Mangla Gauri Vrat 2026: सावन के पहले मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जा रहा है। जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, भद्रा-पंचक का समय और इस व्रत का धार्मिक महत्व।

सावन महीने की शुरुआत के साथ ही भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का विशेष समय शुरू हो गया है। आज सावन का पहला मंगलवार है और इसी के साथ पहला मंगला गौरी व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगला गौरी व्रत करने से मां पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। सावन के महीने में पड़ने वाले हर मंगलवार को यह व्रत रखने की परंपरा है।
आज मंगला गौरी व्रत के दिन पूजा के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं। पंचांग के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:20 बजे से 5:02 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक रहेगा। इसके अलावा सामान्य पूजा के लिए सुबह 9:06 बजे से दोपहर 2:08 बजे तक का समय शुभ माना जा रहा है। श्रद्धालु इस दौरान मां गौरी की पूजा-अर्चना कर सकते हैं और व्रत का संकल्प ले सकते हैं।
इस बार मंगला गौरी व्रत के दिन भद्रा और पंचक का भी संयोग बन रहा है। ज्योतिष गणना के अनुसार, भद्रा रात 10:03 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 5:45 बजे तक रहेगी। वहीं चोर पंचक सुबह 5:44 बजे से रात 9:54 बजे तक रहेगा। धार्मिक कार्यों को करने से पहले पंचांग और शुभ समय का ध्यान रखना शुभ माना जाता है।
मंगला गौरी व्रत के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और साफ कपड़े पहनकर पूजा की तैयारी करती हैं। इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई कर मां गौरी की स्थापना की जाती है। पूजा के लिए एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाया जाता है और उस पर कलश स्थापित किया जाता है। कलश में जल भरकर आम के पत्ते और नारियल रखा जाता है। इसके बाद मां गौरी को हल्दी, कुमकुम, चूड़ी, बिंदी, वस्त्र और सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है। पूजा के दौरान व्रत का संकल्प लिया जाता है और घी का दीपक जलाकर मां पार्वती की आराधना की जाती है। इसके बाद मंगला गौरी व्रत कथा सुनी जाती है और माता की आरती की जाती है। पूजा के अंत में माता को 16 प्रकार की सुहाग सामग्री अर्पित करने की परंपरा है।
मंगला गौरी व्रत को सौभाग्य और वैवाहिक सुख से जुड़ा हुआ माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से मां पार्वती प्रसन्न होती हैं और महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं कई लोग इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर जीवन में सुख और शांति की कामना करते हैं।
सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। इसी महीने में मंगलवार के दिन मां पार्वती की पूजा करने से विशेष फल मिलने की धार्मिक मान्यता है। यही वजह है कि सावन के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस दिन महिलाएं पूरे श्रद्धा भाव से पूजा करती हैं और अपने परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं। सावन के महीने में शिव-पार्वती की आराधना को वैवाहिक जीवन के लिए शुभ माना जाता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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