Kanwar Jalabhishek 2026: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इसी महीने लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। कांवड़िए हरिद्वार, गोमुख, गंगोत्री, केदारनाथ, नीलकंठ और अन्य पवित्र स्थानों से गंगाजल लेकर पैदल अपने शहर या गांव के शिव मंदिर तक पहुंचते हैं।

सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इसी महीने लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। कांवड़िए हरिद्वार, गोमुख, गंगोत्री, केदारनाथ, नीलकंठ और अन्य पवित्र स्थानों से गंगाजल लेकर पैदल अपने शहर या गांव के शिव मंदिर तक पहुंचते हैं। इसके बाद भगवान शिव का जलाभिषेक कर उनसे सुख, शांति और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा के साथ चढ़ाया गया गंगाजल भगवान शिव को बहुत प्रिय होता है। इसलिए हर साल सावन के दौरान कांवड़ यात्रा में करोड़ों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
साल 2026 में कांवड़ जलाभिषेक के लिए कई शुभ दिन बताए गए हैं। ज्योतिष के अनुसार इन तिथियों पर भगवान शिव का जलाभिषेक करना बेहद शुभ माना गया है।
इस बार सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य पं. राकेश झा के अनुसार इस दिन दोपहर 3 बजकर 25 मिनट तक भद्रा का प्रभाव रहेगा। जो लोग भद्रा का विशेष ध्यान रखते हैं, वे इसके समाप्त होने के बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करें। हालांकि धार्मिक मान्यता यह भी कहती है कि भगवान शिव की पूजा में भद्रा का विशेष दोष नहीं माना जाता। इसलिए श्रद्धालु पूरे दिन भी जलाभिषेक कर सकते हैं। फिर भी यदि कोई शुभ मुहूर्त के अनुसार पूजा करना चाहता है तो दोपहर 3:25 बजे के बाद का समय सबसे बेहतर रहेगा।
सावन के दौरान 10 अगस्त 2026 का दिन भी काफी महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन आर्द्रा नक्षत्र रहेगा, जिसे भगवान शिव की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन सुबह का समय और सूर्यास्त से पहले का प्रदोष काल जलाभिषेक के लिए विशेष फलदायी माना गया है। अगर कोई श्रद्धालु शिवरात्रि की भीड़ से बचकर शांत माहौल में पूजा करना चाहता है, तो 10 अगस्त भी उसके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था और समर्पण का प्रतीक है। श्रद्धालु कई किलोमीटर पैदल चलकर गंगाजल लाते हैं और बिना किसी दिखावे के पूरी श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस यात्रा के दौरान किया गया हर कदम पुण्य देता है। भगवान शिव अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं और जीवन की परेशानियों को दूर करने का आशीर्वाद देते हैं। यही वजह है कि हर साल लाखों लोग कठिन रास्तों के बावजूद इस यात्रा में शामिल होते हैं।
जलाभिषेक करते समय मन को शांत रखें और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव का स्मरण करें। गंगाजल धीरे-धीरे शिवलिंग पर अर्पित करें और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते रहें। अगर संभव हो तो बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल और अक्षत भी भगवान शिव को अर्पित करें। पूजा के दौरान किसी भी तरह की जल्दबाजी न करें और मंदिर के नियमों का पालन करें।
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