प्रशांत महासागर में स्थित न्यू गिनी द्वीप के निवासी पापुआन सभ्यता से कोसों दूर हैं और ऐसा जीवन व्यतीत करते हैं, जिसकी कल्पना किसी सभ्य समाज में किया जाना असंभव है। आश्चर्य होता है कि ये आदिवासी सुरक्षित कैसे हैं?
पापुआनों का कद नाटा, त्वचा गहरे कत्थई रंग की और डीलडोल बड़ा ही बेतुका होता है। हड्डियों की बनी गोलाकार आकृति की चीजें ही इनका आभूषण हैं। हड्डी से बने बदशक्ल सूंये से यह अपनी चटाई बन लेते हैं और प्रकृति से जो कुछ भी उपयोग की चीजें मिलती हैं, उन्हें यह हड्डियों के चाकुओं से काटकर व्यवहार में लाते हैं। इनके बड़े हथियार पत्थर के होते हैं। संभवत: अपने प्रारंभिक विकास काल में सभी मनुष्य इस प्रकार ही रहते होंगे।
पापुआनों को अपने जानवरों से इतना अधिक प्रेम होता है कि यह उनकी मृत्यु पर शोक मनाते हैं। किसी पालतू सूअर के मरने पर संसार के किसी और हिस्से की स्त्रियां शायद ही कीचड़ चुपड़कर शोक मनाती होंगी। वह घरेलू जानवरों के मरने पर अपने सगे संबंधियों जैसा ही शोक मनाते हैं।
इनके समाज में विधवाओं के शोक मनाने की प्रथा भी अजीब है। विधवा औरतें बाल कटा लेती हैं, अपने सारे शरीर में कीचड़ चुपड़ा करती हैं और एक जाली के भीतर अपने मृत पति की खोपड़ी लटकाए हमेशा उसे साथ-साथ लिए फिरती हैं।
उनकी एक विशेषता और है कि इनके युवाओं को एक विशेष तरीके से अपनी बहादुरी और सहनशीलता साबित करना पड़ती है। वह अपने गले में लचकदार बैंत के टुकड़े बांधकर चलते हैं। उन टुकड़ों को भिगोकर नरम बनाते हैं और तब उन्हें मोड़कर मुंह से उन्हें पेट तक पहुंचाते हैं। इससे बमन की प्रवृत्ति होती है, पर वे जबरन उसे रोके रहते हैं, जिससे उनकी आंखें लाल हो जाती हैं। इस प्रकार आत्म यंत्रणा द्वारा वे साबित करते हैं कि वह कठिनाइयां झेलने में समर्थ हैं। इस शर्त को पूरा करने पर वे समाज में आदर पाते हैं।
लड़ना झगड़ना, खून करना, पापुआनी समाज में खाना खाने जैसी रोजमर्रा की साधारण सी बात है। यह लड़ते समय अपने साथ दो तीन बच्चों को भी पीठ पर बांध कर ले जाते हैं, ताकि जन्म से ही वे सख्ती बर्दाश्त कर सके और लड़ाई कला में पूरी तरह से प्रवीण हो सकें। एक गांव के व्यक्ति का दूसरे गांव के व्यक्ति से झगड़ा बहुधा ही दोनों पूरे गांवों के झगड़े का रूप ले लेता है। शत्रु को पराजित करने के बाद विजयी दल पहरा देता है और उनकी औरतें हारने वालों की संपत्ति को अपने साथ ले जाने के लिए बटोरती हैं। इनकी लड़ाई लुक छिप कर हमला करने और अंधेरे में छापा मार तरीके से होती है।
पापुआनों के दो मुख्य वर्ग होते हैं, वनवासी और समुद्र तट वासी अर्थात् एक जंगलों में रहते हैं और दूसरे समुद्र किनारे बसते हैं। दोनों ही वर्गों में मुर्दों को अपने बगीचे में गाड़ कर रखने की प्रथा है। कब्र की निगरानी के लिए यह उसके चारों तरफ चटाई का एक घेरा डाल देते हैं। पापुआनों के गांव बड़े छोटे-छोटे होते हैं। एक गांव में अधिक से अधिक 2 से लेकर 6 घर तक होते हैं, जिसके कारण शादी विवाह में परेशानी होती है। इनके यहां बिल्कुल निकट के रिश्तेदारी में शादी नहीं करने की प्रथा है।