इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ माता गौरी और भगवान शिव की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है। सावन के हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है और सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत करती हैं।

सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत आज रखा जा रहा है। यह व्रत माता पार्वती के गौरी स्वरूप को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ माता गौरी और भगवान शिव की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है। सावन के हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है और सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत करती हैं।
मंगला गौरी व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:32 बजे से 5:20 बजे तक अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:56 बजे तक और अमृत काल रात 9:18 बजे से 11:01 बजे तक रहेगा। इन्हीं शुभ समय में श्रद्धा के साथ माता गौरी की पूजा की जा सकती है।
पौराणिक कथा के अनुसार, धर्मपाल नाम के एक धनी व्यापारी के पुत्र को कम आयु का श्राप मिला था। उसका विवाह ऐसी कन्या से हुआ जिसकी माता नियमित रूप से मंगला गौरी का व्रत करती थी। मान्यता है कि इस व्रत के पुण्य और प्रभाव से धर्मपाल के पुत्र को लंबी आयु का वरदान मिला। इसी मान्यता के कारण वैवाहिक सुख और संकटों से मुक्ति की कामना के लिए मंगला गौरी व्रत रखा जाने लगा।
पूजा के लिए सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता मंगला गौरी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। पूजा में 16 चूड़ियां, 16 श्रृंगार की वस्तुएं, 16 लौंग, 16 सुपारी, 16 इलायची और 16 फल व मालाएं अर्पित की जाती हैं। इसके बाद आटे से बने 16 बत्तियों वाले दीपक में घी डालकर दीपदान करें। माता को सुहाग सामग्री और चुनरी अर्पित करने के बाद खीर का भोग लगाएं।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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