
बता दें कि अधिकतर किराने व पान की दुकानों पर मिलने वाली महादेव का गोला व भोला मुनक्का गोली की मांग दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। दुकानों पर महज 2 रुपए में मिलने वाली यह गोली बड़ों के साथ-साथ छोटे-छोटे नौनिहालों को भी आसानी से मिल रही है। इन टॉफीनुमा गोलियों के रैपर पर स्पष्ट लिखा हुआ है कि इनमें भांग व गांजे की कुछ मात्रा मिली हुई है। इसके बावजूद भी यह गोलियां खुलेआम बच्चों को बेची जा रही हैं। इन गोलियों का सेवन अधिकतर युवा, स्कूली छात्र, मजदूर व सड़क पर घूमने वाले बच्चे करते हैं।
जानकारों का कहना है कि आसानी से पान परचून की दुकानों पर 2 रुपए में मिलने वाली इन गोलियों का सेवन करने वाला दिन भर नशे में मस्त रहता हैं। किसी प्रकार की कोई गंध ना आने के कारण परिजनों को भी आभास नहीं हो पाता कि उनके बच्चों ने क्या सेवन किया हुआ है। आयुर्वेद के जानकारों का कहना है कि अगर किसी को भी भांग या गांजा थोड़ी-थोड़ी मात्रा में रोजाना दिया जाए तो इसकी लत लग जाती है और इसका स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
चेतना मंच के इस समाचार को प्रदेश के आयुर्वेद निदेशालय ने गंभीरता से लिया है। उत्तर प्रदेश शासन में आयुर्वेद विभाग के निदेशक व लाइसेंस प्राधिकारी प्रो.एस.एन.सिंह ने इस संबंध में भारत सरकार को एक विस्तृत पत्र लिखा है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय में तैनात सहायक औषधि नियंत्रक को लिखे पत्र में उन्होंने लिखा है कि आयुर्वेदिक औषधि निर्माता फर्मों द्वारा कतिपय ऐसे स्वानुभूत योगों की निर्माण अनुज्ञा प्राप्त करने हेतु आवेदन किया जाता है जिसमें घटक द्रव्य के रूप में विजया यानि भाँग (॥द्गद्वश्च) अथवा अन्य मादक द्रव्यों का मिश्रण होता है, जिसके लिये ड्रग एण्ड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 एवं तत्सम्बनधी नियम, 1945 में कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिया गया हैं कि स्वानुभूत योग में भाँग की अधिकतम कितनी मात्रा अनुमन्य है।
कतिपय आयुर्वेदिक औषधि निर्माताओं द्वारा भाँगयुक्त अनुभूत आयुर्वेदिक औषधियों / योगों की निर्माण अनुज्ञा प्राप्त कर लेने के उपरान्त इन औषधियों की परचून / पान की दुकानों पर खुलेआम गोलियों/मुनक्का के रूप में बिक्री की जा रही है। युवाओं के साथ-साथ छोटे-छोटे बच्चे व स्कूली छात्र भी इन गोलियों का सेवन कर नशे के आदी हो रहे हैं तथा इसमें किसी प्रकार की कोई गंध न आने के कारण परिजनों को भी नहीं आभास हो पाता है कि उनके बच्चों ने क्या सेवन किया हुआ है तथा धीरे-धीरे इसकी लत लग जाती है और इसका स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
पत्र में आगे लिखा गया है कि स्वानुभूत योगों की निर्माण अनुज्ञा प्राप्त करने हेतु आवेदित भाँगयुक्त औषधि योग, जिसमें घटक द्रव्य के रूप में विजया यानि भाँग (॥द्गद्वश्च) का मिश्रण होता है, ऐसी भॉंगयुक्त औषधियों में भाँग की अधिकतम मात्रा का निर्धारण करने के साथ-साथ भाँगयुक्त योगों की निर्माण अनुज्ञा देने हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश देने का कष्ट करें। इस पत्र के द्वारा इस तरह के मामलों में भारत सरकार से स्पष्टï दिशा-निर्देश मांगे गए हैं।
आयुर्वेद निदेशालय ने यह भी स्वीकार किया है कि इस प्रकार की टॉफियां पूरे प्रदेश में बेची जा रही है। इनकी परचून की दुकान पर होने वाली खुलेआम बिक्री को रोकने तथा प्रभावी नियंत्रण लगाने के लिए प्रदेश के समस्त क्षेत्रीय एवं यूनानी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। इन निर्देशों में कहा गया है कि आपको निर्देश दिया जाता है कि अपने-अपने जनपद में भॉगयुक्त औषधियों का निर्माण करने वाली फर्मों का नाम/पता एवं अनुमोदित योगों का विवरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ आप अपने क्षेत्रान्तर्गत भाँगयुक्त औषधियों की पान/परचून की दुकानों पर खुलेआम बिक्री पर रोक लगाते हुये ऐसी भांगयुक्त औषधियों के सैम्पल लेकर विश्लेषण हेतु राजकीय विश्लेषणशाला, लखनऊ को भेजना सुनिश्चित करे।
पुलिस अभी भी नींद में
इस मामले में पुलिस विभाग हमेशा की तरह अभी भी कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। ऐसा लगता है कि पुलिस के अधिकारी व कर्मचारी उस दिन की प्रतीक्षा में हैं जिस दिन इस अवैध नशे का इस्तेमाल करने से कोई बड़ा हादसा हो जाएगा या इस सूखे नशे को खाकर उनका अपना कोई मर जाएगा।
चेतना मंच उत्तर प्रदेश के आयुर्वेद निदेशालय के इस प्रयास की सराहना करता है तथा उम्मीद करता है कि नशे का यह गंदा धंधा बंद हो सकेगा।
- संपादक