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मई महीने की शुरुआत ही शुभ अवसरों से होती है। 1 मई को बुद्ध पूर्णिमा और वैशाख पूर्णिमा मनाई जाएगी जो भगवान बुद्ध के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी है। यह दिन शांति, करुणा और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से मई का महीना बेहद खास रहने वाला है। इस दौरान कई बड़े व्रत, पर्व और त्योहार एक के बाद एक पड़ रहे हैं जो न सिर्फ आस्था से जुड़े हैं बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति लाने वाले भी माने जाते हैं। बुद्ध पूर्णिमा से लेकर गंगा दशहरा और शनि जयंती तक यह पूरा महीना पूजा-पाठ, दान और साधना के लिए बहुत शुभ माना गया है। खास बात यह है कि इस बार अधिक मास का प्रभाव भी देखने को मिलेगा जिससे इन व्रतों और त्योहारों का महत्व और बढ़ जाता है।
धार्मिक माहौल से शुरू होगा मई का महीना
मई महीने की शुरुआत ही शुभ अवसरों से होती है। 1 मई को बुद्ध पूर्णिमा और वैशाख पूर्णिमा मनाई जाएगी जो भगवान बुद्ध के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी है। यह दिन शांति, करुणा और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। इसके अगले ही दिन 2 मई को नारद जयंती पड़ती है और इसी दिन से ज्येष्ठ माह की शुरुआत भी हो जाती है जिसे धार्मिक दृष्टि से तप और साधना का महीना कहा जाता है।
मई का शुरुआती हफ्ता कई व्रतों से भरा हुआ है। 5 मई को बड़ा मंगल और एकदंत संकष्टी चतुर्थी का संयोग बन रहा है। यह दिन विशेष रूप से संकटों को दूर करने और भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके बाद 9 मई को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी और कालाष्टमी का पर्व मनाया जाएगा जो भगवान कृष्ण और काल भैरव की आराधना के लिए शुभ होता है।
महीने के मध्य में 13 मई को अपरा एकादशी और परशुराम द्वादशी का व्रत रखा जाएगा। एकादशी को मोक्ष देने वाला दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन का विशेष महत्व होता है। इसके बाद 14 मई को गुरु प्रदोष व्रत और 15 मई को वृषभ संक्रांति के साथ मासिक शिवरात्रि का संयोग बन रहा है। इस समय भगवान शिव की पूजा से विशेष फल मिलने की मान्यता है।
16 मई 2026 का दिन इस पूरे महीने का सबसे खास दिन माना जा रहा है। इस दिन शनि जयंती, वट सावित्री व्रत, ज्येष्ठ अमावस्या और दर्श अमावस्या जैसे कई बड़े पर्व एक साथ पड़ रहे हैं। इस दिन शनिदेव की पूजा, व्रत और पीपल व वट वृक्ष की परिक्रमा करने का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन किए गए उपाय जीवन में आने वाली बाधाओं को कम करते हैं।
मई महीने के अंतिम हिस्से में 25 मई को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व होता है और इसे पापों से मुक्ति दिलाने वाला दिन माना जाता है। इसके बाद 27 मई को पद्मिनी एकादशी और 28 मई को गुरु प्रदोष व्रत का संयोग बनता है जो भक्ति और साधना के लिए बेहद शुभ समय होता है।
महीने के अंत में 30 मई को पूर्णिमा व्रत और 31 मई को ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा मनाई जाएगी। यह समय दान, स्नान और पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। पूरे महीने को देखें तो मई 2026 धार्मिक दृष्टि से एक बेहद पवित्र और फलदायी समय साबित होता है, जिसमें हर दिन किसी न किसी पर्व या व्रत से जुड़ा हुआ है। मई का यह पूरा महीना लोगों को आस्था, संयम और सकारात्मकता की ओर प्रेरित करता है। इस दौरान किए गए अच्छे कर्म और पूजा-पाठ जीवन में सुख-समृद्धि और शांति लाने वाले माने जाते हैं।
इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। चेतना मंच पाठकों से अनुरोध करता है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
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