Big Breaking: जिस सरकारी कंपनी के खाद कारखाने का PM मोदी ने किया उद्घाटन, अब वो जा रही बिकने
मोदी पर पीएचडी
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:26 AM
नई दिल्ली। 7 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने गोरखपुर में खाद कारखाने के लोकार्पण समारोह में भाग लिया था। फिर 14 दिसंबर को खबर आ गई कि मोदी सरकार ने PDIL कंपनी (PDIL Company) को बेचने का फरमान जारी कर दिया है. दरअसल पीडीआईएल (PDIL) भारत सरकार के स्वामित्व वाले उर्वरक विभाग के तहत एक कंपनी है। यह एक मिनी रत्न, श्रेणी-1 और आईएसओ 9001:2008 प्रमाणित प्रीमियर कंसल्टेंसी एंड इंजीनियरिंग सीपीएसई है।
खासतौर पर यूरिया खाद आदि के कारखानों के निर्माण में इस संस्था की भूमिका सबसे बड़ी मानी जाती है। PDIL भारतीय उर्वरक उद्योग के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और इसके पास अवधारणा से लेकर विभिन्न परियोजनाओं को शुरू करने तक डिजाइन, इंजीनियरिंग और संबंधित परियोजना निष्पादन सेवाएं प्रदान करने में छह दशकों से अधिक का अनुभव और विशेषज्ञता है।
ऐसा भी नहीं है कि यह संस्था घाटे में चल रही है बल्कि पिछले कुछ सालों से तो इसने बेहतरीन रिजल्ट दिए हैं। पीडीआईएल (PDIL) ने 2019-20 में अब तक का सबसे उच्चतम वित्तीय प्रदर्शन किया है। इसके तहत उसने 133.01 करोड़ रुपये की लागत के काम-काज से राजस्व, 142.16 करोड़ रुपये की कुल आमदनी, टैक्स पूर्व 45.86 करोड़ का लाभ और टैक्स के बाद 31.83 करोड़ का लाभ हासिल किया है।
GST: समाजवादी इत्र की असली सुगंध की खोज में जीएसटी-छापेमारी का बढ़ा विस्तारअब ऐसे संस्थान को भी क्यो बेचा जा रहा है यह समझ लीजिए
सच तो यह है कि मोदी सरकार पूरी तरह से भारत को एक बार फिर से विदेशी ताकतों की गुलाम बनाना चाहती है। एक बात तो सभी मानेंगे कि किसान अपनी आमदनी तभी बढ़ा सकेंगे जब उन्हें यूरिया खाद आदि कम दामों में मिले और यह वस्तुए कम दाम पर तब मिलेगी जब इनका उत्पादन सरकारी कारखानों मे होगा, लेकिन भारत की बढ़ती हुई जरूरत को पूरा करने के लिए यूरिया के नए कारखाने खुलेंगे कैसे? जब PDIL जैसे PSU को ही बेच दिया जाएगा आपको जानकर हैरानी होगी कि पीडीआईएल ने भारत में लगने वाली लगभग 95% उर्वरक/अमोनिया यूरिया इकाइयों के निर्माण में अपना स योगदान दिया है।