या आयात शुल्क शामिल है। जब इनमें से किसी भी कारक में बड़ा बदलाव आता है तो उसका असर सोने की कीमत पर दिखाई देता है। यही वजह है कि सोने का भाव रोजाना बदलता रहता है।
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