Nithari Kand : 13 बार फांसी पर चढ़ेगा मासूम बच्चों का हत्यारा
भारत
चेतना मंच
19 May 2022 11:07 PM
Noida : नोएडा। देश-दुनिया को दहलाकर रखने वाले निठारी कांड मामले में मासूम बच्चों की निमर्मता से हत्या करने वाला 13 बार फांसी पर चढ़ेगा। निठारी कांड में के मुख्य आरोपी नर-पिशाच सुरेन्द्र कोली को एक और मामले में शव को छिपाने और हत्या का आरोपी मानते हुए सजा सुनाई गई है। यह उसकी 13वीं फांसी की सजा है। 12 मामलों में उसे पहले ही फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। जबकि मोहिन्दर सिंह पंधेर को अनैतिक देह व्यापार के मामले में 5 वर्ष की कैद की सजा सुनाई है।
ज्ञात रहे कि देश को दहला देने वाला सबसे सनसनीखेज निठारी हत्याकांड अब भी आपके दिलो दिमाग में याद होगा। दिसंबर 2006 में हुए इस कांड के खुलासे ने लोगों को हिला कर रख दिया था।
यह एक ऐसा कांड था, जिसके खुलते ही देश भर में हलचल मच गई थी। आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा की मांग देश के कोने-कोने से उठी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई ने शुरू की थी।
निठारी कांड के 11 जनवरी 2007 को सीबीआई ने पूरा केस अपने हाथ में ले लिया। 28 फरवरी और 01 मार्च 2007 को निठारी के नरपिशाच सुरेंद्र कोली ने दिल्ली में एसीएमएम के यहां अपने इकबालिया बयान दर्ज कराए थे।
17 बच्चों को बनाया था अपना शिकार
गाजियाबाद की सीबीआई विशेष कोर्ट द्वारा आरोपी सुरेंद्र कोली का डेथ वारंट जारी किए जाने के साथ ही उसकी फांसी के लिए जेल और जल्लाद की तलाश शुरू कर दी गई है। इस कांड के आरोपी मोनिंदर सिंह पंधेर और सुरेंद्र कोली फिलहाल गाजियाबाद की डासना जेल में बंद हैं।
आइए, एक बार फिर हम चलते है राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा के सेक्टर-31 के पास स्थित उस छोटे से गांव निठारी में, जहां मासूम बच्चों की चीख-पुकार और आंखों में एक खौफनाक दृश्य अभी भी उभरता हुआ दिख रहा है।
करोड़पति मोनिंदर सिंह पंधेर के उस खूनी कोठी नंबर डी-5 को भला कौन भूल सकता है। कौन भूल सकता है कि इसी कोठी में इंसान के रूप में मौजूद भेडिय़ों ने एक दो नहीं बल्कि 17 बच्चों को अपना शिकार बनाकर इसी कोठी में उन्हें दफन कर दिया था।
इस कोठी में रहने वाले नरपिशाचों ने बड़ें ही शातिर ढग़ से गांव के भोले-भाले मासूम बच्चों को किसी न किसी बहाने अपने पास बुलाते थे। इसके बाद उनके साथ हैवानियत की हदें पार कर उनकी हत्या करने के बाद लाश के टुकड़े-टुकड़े कर नाले में बहा देते हैं।
शव के टुकड़े कर पकाया, खाया
क्या-क्या नहीं किया इस कोठी को मालिक और उसके नौकर सुरेंद्र कोली ने। मासूम बच्चों को अपनी कोठी में ले जाकर उसके साथ कुकर्म उसके बाद उनका गला घोंटकर हत्या। इतने से भी मन नहीं भरा तो उसके शव के छोटे-छोटे टुकड़े कर कुछ पकाकर खाए तो कुछ हिस्से को कोठी के पीछे नाले में बहा दिया।
यह खौफनाक सिलसिला करीब डेढ़ साल से ज्यादा समय तक चला। लेकिन किसी की नजर इस कोठी पर नहीं पड़ी। हां, इतना जरूर हुआ कि कोठी के पास स्थित पानी की एक टंकी के आसपास से बच्चों को गायब होने का शक जरूर हुआ।
हालांकि गांव वालों ने तो यहां तक मान लिया कि जरूर पानी टंकी के पास कोई भूत रहता है जो बच्चों को निगल जाता है। लेकिन दिसंबर 2006 में एक लापता लड़की के बारे में जांच के दौरान जब यह पता चला कि उसकी हत्या कोली ने की है तो पुलिस ने मामले को गहराई से जांचना शुरू किया।
फिर क्या था...एक के बाद मामले खुलते गए और जांच दल को बड़े पैमाने पर बच्चों की नृशंस हत्याओं के बारे में पता चला। कोली जिस मकान में घरेलू नौकर की तरह काम करता था, उसके समीप के एक नाले से बच्चों के कंकाल बरामद हुए थे।