सनातन धर्म के सबसे प्रसिद्ध प्रसंगों में से एक है कंस को हुई आकाशवाणी, जिसने न केवल एक अत्याचारी राजा के जीवन की दिशा बदल दी, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के अवतार का मार्ग भी प्रशस्त किया। ह घटना केवल एक भविष्यवाणी नहीं थी, बल्कि अधर्म के अंत और धर्म की स्थापना का दिव्य संकेत थी।

The Story of the Killing of Kansa : सनातन धर्म के सबसे प्रसिद्ध प्रसंगों में से एक है कंस को हुई आकाशवाणी, जिसने न केवल एक अत्याचारी राजा के जीवन की दिशा बदल दी, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के अवतार का मार्ग भी प्रशस्त किया। यह घटना केवल एक भविष्यवाणी नहीं थी, बल्कि अधर्म के अंत और धर्म की स्थापना का दिव्य संकेत थी। The Story of the Killing of Kansa
मथुरा के राजा उग्रसेन का पुत्र कंस अपनी बहन देवकी से अत्यंत प्रेम करता था। जब देवकी का विवाह यदुवंशी राजकुमार वसुदेव के साथ हुआ, तब कंस स्वयं अपनी बहन की विदाई के लिए रथ चला रहा था। उसी समय अचानक आकाश से दिव्य वाणी सुनाई दी "हे कंस! जिस देवकी को तू इतने प्रेम से विदा कर रहा है, उसी का आठवां पुत्र तेरे वध का कारण बनेगा।" यह आकाशवाणी सुनते ही कंस का चेहरा भय और क्रोध से भर गया। जिस बहन को वह सम्मानपूर्वक विदा कर रहा था, उसी के गर्भ से जन्म लेने वाला बालक उसकी मृत्यु का कारण बनेगा यह विचार उसके लिए असहनीय था। The Story of the Killing of Kansa
आकाशवाणी सुनते ही कंस ने तलवार निकालकर देवकी की हत्या करने का निश्चय कर लिया। उस समय वसुदेव ने अत्यंत बुद्धिमानी और धैर्य से कंस को समझाया। उन्होंने कहा कि देवकी से नहीं, बल्कि उसके पुत्र से तुम्हें खतरा है। इसलिए मैं वचन देता हूं कि देवकी की प्रत्येक संतान जन्म लेते ही तुम्हें सौंप दूंगा। वसुदेव के इस वचन पर कंस ने तत्काल देवकी की हत्या नहीं की, लेकिन दोनों को कारागार में कैद कर दिया। The Story of the Killing of Kansa
समय बीतता गया और देवकी की संतानें जन्म लेने लगीं। कंस ने निर्दयता की सारी सीमाएं पार करते हुए देवकी के पहले छह पुत्रों को जन्म लेते ही मार डाला। सातवें गर्भ में विराजमान शेषनाग के अवतार बलराम को भगवान विष्णु की योगमाया ने देवकी के गर्भ से रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया। इसलिए लोगों को लगा कि देवकी का गर्भपात हो गया। The Story of the Killing of Kansa
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और आधी रात के समय भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी के आठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया। भगवान की दिव्य माया से कारागार के सभी पहरेदार सो गए, बेड़ियां खुल गईं और जेल के द्वार स्वयं खुल गए। वसुदेव नवजात श्रीकृष्ण को लेकर यमुना पार गोकुल पहुंचे और वहां नंद बाबा तथा यशोदा के घर जन्मी कन्या को लेकर वापस कारागार आ गए। जब कंस ने उस कन्या को मारना चाहा तो वह देवी योगमाया के रूप में आकाश में प्रकट हुईं और बोलीं हे मूर्ख! तेरा काल कहीं और जन्म ले चुका है। इसके बाद कंस का भय और बढ़ गया और उसने श्रीकृष्ण को खोजकर मारने के अनेक प्रयास किए, लेकिन अंततः भगवान श्रीकृष्ण ने युवावस्था में मथुरा पहुंचकर कंस का वध कर दिया। The Story of the Killing of Kansa
कंस को हुई आकाशवाणी केवल भविष्यवाणी नहीं थी। यह संदेश देती है कि जब अधर्म अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाता है, तब ईश्वर किसी न किसी रूप में धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं।कंस ने अपनी मृत्यु के भय में अनेक पाप किए, लेकिन नियति को कोई नहीं बदल सका। अंततः वही आठवां पुत्र भगवान श्रीकृष्ण बना और उसने अधर्म का अंत करके धर्म की स्थापना की। The Story of the Killing of Kansa
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