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Nirjala Ekadashi Vrat Date: इस बार एकादशी तिथि दो दिनों तक रहने की वजह से लोगों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि निर्जला एकादशी का व्रत 24 जून को रखा जाए या 25 जून को। आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी।

Nirjala Ekadashi Kab Hai: निर्जला एकादशी हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक मानी जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सालभर की सभी एकादशी का पुण्य प्राप्त होता है। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस व्रत को रखते हैं। इस बार एकादशी तिथि दो दिनों तक रहने की वजह से लोगों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि निर्जला एकादशी का व्रत 24 जून को रखा जाए या 25 जून को। आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी।
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जून को दोपहर 2 बजकर 42 मिनट पर शुरू होगी और 25 जून को शाम 4 बजकर 39 मिनट तक रहेगी। हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों के लिए उदया तिथि यानी सूर्योदय के समय पड़ने वाली तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी कारण निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को रखा जाएगा।
इस साल निर्जला एकादशी के दिन कई शुभ संयोग भी बन रहे हैं। पंचांग के अनुसार, इस दिन रवि योग, शिव योग और सिद्ध योग का निर्माण हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इन शुभ योगों में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। कई श्रद्धालु इस दिन जप, तप और दान-पुण्य भी करते हैं।
निर्जला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि विष्णुसहस्रनाम का पाठ और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः" मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। कई लोग इस दिन एकादशी व्रत कथा का श्रवण भी करते हैं।
निर्जला एकादशी के दिन दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। खासतौर पर जल दान को सबसे पुण्यदायी माना जाता है। परंपरा के अनुसार इस दिन घड़े में जल भरकर और उसमें तुलसी दल डालकर दान किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून को किया जाएगा। व्रत खोलने का शुभ समय सुबह 5 बजकर 49 मिनट से सुबह 9 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। वहीं द्वादशी तिथि का समापन शाम 6 बजकर 52 मिनट पर होगा।
निर्जला एकादशी को सभी एकादशी व्रतों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस व्रत में अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग किया जाता है। यही कारण है कि इसे कठिन व्रतों में गिना जाता है। श्रद्धालु पूरे दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं और अगले दिन शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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