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यही वजह है कि किसी व्यक्ति के निधन के बाद कुछ जरूरी औपचारिकताओं को जल्द से जल्द पूरा करना बेहद जरूरी माना जाता है। इससे भविष्य में होने वाली कई समस्याओं और संभावित धोखाधड़ी से बचा जा सकता है।

परिवार में किसी सदस्य का निधन होना बेहद दुखद और भावनात्मक समय होता है। ऐसे माहौल में पूरा परिवार शोक में डूबा रहता है और कई बार कुछ जरूरी कागजी और वित्तीय कामों पर ध्यान नहीं दे पाता लेकिन अगर इन कामों को समय रहते पूरा नहीं किया जाए तो बाद में पैसे, संपत्ति और जरूरी दस्तावेजों से जुड़ी परेशानियां सामने आ सकती हैं। यही वजह है कि किसी व्यक्ति के निधन के बाद कुछ जरूरी औपचारिकताओं को जल्द से जल्द पूरा करना बेहद जरूरी माना जाता है। इससे भविष्य में होने वाली कई समस्याओं और संभावित धोखाधड़ी से बचा जा सकता है।
किसी भी सरकारी, बैंकिंग या बीमा संबंधी प्रक्रिया की शुरुआत डेथ सर्टिफिकेट से होती है। यह एक ऐसा दस्तावेज है जिसकी जरूरत लगभग हर जगह पड़ती है। चाहे बैंक खाते से जुड़ा काम हो, बीमा क्लेम लेना हो या किसी सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव कराना हो, हर जगह डेथ सर्टिफिकेट मांगा जाता है। इसलिए परिवार को सबसे पहले इसे बनवाने की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
अगर मृत व्यक्ति ने जीवन बीमा, म्यूचुअल फंड, पीपीएफ या किसी अन्य निवेश योजना में पैसा लगाया था तो संबंधित संस्थान से संपर्क करना जरूरी है। समय पर जानकारी देने और जरूरी दस्तावेज जमा करने से क्लेम या राशि ट्रांसफर की प्रक्रिया आसान हो जाती है। देरी होने पर कई बार परिवार को अतिरिक्त दस्तावेजी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।
कई लोगों के नाम पर बैंक खाते, एफडी, आरडी या अन्य बचत योजनाएं होती हैं। ऐसे में परिवार को इन सभी खातों की जानकारी जुटानी चाहिए। यदि खाते में नॉमिनी दर्ज है तो वह जरूरी दस्तावेज जमा करके खाते में मौजूद राशि को अपने नाम ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। इससे धनराशि प्राप्त करने में आसानी होती है और आगे किसी तरह की कानूनी परेशानी नहीं आती।
अगर घर, जमीन, वाहन, गैस कनेक्शन या अन्य कोई संपत्ति मृत व्यक्ति के नाम पर है तो उसे समय रहते नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी के नाम पर ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। ऐसा करने से भविष्य में मालिकाना हक को लेकर कोई विवाद या परेशानी नहीं होती। साथ ही जरूरी सेवाओं का इस्तेमाल भी बिना रुकावट जारी रहता है।
आज के समय में मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, पैन कार्ड और कई अन्य डिजिटल रिकॉर्ड सीधे वित्तीय सेवाओं से जुड़े होते हैं। इसलिए इनसे संबंधित जानकारी को समय पर अपडेट करना या जरूरत पड़ने पर बंद कराना भी जरूरी है। इससे किसी भी तरह के गलत इस्तेमाल या साइबर धोखाधड़ी की संभावना को कम किया जा सकता है। कई बार पुराने मोबाइल नंबर और ईमेल सक्रिय रहने से धोखाधड़ी का खतरा बढ़ जाता है।
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