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जब भी आप न्यूज देखते हैं, चुनाव की चर्चा सुनते हैं या संसद की खबरें पढ़ते हैं तब अक्सर तीन नाम बार-बार सामने आते हैं लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा। कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा क्या हैं, लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा में फर्क क्या है और सरकार कहां से बनती है।

जब भी आप न्यूज देखते हैं, चुनाव की चर्चा सुनते हैं या संसद की खबरें पढ़ते हैं तब अक्सर तीन नाम बार-बार सामने आते हैं लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा। कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा क्या हैं, लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा में फर्क क्या है और सरकार कहां से बनती है। नाम सुनने में ये थोड़े मुश्किल लग सकते हैं लेकिन अगर इन्हें आसान भाषा में समझा जाए तो बात बिल्कुल साफ हो जाती है। हमारा देश भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां जनता अपने प्रतिनिधि चुनती है और वही प्रतिनिधि सरकार चलाते हैं। इसी व्यवस्था को सही तरीके से चलाने के लिए लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा जैसे सदन बनाए गए हैं। हर सदन का अपना अलग काम, ताकत और जिम्मेदारी होती है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि इन तीनों के बीच असली अंतर क्या है।
लोकसभा को जनता का सदन कहा जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इसके सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं। पूरे देश को अलग-अलग चुनाव क्षेत्रों में बांटा जाता है और हर क्षेत्र से एक सांसद यानी MP चुना जाता है। लोकसभा में इस समय कुल 543 सीटें हैं। इन सदस्यों का कार्यकाल 5 साल का होता है। अगर बीच में सरकार गिर जाए या सदन भंग हो जाए तो चुनाव पहले भी हो सकते हैं। लोकसभा की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यहीं से केंद्र सरकार बनती है। जिस पार्टी या गठबंधन को यहां बहुमत मिलता है वही सरकार बनाता है और उसी पार्टी का नेता प्रधानमंत्री बनता है।
राज्यसभा को राज्यों का सदन कहा जाता है। इसका काम राज्यों की आवाज को संसद तक पहुंचाना होता है। लोकसभा की तरह इसके सदस्य सीधे जनता द्वारा नहीं चुने जाते। राज्यसभा के सदस्यों को राज्यों की विधानसभाओं के विधायक यानी MLA चुनते हैं। इसके अलावा 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं। ये सदस्य कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों से हो सकते हैं।
राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं। इसकी खास बात यह है कि यह कभी भंग नहीं होती। इसे स्थायी सदन कहा जाता है। इसके सदस्य 6 साल के लिए चुने जाते हैं और हर 2 साल में एक-तिहाई सदस्य बदल जाते हैं।
विधानसभा राज्य स्तर पर काम करती है। जैसे पूरे देश के लिए लोकसभा होती है, वैसे ही हर राज्य के लिए विधानसभा होती है।विधानसभा के सदस्य भी सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं और इन्हें विधायक यानी MLA कहा जाता है। हर राज्य में सीटों की संख्या अलग-अलग होती है। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 403 सीटें हैं। विधानसभा का कार्यकाल भी 5 साल का होता है। यहां जिस पार्टी को बहुमत मिलता है वही राज्य सरकार बनाती है और उसी पार्टी का नेता मुख्यमंत्री बनता है।
लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में जनता सीधे वोट डालती है। जिस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं वह चुनाव जीत जाता है लेकिन राज्यसभा का चुनाव थोड़ा अलग होता है। इसमें आम जनता वोट नहीं देती। राज्य के विधायक अपने वोट से राज्यसभा के सदस्यों को चुनते हैं। यही कारण है कि लोकसभा और विधानसभा को सीधे जनता से जुड़ा माना जाता है जबकि राज्यसभा एक अप्रत्यक्ष चुनाव प्रक्रिया से बनती है।
केंद्र सरकार लोकसभा से बनती है। अगर किसी पार्टी या गठबंधन को 543 में से कम से कम 272 सीटें मिल जाती हैं तो वह सरकार बना सकता है। उसी पार्टी का नेता प्रधानमंत्री बनता है। राज्य सरकार विधानसभा से बनती है। जिस पार्टी को विधानसभा में बहुमत मिलता है वही सरकार बनाती है और उसका नेता मुख्यमंत्री बनता है। राज्यसभा सरकार बनाने में सीधे हिस्सा नहीं लेती लेकिन कानून बनाने और फैसलों की जांच करने में इसकी बड़ी भूमिका होती है।
लोकसभा और राज्यसभा दोनों मिलकर संसद बनाते हैं और देश के लिए कानून बनाते हैं। कोई भी बड़ा कानून दोनों सदनों से पास होना जरूरी होता है। लोकसभा में बिल पेश होता है उस पर चर्चा होती है और फिर राज्यसभा में भी उसे मंजूरी मिलती है। इस प्रक्रिया से कानून ज्यादा मजबूत और संतुलित बनता है। विधानसभा राज्य के कानून बनाती है। जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस और स्थानीय प्रशासन से जुड़े कई फैसले राज्य स्तर पर लिए जाते हैं।
अगर बहुत आसान भाषा में समझें तो लोकसभा से प्रधानमंत्री बनता है, विधानसभा से मुख्यमंत्री बनता है और राज्यसभा कानूनों को संतुलित करने का काम करती है। लोकसभा पूरे देश की सरकार से जुड़ी है, विधानसभा राज्य की सरकार से जुड़ी है और राज्यसभा दोनों के बीच एक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।
भारत जैसे बड़े देश में सिर्फ एक व्यवस्था से काम नहीं चल सकता। इसलिए अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग सदनों की जरूरत होती है। लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा मिलकर लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं। इनके जरिए जनता की आवाज सरकार तक पहुंचती है और सरकार के फैसलों पर नजर भी रखी जाती है। यही वजह है कि ये तीनों हमारे संविधान और लोकतंत्र की सबसे अहम कड़ियां मानी जाती हैं।
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