■ मुंबई में घटी अकेलेपन की एक भयावह घटना जिसमें एक करोड़ों के फ्लैट में अकेली रहने वाली बुढ़िया माँ का शव चार महीने तक अनदेखा पड़ा रहा और कीड़ों द्वारा खाये जाने बाद कंकाल ही बाकी बचा था। इसी भांति अनगिनत लोग अकेलेपन के शिकार होकर अपनी अंतिम साँसों की प्रतीक्षा में जी रहे हैं।
■ आपकी नजर में मोटापा और शराब पीना या धूम्रपान करना भले ही बीमारी न हो लेकिन ये इंसान को बीमार करने का कारण जरूर बनते हैं। इनके कारण आप बीमार तो होते ही हैं साथ ही जीवन के कुछ साल कम भी कर लेते हैं। लेकिन आपको जितना नुकसान मोटापा, शराब और सिगरेट से होता है, उतना ही नुकसान अकेले रहने से भी होता है। अकेलापन (Loneliness) भी आपको बीमारी नहीं लगेगा, लेकिन शोधकर्ताओं की मानें तो स्वास्थ्य के मामले में ये चिंता का विषय बन गया है, खासकर बड़ी उम्र के वयस्कों में।
■ किये गए नए शोध अकेलेपन को लेकर लोगों को स्पष्ट चेतावनी देने की कोशिश कर रहे हैं। शोध में पाया गया है कि अकेले जीवन जीने या अकेलापन महसूस करने से आप विकलांगता, मानसिक अस्थिरता, यहां तक कि असमय मृत्यु के अधिक करीब पहुंच जाते हैं। एक अध्ययन के मुताबिक अकेले रहने से ज्यादा अकेलापन या अलगाव की भावना आपको ज्यादा प्रभावित करती है। जो लोग अकेलापन महसूस करते हैं, उनमें खराब मानसिक स्वास्थ्य, दिल संबंधी बीमारियों के होने की संभावना अधिक होती है और वे अकेले रहने वालों की तुलना में मरते भी जल्दी हैं। शोध के स्पष्ट नतीजे बताते हैं कि अकेलापन "अवसाद" नामक खतरनाक बीमारी को जन्म देता है।
बढ़ती उम्र के साथ अकेलापन भी बढता है...
◆ यूनिवर्सिटी ऑफ केलिफोर्निया सेन डियागो स्कूल ऑफ मेडिसिन में शोध के जरिए यह जानने की कोशिश की गई कि जो वयस्क रिटायर हो चुके हैं और अकेले रहते हैं, उन पर अकेलेपन का क्या असर होता है?
◆ जर्नल 'एजिंग एंड मेंटल हेल्थ' में प्रकाशित नए अध्ययन में पाया गया कि जो अकेले रहने वाले लोग हैं, उन के अनुभव कई व्यक्तिगत और पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित होते हैं। अकेलेपन का सबसे पहला कारण उम्र बढ़ने पर होने वाले बदलाव और सामाजिक कौशल का न होना ही माना जाता है।
◆ बुढापे में लोग अक्सर खुद को बहिष्कृत व तिरस्कृत महसूस करने लगते हैं, साथ ही नए जमाने के अन्य सदस्यों से वो खुद को पिछड़ा समझने लगते हैं, इसलिए भी अकेलेपन की भावना उनमें जन्म ले लेती है।
◆ बढ़ती उम्र में अकेलापन महसूस करने का दूसरा कारण अपने जीवन साथी या किसी अपने करीबी की मौत भी होता है। खास बात ये भी होती है कि इस उम्र में इन लोगों के नए दोस्त भी नहीं बन पाते हैं। अकेलेपन की भावना ज्यादातर जीवन में उद्देश्य की कमी के साथ भी जुड़ी होती है।
क्या है अकेलापन...?
◆ अकेलापन कब अवसाद में बदलकर आपकी खुशहाल जिंदगी को लील जाएगा आपको भनक भी नहीं लगेगी।
◆ अवसाद (Depression) और अकेलापन यूं तो अलग-अलग हैं लेकिन ये दोनों एक दूसरे की वजह से हो सकते हैं. अवसाद के कारण अकेलापन हो सकता है तो अकेलेपन के कारण अवसाद भी हो सकता है।
◆ अकेले होने का अर्थ केवल शारीरिक रूप से अकेले होना नहीं होता, बल्कि पूरे परिवार में रहते हुए भी कुछ लोग अपने आप को अकेला महसूस कर सकते हैं। अकेलेपन के शिकार लोगों को लगता है कि कोई उनपर ध्यान नहीं देता और उनसे प्यार नहीं करता।
◆ अकेलेपन की वजह से नकारात्मक विचार पैदा होते हैं और ये मानसिक अवसाद को जन्म देते हैं।
■ अकेलापन महसूस करना अकेले रहने से अधिक खतरनाक है...
◆ अकेलापन शरीर के लिए अच्छा नहीं होता। अकेलेपन को तो वैसे भी कभी सकारात्मक तौर पर लिया ही नहीं गया। इसे हमेशा दुख के साथ ही जोड़ा गया है और जो अवस्था दुख के साथ जुड़ी हुई हो वो शरीर पर अच्छा प्रभाव तो नहीं डाल सकती।
जानिए क्या होते हैं अकेले रहने के प्रभाव...
◆ अकेले रहने वाले लोगों में दिल की बीमारी होने का खतरा अन्य लोगों की तुलना में 29% अधिक होता है।
◆ अकेलेपन से पीड़ित लोगों में स्ट्रोक होने का खतरा 32% ज्यादा होता है।
◆ डिप्रेशन होने के पीछे अकेलापन ही सबसे अहम कारण होता है। डिप्रेशन के शिकार व्यक्ति को आत्मघाती विचार भी आते हैं जिसके कारण रोगी स्वयं को नुक्सान पहुंचा सकता है।
◆ जो लोग अकेलेपन से जूझ रहे होते हैं वो ठीक से सो भी नहीं पाते। अच्छी नींद न मिलने के कारण उन्हें स्ट्रोक, दिल की बीमारी होने का खतरा बना रहता है, साथ ही डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है।
◆ अकेलेपन के रोगी गलत आदतों में पड़ जाते हैं। अकेलापन दूर करने के लिए लोग नशा, धूम्रपान, आदि को अपनाते हैं और इनके दुष्प्रभावों का शिकार होते हैं।
◆ एक शोध में पाया गया है कि अगर आप अकेलापन महसूस करते हैं तो आप किसी भी जर्म्स, वैक्टीरिया अथवा वायरल जनित बीमारी का शिकार जल्दी होते हैं। अकेलेपन और अवसाद से ग्रसित व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
◆ अकेलेपन व अवसाद से ग्रसित व्यक्ति स्वयं में ही खोया व स्वयं से बातें करने वाला होता है। आपसे बातें करते हुए वह आँखें मिलाने से बचता है। अंधेरा पसंद करता है। पूछने पर स्वस्थ्य होने का दिखावा करता है।
◆ इस रोग के रोगी को ऐसा लगता है कि सब उसके खिलाफ साज़िश रच रहे हैं। अकेले होने पर भी उसको लोगों की आवाजें सुनाई देती हैं।
◆ स्वयं को बीमार नहीं मानता। औषधि सेवन से बचता है। विकृत स्थिति में आत्म हत्या का प्रयास कर सकता है।
अकेलेपन से कैसे जीतें...
◆ अकेलापन खत्म करने के लिए लोगों से मिलना जुलना चाहिए। लोगों से बातचीत करना चाहिए। सोशल मीडिया पर लोगों से जुड़ने के बजाए वास्तविक संसार में लोगों से मिलना चाहिए।
◆ पुराने मित्रों से मिलकर उनके साथ समय बिताइए। उनके साथ ताश, कैरम, शतरंज आदि खेल खेलना चाहिए। ऐसा करना वर्चुअल संसार से काफी ज्यादा मददगार होगा।
◆ जब अकेले हों तो अपने शौक और प्रतिभा पर ध्यान दें। अपनी पसंद का काम संगीत, पेंटिंग्स, लेखन, कविता आदि करने में आप कभी बोर नहीं होंगे और अकेला भी महसूस नहीं करेंगे।
◆ माना कि बहुत से लोगों को अकेले रहना अच्छा लगता हो। आज भले ही अकेले रहकर आप मन की कर रहे हों, लेकिन उम्र बढ़ने पर यही अकेलापन आपके लिए परेशानी का कारण बन सकता है, इसलिए मिलजुलकर रहने में ही फायदा है।