नोएडा केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के संघर्ष ने आखिरकार रंग दिखा ही दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरू गर्व के दिन तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया। अब आंदोलनरत किसान एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। किसान जिस एमएसपी पर कानून बनाने की बात कर रहे हैं आखिर वह एमएसपी है। क्या और इसे कैसे लागू किया जाता है और सरकार कैसे किसी फसल पर एमएसपी तय करती है।
जैसा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य के शाब्दिक अर्थ से पता चलता है- ये एक ऐसा न्यूनतम मूल्य है जिस पर किसानों से उनकी फसलें खरीदी जाती हैं। लेकिन एमएसपी तय करना इतना आसान नहीं है, क्योंकि इसमें कई तकनीकी पेंच फंसे हैं। किसी भी फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण करने के लिए कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) तीन फॉर्मुलों का इस्तेमाल करता है। इन्हें A2,A2+FL और C2 कहते हैं।
A2 के तहत फसल उगाने के दौरान किसानों द्वारा किए गए सभी तरह के नकद खर्चों, जैसे बीज, खाद, रसायन, ईंधन और सिंचाई आदि की लागत को जोड़ते हैं। वहीं, A2+FL में नकद खर्च के साथ किसान परिवार का अनुमानित मेहनताना भी जोड़ा जाता है।
जबकि C2 में बिजनेस मॉडल पर फसल की कीमत तय की जाती है, जिसमें कुल नकद खर्च और किसान के पारिवारिक पारिश्रमिक के अलावा खेत की जमीन का किराया और किसानी के काम में आने वाली पूरी पूंजी पर मिलने वाले ब्याज को भी लागत में शामिल किया जाता है।
A2+FL और C 2 की लागतों में बड़ा अंतर होता है-
A2 +FL और C2 लागत मूल्यों के बीच के अंतर को गेहूं के उदहारण से समझा जा सकता है। 2017-18 में गेंहू के लिए A2 + FL पर आधारित (अनुमानित) लागत 817 रुपए/क्विंटल थी वहीं इसका C2 आधारित लागत मूल्य 1,256 रुपए/क्विंटल था। यानी A2 + FL से करीब 53 प्रतिशत ज्यादा था।
किसानों को उनका हक़ दिलाने के लिए हुआ था स्वामीनाथन आयोग का गठन
स्वामीनाथन आयोग का गठन साल 2004 में यूपीए सरकार के समय हुआ था। इसके दो प्रमुख उद्देश्य थे खाद्य आपूर्ति को भरोसेमंद बनाना और किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर करना। इस आयोग ने 2006 में की रिपोर्ट में किसानों को उनकी लागत मूल्य का 50 प्रतिशत मुनाफा देने की पुरजोर सिफारिश की थी।
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि किसानों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए स्वामीनाथन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में C2 को लागत मूल्य के तौर पर स्वीकार करने की बात कही थी। जबकि यूपीए की ही तरह एनडीए सरकार भी C2+FL को फसलों का लागत मूल्य मानती है।
गौरतलब है कि 2014 के चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय किसान आयोग या स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की घोषणा की थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।