पूर्वांचल में मोदी ने खुद बता दिया कौन होगा अगला पीएम!
Purvanchal expressway inauguration & PM Modi
भारत
RP Raghuvanshi
16 Nov 2021 08:06 PM
यूपी में अगले तीन से चार महीने में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में सबके मन में यह सवाल है कि आखिर इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा क्या होगा?
जातिवाद बनेगा सबसे बड़ा मुद्दा?
जातिवाद को यूपी-बिहार की राजनीति का आधार माना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार विकास बनेगा यूपी में चुनाव का मुद्दा?
परिवारवाद बनेगा निशाना?
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के उद्धाटन के मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे पहले लखनऊ और दिल्ली में परिवारवादी सरकारें थीं। इन सरकारों ने केवल उन ही जगहों का विकास किया जहां इनके परिवार रहते थे या परिवार के लोग चुनाव लड़ते थे।
क्षेत्रवाद के नाम पर होगी राजनीति?
मोदी का साफ इशारा अमेठी, रायबरेली और सैफई के साथ सपा और कांग्रेस की ओर था। नरेंद्र मोदी का मकसद यूपी के चुनाव को जातिवाद की जगह परिवारवाद और क्षेत्रवाद के मुद्दे की ओर ले जाना है। बीजेपी लंबे समय से इस रणनीति पर काम कर रही है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का रिकॉर्ड समय में बनना और मार्च तक बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे शुरू करने के पीछे यही योजना है।
इसके अलावा गंगा एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर भी तेजी से काम चल रहा है। उम्मीद है 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ये दोनों एक्सप्रेसवे भी बनकर तैयार हो जाएंगे।
क्यों पूर्वांचल और बुंदेलखंड पर है बीजेपी की नजर
इन एक्सप्रेसवे के बहाने मोदी और योगी सरकार पूर्वांचल और बुंदेलखंड के लोगों को बताना चाहती है कि सपा और कांग्रेस ने उनके क्षेत्र के साथ भेदभाव किया है।
पूर्वांचल और बुंदेलखंड के पिछड़ेपन के लिए परिवारवाद को वजह बताकर बीजेपी इन क्षेत्रों में सपा और कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती है। बीजेपी को पता है कि किसी जाति विशेष को टिकट देने भर से ऐसा नहीं हो पाएगा।
पश्चिमी यूपी के लिए ये है बीजेपी की रणनीति
पश्चिमी यूपी के ज्यादातर इलाकों में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का प्रभाव है। यह क्षेत्र शुरू से ही औद्योगिक रूप से विकसित रहा है और दिल्ली के करीब होने की वजह से अपेक्षाकृत संपन्न भी है।
ऐसे में विकास या एक्सप्रेसवे के नाम पर पश्चिमी यूपी में वोट हासिल करना बीजेपी के लिए आसान नहीं होगा। यही वजह है कि पश्चिमी यूपी में सांप्रदायिक कार्ड को ही हथियार बनाया जाता है क्योंकि, यहां ध्रुवीकरण के नाम पर ही वोट काटे जा सकते हैं।
साफ है कि बीजेपी ने 2022 और 2024 के लिए अलग-अलग योजनाएं बना रखी हैं। बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर के सामने बन रहा कॉरिडोर और अयोध्या में राम मंदिर 2024 की तैयारी का हिस्सा है। 2022 में पूरा फोकस पूर्वांचल और बुंदेलखंड पर है।
पूर्वांचल से निकलेगा दूसरा प्रधानमंत्री?
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के मौके पर पीएम ने मोदी और योगी की जोड़ी वाली डबल इंजन की सरकार का कई बार जिक्र किया। साफ है कि मोदी यूपी की जनता को यह संकेत भी दे रहे हैं कि अगर योगी मजबूत हुए तो देश का अगला प्रधानमंत्री भी पूर्वांचल से ही होगा।
बीजेपी जानती है कि यूपी में पार्टी की पकड़ को मजबूत करना जरूरी है क्योंकि, इसका सीधा असर 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों पर होगा। यही वजह है कि बीजेपी ने विकास, ध्रुवीकरण और मोदी के बाद कौन के सवाल को जानबूझकर मुद्दा बनाया है।
देखना दिलचस्प होगा कि यूपी की जनता किस मुद्दे को सबसे बड़ा मानती है और किस पार्टी को यूपी पर राज करने का जनमत देती है।