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Malviya Nagar: दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौज रानी इलाके में एक होटल में लगी भीषण आग ने कई परिवारों को गहरा दुख दिया है। बताया जा रहा है कि जिस क्षेत्र में यह होटल स्थित था वह लाल डोरा इलाके के अंतर्गत आता है।

Lal Dora Area: दिल्ली के मालवीय नगर में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में कई लोगों की जान चली गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद एक शब्द सबसे ज्यादा चर्चा में आ गया है ‘लाल डोरा’। बहुत से लोग पहली बार इस शब्द को सुन रहे हैं और जानना चाहते हैं कि आखिर लाल डोरा इलाका क्या होता है और इसका दिल्ली के पुराने गांवों से क्या संबंध है। दरअसल, लाल डोरा सिर्फ एक भू-भाग नहीं बल्कि दिल्ली और देश के कई शहरों के इतिहास से जुड़ा एक विशेष क्षेत्र है जिसकी शुरुआत अंग्रेजों के शासनकाल में हुई थी।
दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौज रानी इलाके में एक होटल में लगी भीषण आग ने कई परिवारों को गहरा दुख दिया है। बताया जा रहा है कि जिस क्षेत्र में यह होटल स्थित था वह लाल डोरा इलाके के अंतर्गत आता है। आग लगने के बाद जब जांच शुरू हुई तो लोगों का ध्यान इस बात पर गया कि आखिर लाल डोरा क्षेत्र होता क्या है और यहां निर्माण नियम बाकी इलाकों से अलग क्यों माने जाते हैं।
लाल डोरा का इतिहास ब्रिटिश शासन से जुड़ा हुआ है। साल 1908 में अंग्रेजों ने गांवों की आबादी और खेती योग्य जमीन को अलग-अलग पहचान देने के लिए राजस्व नक्शों पर लाल रंग की रेखा खींची थी। इसी लाल रेखा के भीतर आने वाले क्षेत्र को बाद में ‘लाल डोरा’ कहा जाने लगा। इसका उद्देश्य गांवों के रहने वाले हिस्से और कृषि भूमि को अलग-अलग दर्ज करना था ताकि प्रशासनिक कामकाज आसान हो सके।
लाल डोरा क्षेत्र मूल रूप से गांवों के रिहायशी हिस्से होते थे जहां लोग रहते थे लेकिन खेती नहीं की जाती थी। लंबे समय तक इन इलाकों को भवन निर्माण से जुड़े कई नियमों और नक्शा पास कराने जैसी प्रक्रियाओं से छूट मिली रही। समय के साथ दिल्ली का विस्तार हुआ और कई पुराने गांव शहर का हिस्सा बन गए। आज इन्हीं क्षेत्रों को अर्बन विलेज या शहरी गांव के रूप में भी जाना जाता है।
दिल्ली के कई लाल डोरा क्षेत्रों में आज भी संकरी गलियां, घनी आबादी और अनियमित निर्माण देखने को मिलते हैं। कई जगहों पर इमारतें एक-दूसरे से बेहद करीब बनी होती हैं जिससे किसी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि मालवीय नगर हादसे के बाद लाल डोरा क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था और भवन नियमों को लेकर फिर से बहस शुरू हो गई है।
लाल डोरा क्षेत्रों में कई बार संपत्तियां दूसरे इलाकों के मुकाबले कम कीमत पर मिल जाती हैं। हालांकि यहां जमीन या मकान खरीदने से पहले उसके स्वामित्व, रजिस्ट्री, निर्माण की वैधता और कानूनी दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच करना जरूरी होता है। थोड़ी सी लापरवाही भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।
दिल्ली के कई प्रसिद्ध इलाके लाल डोरा या अर्बन विलेज की श्रेणी में आते हैं। महरौली, छतरपुर, लाडो सराय, नजफगढ़, कंझावला और बवाना जैसे क्षेत्रों का नाम इस सूची में शामिल है। इन इलाकों ने समय के साथ गांव से शहर तक का सफर तय किया है लेकिन आज भी इनके भीतर पुराने गांवों की झलक देखने को मिलती है।
अक्सर लोग लाल डोरा और अवैध कॉलोनी को एक ही समझ लेते हैं जबकि दोनों में बड़ा अंतर होता है। लाल डोरा क्षेत्र पुराने गांवों की मूल आबादी का हिस्सा होते हैं जिन्हें ऐतिहासिक और प्रशासनिक मान्यता प्राप्त होती है। वहीं अवैध कॉलोनियां वे बस्तियां होती हैं जो बिना मंजूरी के कृषि भूमि पर विकसित कर दी जाती हैं। इसलिए दोनों की कानूनी स्थिति और पहचान पूरी तरह अलग होती है।
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