57 साल आगे क्यों चलता है विक्रम संवत? जानिए इसके पीछे का बड़ा रहस्य
Vikram Samvat: विक्रम संवत हिंदू धर्म का पारंपरिक कैलेंडर है, जिसका उपयोग व्रत, त्योहार और शुभ मुहूर्त तय करने के लिए किया जाता है। कहा जाता है कि यह अंग्रेजी कैलेंडर से लगभग 57 साल आगे चलता है। इसकी शुरुआत प्राचीन भारत के महान और पराक्रमी राजा विक्रमादित्य की विजय की याद में मानी जाती है।

भारत में समय और त्योहारों की गणना के लिए सदियों से अलग-अलग कैलेंडर का उपयोग किया जाता रहा है। हिंदू धर्म में सबसे अधिक प्रचलित कैलेंडर विक्रम संवत है, जिसके आधार पर व्रत, त्योहार और धार्मिक अनुष्ठान तय किए जाते हैं। अक्सर लोग सुनते हैं कि विक्रम संवत अंग्रेजी कैलेंडर से 57 साल आगे चलता है लेकिन इसके पीछे की कहानी और गणना का तरीका बहुत दिलचस्प है। आइए जानते हैं कि विक्रम संवत क्या है, यह अंग्रेजी कैलेंडर से कैसे अलग है और इसकी शुरुआत किस राजा के पराक्रम से जुड़ी मानी जाती है।
हिंदू नववर्ष और विक्रम संवत की शुरुआत
हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नया वर्ष शुरू होता है। इसी दिन विक्रम संवत का नया साल माना जाता है। अभी विक्रम संवत 2082 चल रहा है और जैसे ही चैत्र शुक्ल प्रतिपदा आएगी नया संवत 2083 शुरू हो जाएगा। हिंदू धर्म में जितने भी प्रमुख त्योहार जैसे नवरात्रि, रामनवमी या दीपावली हैं उनकी तिथियां इसी पंचांग के अनुसार तय होती हैं।
अंग्रेजी कैलेंडर और विक्रम संवत में मुख्य अंतर
अंग्रेजी कैलेंडर और विक्रम संवत दोनों में 12 महीने होते हैं लेकिन इनके आधार अलग हैं। अंग्रेजी कैलेंडर पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा पर आधारित है। इसे 1582 में पोप ग्रेगरी XIII ने लागू किया था और इसी वजह से इसे ग्रेगोरियन कैलेंडर कहा जाता है। इसमें नए साल की शुरुआत हर साल 1 जनवरी से होती है। वहीं विक्रम संवत भारतीय परंपरा पर आधारित है और इसमें समय की गणना चंद्रमा की गति के अनुसार की जाती है। इस पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण को मिलाकर समय तय किया जाता है। हर महीने को दो पक्षों में बांटा जाता है कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष।
विक्रम संवत 57 साल आगे क्यों माना जाता है?
अक्सर लोग पूछते हैं कि विक्रम संवत अंग्रेजी साल से 57 साल आगे क्यों चलता है। दरअसल इसकी शुरुआत 57 ईसा पूर्व मानी जाती है। यानी जब अंग्रेजी कैलेंडर में वर्ष 2026 चल रहा है तब विक्रम संवत लगभग 2083 होता है। यही वजह है कि दोनों कैलेंडर के बीच लगभग 57 साल का अंतर दिखाई देता है।
राजा विक्रमादित्य के पराक्रम से जुड़ी कहानी
विक्रम संवत की शुरुआत का श्रेय महान और न्यायप्रिय शासक राजा विक्रमादित्य को दिया जाता है। इतिहास और लोककथाओं के अनुसार उन्होंने शकों के अत्याचार से कई क्षेत्रों को मुक्त कराया था और उज्जैन में अपना शासन स्थापित किया था। इस बड़ी जीत की याद में उन्होंने एक नए युग की शुरुआत की जिसे आगे चलकर विक्रम संवत कहा गया। राजा विक्रमादित्य को उनकी न्यायप्रियता और पराक्रम के लिए जाना जाता था। उनकी विजय को ही इस पंचांग की शुरुआत का आधार माना गया इसलिए यह केवल एक कैलेंडर नहीं बल्कि भारतीय इतिहास और संस्कृति की भी एक महत्वपूर्ण पहचान है।
भारतीय संस्कृति में विक्रम संवत का महत्व
आज भी भारत में कई धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं विक्रम संवत के अनुसार ही निभाई जाती हैं। मंदिरों के पंचांग, ज्योतिषीय गणना और त्योहारों की तिथियां इसी कैलेंडर के आधार पर तय होती हैं। यही कारण है कि आधुनिक समय में अंग्रेजी कैलेंडर के साथ-साथ विक्रम संवत भी भारतीय जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।
भारत में समय और त्योहारों की गणना के लिए सदियों से अलग-अलग कैलेंडर का उपयोग किया जाता रहा है। हिंदू धर्म में सबसे अधिक प्रचलित कैलेंडर विक्रम संवत है, जिसके आधार पर व्रत, त्योहार और धार्मिक अनुष्ठान तय किए जाते हैं। अक्सर लोग सुनते हैं कि विक्रम संवत अंग्रेजी कैलेंडर से 57 साल आगे चलता है लेकिन इसके पीछे की कहानी और गणना का तरीका बहुत दिलचस्प है। आइए जानते हैं कि विक्रम संवत क्या है, यह अंग्रेजी कैलेंडर से कैसे अलग है और इसकी शुरुआत किस राजा के पराक्रम से जुड़ी मानी जाती है।
हिंदू नववर्ष और विक्रम संवत की शुरुआत
हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नया वर्ष शुरू होता है। इसी दिन विक्रम संवत का नया साल माना जाता है। अभी विक्रम संवत 2082 चल रहा है और जैसे ही चैत्र शुक्ल प्रतिपदा आएगी नया संवत 2083 शुरू हो जाएगा। हिंदू धर्म में जितने भी प्रमुख त्योहार जैसे नवरात्रि, रामनवमी या दीपावली हैं उनकी तिथियां इसी पंचांग के अनुसार तय होती हैं।
अंग्रेजी कैलेंडर और विक्रम संवत में मुख्य अंतर
अंग्रेजी कैलेंडर और विक्रम संवत दोनों में 12 महीने होते हैं लेकिन इनके आधार अलग हैं। अंग्रेजी कैलेंडर पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा पर आधारित है। इसे 1582 में पोप ग्रेगरी XIII ने लागू किया था और इसी वजह से इसे ग्रेगोरियन कैलेंडर कहा जाता है। इसमें नए साल की शुरुआत हर साल 1 जनवरी से होती है। वहीं विक्रम संवत भारतीय परंपरा पर आधारित है और इसमें समय की गणना चंद्रमा की गति के अनुसार की जाती है। इस पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण को मिलाकर समय तय किया जाता है। हर महीने को दो पक्षों में बांटा जाता है कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष।
विक्रम संवत 57 साल आगे क्यों माना जाता है?
अक्सर लोग पूछते हैं कि विक्रम संवत अंग्रेजी साल से 57 साल आगे क्यों चलता है। दरअसल इसकी शुरुआत 57 ईसा पूर्व मानी जाती है। यानी जब अंग्रेजी कैलेंडर में वर्ष 2026 चल रहा है तब विक्रम संवत लगभग 2083 होता है। यही वजह है कि दोनों कैलेंडर के बीच लगभग 57 साल का अंतर दिखाई देता है।
राजा विक्रमादित्य के पराक्रम से जुड़ी कहानी
विक्रम संवत की शुरुआत का श्रेय महान और न्यायप्रिय शासक राजा विक्रमादित्य को दिया जाता है। इतिहास और लोककथाओं के अनुसार उन्होंने शकों के अत्याचार से कई क्षेत्रों को मुक्त कराया था और उज्जैन में अपना शासन स्थापित किया था। इस बड़ी जीत की याद में उन्होंने एक नए युग की शुरुआत की जिसे आगे चलकर विक्रम संवत कहा गया। राजा विक्रमादित्य को उनकी न्यायप्रियता और पराक्रम के लिए जाना जाता था। उनकी विजय को ही इस पंचांग की शुरुआत का आधार माना गया इसलिए यह केवल एक कैलेंडर नहीं बल्कि भारतीय इतिहास और संस्कृति की भी एक महत्वपूर्ण पहचान है।
भारतीय संस्कृति में विक्रम संवत का महत्व
आज भी भारत में कई धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं विक्रम संवत के अनुसार ही निभाई जाती हैं। मंदिरों के पंचांग, ज्योतिषीय गणना और त्योहारों की तिथियां इसी कैलेंडर के आधार पर तय होती हैं। यही कारण है कि आधुनिक समय में अंग्रेजी कैलेंडर के साथ-साथ विक्रम संवत भी भारतीय जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।












