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Lotus Temple: हर साल लाखों पर्यटक और श्रद्धालु यहां घूमने और शांति महसूस करने आते हैं। कमल के फूल जैसी दिखने वाली यह इमारत सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि एकता, शांति और इंसानियत का प्रतीक मानी जाती है।

दिल्ली में मौजूद लोटस टेंपल भारत की सबसे खूबसूरत और प्रसिद्ध इमारतों में से एक माना जाता है। इसकी अनोखी बनावट और शांत माहौल दुनियाभर के लोगों को अपनी ओर खींचता है। हर साल लाखों पर्यटक और श्रद्धालु यहां घूमने और शांति महसूस करने आते हैं। कमल के फूल जैसी दिखने वाली यह इमारत सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि एकता, शांति और इंसानियत का प्रतीक मानी जाती है।
लोटस टेंपल दिल्ली के कालकाजी इलाके में स्थित एक प्रसिद्ध उपासना स्थल है। इसे “कमल मंदिर” भी कहा जाता है क्योंकि इसकी पूरी डिजाइन कमल के फूल जैसी दिखाई देती है। यह मंदिर अपनी वास्तुकला और शांत वातावरण के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। लोटस टेंपल किसी एक धर्म के लोगों के लिए नहीं बना है। यहां हर धर्म, जाति और देश के लोग आ सकते हैं। इस मंदिर में किसी खास देवी-देवता की मूर्ति नहीं है और न ही यहां पारंपरिक पूजा-पाठ होता है। यहां लोग सिर्फ शांति से बैठकर प्रार्थना और ध्यान करते हैं।
बहुत से लोग सोचते हैं कि लोटस टेंपल हिंदू मंदिर है क्योंकि इसकी आकृति कमल के फूल जैसी है लेकिन ऐसा नहीं है। यह मंदिर बहाई धर्म से जुड़ा हुआ है। बहाई धर्म दुनिया का एक ऐसा धर्म है जो मानव एकता, शांति और भाईचारे का संदेश देता है। इस धर्म की शुरुआत 19वीं सदी में ईरान में हुई थी। बहाई धर्म का मानना है कि सभी धर्मों का मूल संदेश एक ही है और पूरी मानवता एक परिवार की तरह है। लोटस टेंपल बहाई उपासना स्थल है इसलिए यहां किसी धर्म विशेष को नहीं बल्कि सभी धर्मों को समान सम्मान दिया जाता है।
लोटस टेंपल का निर्माण साल 1980 में शुरू हुआ था और इसे पूरा होने में करीब 6 साल लगे। यह मंदिर साल 1986 में आम लोगों के लिए खोला गया था। इस शानदार इमारत को ईरान के मशहूर वास्तुकार फ़रीबॉर्ज सहबा ने डिजाइन किया था। उन्होंने कमल के फूल को भारत की संस्कृति और शांति का प्रतीक मानकर इसकी डिजाइन तैयार की। मंदिर को बनाने में सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया जिसे ग्रीस से मंगाया गया था। इसकी खूबसूरती दिन और रात दोनों समय देखने लायक होती है।
भारत में कमल का फूल पवित्रता, शांति और सुंदरता का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से लोटस टेंपल को कमल के आकार में बनाया गया। इस इमारत में कुल 27 बड़ी संगमरमर की पंखुड़ियां हैं जिन्हें तीन-तीन के समूह में लगाया गया है। दूर से देखने पर यह पूरी इमारत पानी में खिले कमल की तरह दिखाई देती है। मंदिर के चारों तरफ बने नीले पानी के तालाब इसकी सुंदरता को और बढ़ा देते हैं। यही वजह है कि यह दिल्ली की सबसे ज्यादा फोटो खींची जाने वाली जगहों में शामिल है।
लोटस टेंपल की सबसे बड़ी खासियत इसका शांत वातावरण है। यहां अंदर जाकर लोग कुछ समय के लिए बाहरी दुनिया की भागदौड़ भूल जाते हैं। मंदिर के अंदर किसी तरह का शोर, भाषण या धार्मिक कार्यक्रम नहीं होता। यहां सिर्फ प्रार्थना और ध्यान की अनुमति होती है। कोई भी व्यक्ति अपनी भाषा और अपने तरीके से यहां प्रार्थना कर सकता है। यह जगह उन लोगों के लिए भी खास है जो मानसिक शांति और सुकून की तलाश में रहते हैं।
लोटस टेंपल सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। इसे कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुके हैं। यह दुनिया के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले धार्मिक स्थलों में शामिल है। कई विदेशी पर्यटक दिल्ली घूमने के दौरान खास तौर पर लोटस टेंपल देखने आते हैं। इसकी खूबसूरती और अनोखी डिजाइन ने इसे दिल्ली की पहचान बना दिया है।
लोटस टेंपल दिल्ली के नेहरू प्लेस और कालकाजी मंदिर मेट्रो स्टेशन के पास स्थित है इसलिए यहां पहुंचना काफी आसान है। यहां प्रवेश पूरी तरह मुफ्त है। मंदिर सोमवार को बंद रहता है जबकि बाकी दिनों में सुबह से शाम तक लोग यहां घूम सकते हैं। अगर आप यहां जाएं तो शांति बनाए रखें क्योंकि यह जगह ध्यान और प्रार्थना के लिए जानी जाती है।
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