Noida: नोएडा। चिकित्सकों को भगवान का दर्जा दिया जाता है लेकिन कुछ चिकित्सक इसके इतर हैवान बन चुके हैं। नोएडा के सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों की हैवानियत की बानगी एक बार फिर सामने आई है। इलाज की आस में पहुंचा एक व्यक्ति दर्द से तड़पता रहा और चिकित्सक उसे इधर से उधर दौड़ाते रहे। हद तो तब हो गई जब चिकित्सक ने इलाज की गुहार लगा रहे मरीज व उसके परिजनों को धक्के देकर कमरे से बाहर निकलवा दिया। इलाज की आस में मरीज ने अस्पताल में ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
चिकित्सकों की हैवानियत की यह घटना प्रदेश के किसी सुदूर जिले की नहीं बल्कि देश की राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा के जिला अस्पताल की है। बता दें कि मूल रूप से उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के रहने वाले प्रकाश (35 वर्ष) दिल्ली के बदरपुर स्थित अली गांव में रहते थे। पेशाब में रुकावट होने के कारण वह बेहतर इलाज की आस में गुरुवार की सुबह करीब 5 बजे नोएडा के सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल के आपातकालीन विभाग में आए थे। प्रकाश के चचेरे भाई सुरेश ने बताया कि आपातकालीन विभाग के चिकित्सकों ने उन्हें ओपीडी में फिजिशियन को दिखाने की सलाह दी और बिना कोई उपचार किए टरका दिया। प्रकाश एवं उनके परिजन चिकित्सकों से गुहार लगाते रहे लेकिन उनका मन नहीं पसीजा। 3 घंटे बीतने के बाद करीब 8 बजे परिजन ओपीडी का पर्चा बनवा कर फिजिशियन के कक्ष में पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि कक्ष में मौजूद महिला चिकित्सक ने उन्हें सही तरीके से नहीं देखा। प्रकाश ने जब अपनी परेशानी बताने का प्रयास किया तो महिला चिकित्सक भड़क उठी और प्रकाश व उनके परिजनों को धक्के देकर कमरे से बाहर निकलवा दिया। उसके बाद परिजनों ने सीएमएस से शिकायत की जिसके पश्चात उन्हें सर्जन डॉक्टर की ओपीडी में भेजा गया। यहां से उन्हें अल्ट्रासाउंड के लिए भेज दिया गया। परिजन जब अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचे तो उन्हें 19 अगस्त की डेट देकर बाद में आने को कहा गया। इस दौरान प्रकाश की हालत लगातार बिगड़ती रही ।परिजनों के काफी मिन्नत करने पर चिकित्सकों ने खानापूर्ती करते हुए पेशाब की नली लगाकर उन्हें घर जाने के लिए कह दिया। परिजनों ने इलाज न होने पर प्रकाश को हायर सेंटर रेफर करने की भी गुहार लगाई लेकिन चिकित्सकों ने उनकी एक नहीं सुनी ।प्रकाश ने थोड़ी देर बाद तड़प तड़प कर अस्पताल परिसर में ही दम तोड़ दिया।
प्रकाश की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। अस्पताल प्रशासन ने प्रकाश के परिजनों को 'मैनेजÓ करने का प्रयास किया लेकिन वह भड़क उठे और अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में देरी से मौत का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया।
पहले भी हैवानियत
बता दें कि नोएडा के जिला अस्पताल के चिकित्सकों की हैवानियत की यह कोई पहली घटना नहीं है। आए दिन इस तरह के मामले प्रकाश मैं आते रहते हैं। गत दिनों एक दरिंदे की हैवानियत का शिकार हुई 7 माह की बच्ची का भी सीएचसी और चाइल्ड पीजीआई के चिकित्सकों ने उपचार करने से साफ इनकार कर दिया था। मामला मीडिया में आने के बाद बच्ची को इलाज मिल पाया। इस मामले में प्रकाश इतना भाग्यशाली नहीं रहा। जब तक मामला मीडिया तक पहुंचा तब तक वह इलाज की आस में दम तोड़ चुका था।
'बाबा' के आदमी
शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई ना होने के कारण जिला अस्पताल के चिकित्सक पूरी तरह निरंकुश हो चुके हैं। आए दिन चिकित्सकों व स्टाफ के खिलाफ शिकायतें दर्ज होती हैं लेकिन वह रद्दी की टोकरी में डाल दी जाती हैं। यही कारण है कि चिकित्सकों में किसी भी तरह की कार्रवाई का कोई ख़ौफ़ नहीं दिखता है। सूत्र बताते हैं कि जिला अस्पताल में तैनात कई चिकित्सक इतने पावरफुल है कि वें सीएमएस(CMS) और सीएमओ (CMO) को भी अपने सामने कुछ नहीं समझते हैं। राजनीतिक व प्रशासनिक पकड़ होने के कारण यें चिकित्सक अपने पेशे के प्रति इमानदारी नहीं बरत रहे हैं। इनकी लापरवाही का खामियाजा जिला अस्पताल में बेहतर इलाज की आस में आए मरीजों को उठाना पड़ता है अगर कोई मरीज इनकी कार्यशैली के खिलाफ जरा भी आवाज उठाता है तो चिकित्सक उसे धक्के देकर अपने कमरे से बाहर निकलवा देते हैं। शिकायत होने पर चिकित्सक अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर पूरे मामले को ही दबवा देते हैं। जिला अस्पताल के इतिहास पर अगर नजर डालें तो अभी तक लापरवाही के किसी भी मामले में किसी चिकित्सक के खिलाफ कोई कड़ी कार्यवाई अमल में नहीं लाई गई है। कुछ एक मामलों में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों पर गाज गिरा कर स्वास्थ्य विभाग जरूर अपनी पीठ थपथपा लेता है। यहां कुछ ऐसे भी डाक्टर तैनात हैं जो दावा करते हैं कि मैं बाबा मुख्यमंत्री का आदमी हूं। मेरा कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता है।
लीपापोती शुरू
जिला अस्पताल में हुई प्रकाश की मौत के मामले में जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा लीपापोती शुरू हो गई है। प्रारंभिक जांच में ही सीएमएस दोषी चिकित्सक की तरफदारी करने में लगे हुए है। इस संबंध में जब चेतना मंच संवाददाता ने सीएमएस डॉ पवन कुमार से बात की तो उनका कहना था कि मरीज का अस्पताल में सही समय पर उपचार किया गया है। उन्होंने कहा कि परिजनों के आरोपों के बाद मौके पर उपस्थित स्टाफ से भी जानकारी ली जा रही है। उन्होंने कहा कि इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप गलत है इसके बावजूद भी मामले की जांच की जा रही है। अब पाठक स्वयं ही अंदाजा लगा सकते हैं कि जब अस्पताल का मुखिया पहले ही दावा कर रहा हो कि आरोप गलत है तो जांच का नतीजा क्या आएगा?