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Kainchi Dham: नीम करौली बाबा को उनके अनुयायी हनुमान जी का परम भक्त और उनका स्वरूप मानते हैं। यही कारण है कि आज भी लाखों लोग उनकी शिक्षाओं और जीवन से प्रेरणा लेते हैं। स्थापना दिवस के अवसर पर आइए जानते हैं बाबा के जीवन और कैंची धाम से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जिनकी चर्चा आज भी भक्तों के बीच होती है।

Neem Karoli Baba: उत्तराखंड के नैनीताल में स्थित प्रसिद्ध कैंची धाम आज अपना स्थापना दिवस मना रहा है। हर साल 15 जून को यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं और बाबा नीम करौली महाराज के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लेते हैं। इस बार भी देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा विदेशों से आए भक्त कैंची धाम में जुटे हैं। नीम करौली बाबा को उनके अनुयायी हनुमान जी का परम भक्त और उनका स्वरूप मानते हैं। यही कारण है कि आज भी लाखों लोग उनकी शिक्षाओं और जीवन से प्रेरणा लेते हैं। स्थापना दिवस के अवसर पर आइए जानते हैं बाबा के जीवन और कैंची धाम से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जिनकी चर्चा आज भी भक्तों के बीच होती है।
कहा जाता है कि बाबा नीम करौली पहली बार 1961 में इस स्थान पर पहुंचे थे। यहां की शांत वादियों और आध्यात्मिक वातावरण ने उन्हें काफी प्रभावित किया। इसके बाद उन्होंने अपने भक्त पूर्णानंद के साथ मिलकर यहां आश्रम बनाने का निर्णय लिया। कई वर्षों की तैयारी के बाद 15 जून 1964 को कैंची धाम आश्रम की स्थापना हुई। तभी से हर साल 15 जून को यहां विशाल भंडारे और मेले का आयोजन किया जाता है। स्थापना दिवस पर लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने और प्रसाद ग्रहण करने पहुंचते हैं।
नीम करौली बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में हुआ माना जाता है। उनका बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा बताया जाता है। बचपन से ही उनका मन आध्यात्मिकता की ओर आकर्षित था। धीरे-धीरे उन्होंने सांसारिक जीवन से दूरी बनाकर भक्ति और सेवा का मार्ग अपना लिया। अपने जीवनकाल में बाबा ने लोगों को प्रेम, सेवा और ईश्वर भक्ति का संदेश दिया। उनके अनुयायियों का मानना है कि बाबा के पास आने वाला कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं लौटता था। उनकी सरल जीवनशैली और लोगों के प्रति प्रेम ने उन्हें करोड़ों श्रद्धालुओं के दिलों में विशेष स्थान दिलाया।
नीम करौली बाबा की पहचान उनकी सादगी थी। वे कभी दिखावे में विश्वास नहीं करते थे। अक्सर साधारण चौकी या जमीन पर बैठकर लोगों से मिलते थे। उनके शरीर पर हमेशा एक साधारण कंबल रहता था। यही वजह थी कि लोग उन्हें प्यार से 'कंबल वाले बाबा' कहने लगे। देश ही नहीं विदेशों में भी यह नाम काफी प्रसिद्ध हुआ। आज भी बाबा की तस्वीरों में उन्हें कंबल ओढ़े हुए देखा जा सकता है।
कैंची धाम के स्थापना दिवस पर लगने वाला भंडारा बेहद प्रसिद्ध है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता। चाहे लाखों लोग पहुंच जाएं लेकिन सभी को प्रसाद अवश्य मिलता है। यहां मिलने वाला मालपुआ प्रसाद भक्तों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय है। लोग इसे बाबा का आशीर्वाद मानकर ग्रहण करते हैं और अपने साथ घर भी लेकर जाते हैं।
बाबा नीम करौली से जुड़ी सबसे चर्चित कथाओं में से एक कैंची धाम के भंडारे की है। कहा जाता है कि एक बार आश्रम में बड़े भंडारे की तैयारी चल रही थी। तभी प्रसाद बनाने के लिए रखा गया घी खत्म हो गया। सेवादार चिंतित होकर बाबा के पास पहुंचे। बाबा ने उन्हें पास की नदी से पानी लाने को कहा। मान्यता है कि जब उस पानी को कड़ाही में डाला गया तो वह घी जैसा हो गया और उसी से प्रसाद तैयार किया गया। भक्त इस घटना को बाबा की कृपा और चमत्कार के रूप में याद करते हैं।
बाबा के जीवन से जुड़ी सबसे लोकप्रिय घटनाओं में ट्रेन वाली कहानी भी शामिल है। कहा जाता है कि एक बार वे बिना टिकट ट्रेन में यात्रा कर रहे थे। टिकट जांच के दौरान रेलवे कर्मचारियों ने उन्हें ट्रेन से उतार दिया। कथा के अनुसार, बाबा के उतरने के बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ सकी। काफी प्रयासों के बावजूद जब ट्रेन नहीं चली तो अधिकारियों ने बाबा से क्षमा मांगी और उन्हें वापस ट्रेन में बैठाया। जैसे ही बाबा ट्रेन में बैठे ट्रेन चल पड़ी। इसके बाद यह घटना दूर-दूर तक चर्चा का विषय बन गई और लोग उन्हें नीम करौली बाबा के नाम से जानने लगे।
भक्तों के बीच एक और कथा काफी प्रचलित है। कहा जाता है कि एक गंभीर रूप से बीमार भक्त के लिए बाबा ने साधारण जल मंगवाया और उसे आशीर्वाद देकर पीने को दिया। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि उस जल को पीने के बाद भक्त की तबीयत में सुधार होने लगा। हालांकि इन घटनाओं को भक्त आस्था और विश्वास से जोड़कर देखते हैं लेकिन इन कथाओं ने बाबा के प्रति लोगों की श्रद्धा को और मजबूत किया है।
नीम करौली बाबा के भक्त केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। अमेरिका, यूरोप और कई अन्य देशों से भी लोग कैंची धाम पहुंचते हैं। तकनीक की दुनिया से जुड़े कई बड़े नाम भी बाबा के प्रति अपनी श्रद्धा जता चुके हैं। आज स्थापना दिवस के अवसर पर कैंची धाम एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति और आस्था का केंद्र बना हुआ है। लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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