Navratri 2026: नवरात्रि में पहनने वाले शुभ रंगों की लिस्ट, बरसेगी देवी मां की कृपा

Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से होगा और 27 मार्च को रामनवमी के साथ समाप्त होगा। इस नौ दिवसीय पर्व में हर दिन मां के अलग-अलग रूप की पूजा होती है और उस दिन का निर्धारित रंग पहनने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।

Navratri
नवरात्रि
locationभारत
userअसमीना
calendar11 Mar 2026 12:58 PM
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नवरात्रि भारत में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाने वाला पर्व है। यह समय मां दुर्गा की पूजा-अर्चना का सबसे पवित्र अवसर माना जाता है। साल 2026 में चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से होगा और 27 मार्च को रामनवमी के साथ समाप्त होगा। इस नौ दिवसीय पर्व में हर दिन मां के अलग-अलग रूप की पूजा होती है और उस दिन का निर्धारित रंग पहनने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।

पहला दिन: मां शैलपुत्री- पीला रंग

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। इस दिन पीला रंग पहनना शुभ माना जाता है। पीला रंग खुशी, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है। यह रंग पहनने से घर में सुख और उत्साह की वृद्धि होती है।

दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी- हरा रंग

दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। इस दिन हरा रंग पहनना शुभ होता है। हरा रंग शांति, समृद्धि और विकास का प्रतीक है। यह रंग पहनने से मानसिक स्थिरता और जीवन में नई शुरुआत का अनुभव होता है।

तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा- ग्रे (स्लेटी) रंग

तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। इस दिन ग्रे रंग पहनना शुभ माना जाता है। ग्रे रंग संतुलन और स्थिरता का प्रतीक है। यह नकारात्मकता को दूर करता है और जीवन में मानसिक संतुलन लाता है।

चौथा दिन: मां कूष्मांडा- नारंगी रंग

चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है। इस दिन नारंगी रंग पहनना शुभ माना जाता है। नारंगी रंग उत्साह, ऊर्जा और साहस का प्रतीक है। यह रंग पहनने से जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मक बदलाव आते हैं।

पांचवां दिन: मां स्कंदमाता- सफेद रंग

पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इस दिन सफेद रंग पहनना शुभ होता है। सफेद रंग शुद्धता और शांति का प्रतीक है। यह रंग पहनने से घर और मन में संतुलन और सुकून आता है।

छठा दिन: मां कात्यायनी- लाल रंग

छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है। इस दिन लाल रंग पहनना शुभ होता है। लाल रंग शक्ति, साहस और प्रेम का प्रतीक है। इसे पहनने से विवाह और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

सातवां दिन: मां कालरात्रि- नीला रंग

सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। इस दिन नीला रंग पहनना शुभ माना जाता है। नीला रंग शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक है। यह रंग पहनने से भय और संकट दूर होते हैं।

आठवां दिन: मां महागौरी- गुलाबी रंग

आठवें दिन मां महागौरी की पूजा होती है। इस दिन गुलाबी रंग पहनना शुभ होता है। गुलाबी रंग प्रेम, करुणा और सकारात्मकता का प्रतीक है। इसे पहनने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है।

नवां दिन: मां सिद्धिदात्री- बैंगनी (पर्पल) रंग

नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। इस दिन बैंगनी रंग पहनना शुभ होता है। बैंगनी रंग आध्यात्मिकता और सफलता का प्रतीक है। यह रंग पहनने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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मरने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ते ये जहरीले सांप, आज ही जान लें नाम

वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की मानें तो कुछ प्रजातियों का शरीर मरने के बाद भी घंटों तक रिफ्लेक्स एक्शन (स्वचालित प्रतिक्रिया) करता है। इसका मतलब है कि यदि आप मरे हुए सांप को छूते हैं या उसके मुंह के पास हाथ रखते हैं तो वह अचानक जबड़े बंद कर सकता है और जहर छोड़ सकता है।

Deadly Snakes
मरने के बाद भी डसते हैं ये जहरीले सांप
locationभारत
userअसमीना
calendar07 Mar 2026 01:46 PM
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सांपों को लेकर लोगों के मन में डर और भ्रांतियां हमेशा से रही हैं। अक्सर लोग किसी सांप को देखते ही मारने की कोशिश करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ सांप मरने के बाद भी इंसानों को डस सकते हैं? वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की मानें तो कुछ प्रजातियों का शरीर मरने के बाद भी घंटों तक रिफ्लेक्स एक्शन (स्वचालित प्रतिक्रिया) करता है। इसका मतलब है कि यदि आप मरे हुए सांप को छूते हैं या उसके मुंह के पास हाथ रखते हैं तो वह अचानक जबड़े बंद कर सकता है और जहर छोड़ सकता है।

कैसे काम करता है सांप का शरीर मरने के बाद?

सांप का तंत्रिका तंत्र इंसानों से अलग होता है। मरने के तुरंत बाद भी उसके शरीर के अंग पूरी तरह निष्क्रिय नहीं होते। कुछ तंत्रिकाएं सक्रिय रहती हैं और बाहरी उत्तेजना पर प्रतिक्रिया देती हैं। यही कारण है कि मर चुके सांप का भी जबड़ा अचानक बंद हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी स्थिति में चाहे सांप मरा हो या जीवित उसे नग्न हाथों से न छुआ जाए।

ये हैं तीन खतरनाक सांप जो मरने के बाद भी डस सकते हैं

नाग (Cobra)

भारत में सबसे प्रसिद्ध जहरीला सांप। खतरा महसूस होने पर यह फन फैलाता है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार असम में मरे हुए नाग के काटने से व्यक्ति को छह दिन अस्पताल में रहना पड़ा।

घोंस या रसेल वाइपर (Russell’s Viper)

महाराष्ट्र और ग्रामीण इलाकों में बहुतायत में पाया जाने वाला जहरीला सांप। इसका जहर खून को जमाने की क्षमता रखता है इसलिए डसने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।

ब्राउन स्नेक (Brown Snake)

मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया में पाई जाने वाली यह प्रजाति दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में शामिल है। मरने के बाद भी इसके शरीर में प्रतिक्रिया करने की क्षमता होती है।

महाराष्ट्र के ‘बिग फोर’ जहरीले सांप

महाराष्ट्र में चार प्रमुख जहरीले सांप पाए जाते हैं जिन्हें बिग फोर कहा जाता है। इनमें नाग (Cobra), घोंस (Russell’s Viper), मन्यार (Common Krait), फुर्से (Saw-scaled Viper) शामिल हैं। ये सभी सांप मरने के बाद भी कुछ घंटों तक प्रतिक्रिया कर सकते हैं इसलिए इनके संपर्क में आने से बचना बहुत जरूरी है।

सांप दिखाई देने पर क्या करें?

विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें। चाहे सांप जहरीला हो या सामान्य, तुरंत स्थानीय सर्प मित्र (Snake Catcher) या वन विभाग को सूचित करें। यदि सांप मरा हुआ भी हो तो उसे नग्न हाथों से न छुएं। भारत में पाए जाने वाले अधिकांश सांप जहरीले नहीं होते। ये पर्यावरण का हिस्सा हैं और चूहों जैसी कीटों की आबादी नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि सांप सिर्फ खतरे का प्रतीक नहीं बल्कि प्रकृति के संतुलन के लिए भी आवश्यक हैं।

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चाणक्य नीति में दर्ज है महिलाओं को लेकर बड़ा दावा

चाणक्य नीति में दर्ज है कि महिलाएं सभी मामलों में पुरूषों से अधिक श्रेष्ठ होती हैं। चाणक्य नीति में दावा किया गया है कि पुरूषों के मुकाबले में महिलाओं के अंदर चारगुना अधिक बुद्धि तथा विवेक होता है। इतना ही नहीं चाणक्य नीति में यह भी दर्ज है कि महिलाएं पुरूषों के मुकाबले 6 गुना अधिक साहसी होती हैं।

चाणक्य नीति में नारी शक्ति का उल्लेख
चाणक्य नीति में नारी शक्ति का उल्लेख
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar06 Mar 2026 02:40 PM
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Chanakya Niti : आचार्य चाणक्य की चाणक्य नीति में वह सब-कुछ मौजूद है जो और कहीं नहीं है। चाणक्य नीति में महिलाओं के विषय में बहुत विस्तार से लिखा गया है। चाणक्य नीति में महिलाओं को लेकर एक बहुत बड़ा दावा किया गया है। चाणक्य नीति में दर्ज है कि महिलाएं सभी मामलों में पुरूषों से अधिक श्रेष्ठ होती हैं। चाणक्य नीति में दावा किया गया है कि पुरूषों के मुकाबले में महिलाओं के अंदर चारगुना अधिक बुद्धि तथा विवेक होता है। इतना ही नहीं चाणक्य नीति में यह भी दर्ज है कि महिलाएं पुरूषों के मुकाबले 6 गुना अधिक साहसी होती हैं।

पुरूषों के मुकाबले आठ गुना अधिक होती हैं काम वासना

आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित चाणक्य नीति में महिलाओं के ऊपर खूब लिखा गया है। चाणक्य नीति के पहले अध्याय के 17वें श्लोक में आचार्य चाणक्य ने महिलाओं की अनेक विशेषताओं का वर्णन किया है। चाणक्य नीति के प्रथम अध्याय का 17वां श्लोक इस प्रकार है कि - “स्त्रीणां द्विगुण आहारो बुद्धिस्तासां चतुर्गुणा। साहसं षड्गुणं चैव कामोऽष्टगुण उच्यते।।“ इस श्लोक में कहा गया है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं का आहार दोगुना होता है, उनकी बुद्धि चौगुनी होती है, उनमें पुरुषों के मुकाबले छह गुना अधिक साहस होता है और कामवासना आठ गुना होती है।

पुरुषों से दो गुना भोजन करती हैं महिलाएं

चाणक्य नीति के अनुसार महिलाओं को भोजन की आवश्यकता पुरुष की अपेक्षा अधिक होती है। महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले अधिक शारीरिक कार्य करना पड़ता है। पहले के समय में महिलाओं को घर में कई ऐसे छोटे-मोटे काम करने पड़ते थे, जिनमें ऊर्जा अधिक खर्च होती थी। वहीं, आज के दौर में भी स्थिति लगभग वैसी ही है। इसके अलावा महिलाओं की शारीरिक बनावट, उसमें होने वाले परिवर्तन और प्रजनन आदि कार्यों से क्षय हुई ऊर्जा को प्राप्त करने के लिए उन्हें अतिरिक्त पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है। चाणक्य नीति में आगे कहा गया है कि आचार्य कहते हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में चार गुना अधिक बुद्धि होती है। उनके अनुसार, समस्याओं को सुलझाने से बुद्धि का विकास होता है और महिलाओं को परिवार रोजाना कई मामलों को सुलझाना पड़ता है। इससे उनकी बुद्धि अधिक तेज होती है और छोटी-छोटी बातों को समझने की दृष्टि का विकास होता।

पुरुषों से छह गुना अधिक साहस होता है महिलाओं में

चाणक्य नीति में आगे कहा गया है कि महिलाओं में साहस पुरुषों से छह गुना अधिक होना भी स्वाभाविक है। पशु-पक्षियों की मादाओं में भी देखा गया है कि अपनी संतान की रक्षा के लिए वे अपने से कई गुना बलशाली के सामने लड़-मरने के लिए डट जाती हैं। आचार्य चाणक्य का कहना है कि महिलाओं में कामवासना का आठ गुना होना पाप नहीं है। सामाजिक कानून के विरुद्ध भी नहीं है। इसका होना अनैतिक या चरित्रहीन होने की पुष्टि भी नहीं करता है। श्रीकृष्ण ने स्वयं को 'धर्मानुकूल काम' कहा है। काम पितृ ऋण से मुक्त होने का सहज मार्ग है। संतान उत्पन्न करके ही कोई इस ऋण से मुक्त हो सकता है। Chanakya Niti


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