Noida: :ट्विटर स्पेस" पर उठी नोएडा शहर की समस्या ,अनेक दिग्गज रहे मौजूद
Source: TechCrunch
भारत
चेतना मंच
27 Jul 2022 05:07 PM
Noida: नोएडा । नोएडा प्राधिकरण(Noida Authority) द्वारा जारी वेंडर जोन पॉलिसी पर माफिया किस्म के लोग हावी हो गए हैं। माफिया किस्म के यह लोग प्राधिकरण के अधिकारियों से सांठगांठ कर वेडिंग जोन पर कब्जा करे बैठे हैं। वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा द्वारा 'ट्वीटर स्पेस' (Twitter Space)पर आयोजित एक चर्चा में उक्त विचार शहर के गणमान्य नागरिकों ने व्यक्ति किए।
विनोद शर्मा के ट्वीटर स्पेस में शहर के तमाम लोग जुड़े और अपने विचार रखे। विचार व्यक्त करने वालों में चेतना मंच के सम्पादक आर.पी. रघुवंशी रघुवंशी, वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र सिंह मलिक, नोएडा मीडिया क्लब के अध्यक्ष पंकज पाराशर, दिल्ली पुलिस के पूर्व उपायुक्त जीएस अवाना, सेक्टर-18 मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील कुमार जैन, एमएसएमई एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र नहाटा, समाजवादी पार्टी के नेता दीपक विग, वेंडर जोन पॉलिसी के एक्टिविस्ट श्याम गुप्ता, भाजपा के सोशल मीडिया इंचार्ज शैलेंद्र शुक्ला और नूर हसन ने विचार रखे।
चेतना मंच समाचार पत्र के सम्पादक आर.पी. रघुवंशी ने चर्चा के दौरान कहा कि नोएडा अथॉरिटी के अफसरों (Noida Authority Officials) में इच्छाशक्ति का अभाव है। वेंडर जोन पॉलिसी को गलत ढंग से लागू किया गया है। नालों के किनारों पर वेंडर जोन आवंटित किए गए हैं। वहां अगर कोई खाने पीने के लिए पहुंचता है तो बदबू की वजह से परेशान हो जाता है। नाले से निकलने वाले मक्खी और मच्छर खाने-पीने के सामान पर बैठ जाते हैं। ऐसे में भला कोई बीमार होने क्यों जाएगा? सही मायने में नोएडा के वेंडर जोन सामाजिक सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा को पलीता लगा रहे हैं। यह योजना दफ्तरों में बैठकर हवा में बनाई गई है। हकीकत से इस योजना का कोई वास्ता नहीं है।
नोएडा मीडिया क्लब के अध्यक्ष पंकज पाराशर ने कहा कि अगर आप इंदौर, उज्जैन और नासिक जैसे शहरों में वेंडर जोन देखेंगे तो फक्र महसूस करेंगे। वहां अनुशासन, साफ-सफाई और व्यवस्था देखकर लगता है कि कितनी खूबसूरती से वेंडर जोन काम कर रहे हैं। नोएडा में पूरी व्यवस्था उल्टी है। वेंडर जोन किसे आवंटित किया गया है? कोई जानकारी नहीं है। किसी वेंडर के पास कोई परिचय पत्र नहीं है।
दिल्ली पुलिस के पूर्व उपायुक्त जीएस अवाना ने कहा कि 1952 में इसी तरह की पॉलिसी चांदनी चौक में तहबाजारी के रूप में शुरू हुई। वहां दो रुपये प्रति माह लेकर यह व्यवस्था लागू हुई। वहां फुटपाथ घिर गए। राहगीर सड़क पर चलने को मजबूर हो गए। जब समस्या बहुत बढ़ गई तो इन्हें हटाने की कोशिश की तो वेंडर कोर्ट चले गए। कोर्ट ने उन्हें स्टे आर्डर दे दिया। लिहाजा, यह व्यवस्था बड़ी खराब है। आज इन्हें अस्थाई तौर पर यह आवंटन किया गया है, कल यह स्थाई बीमारी बन जाएगी। सेक्टर-22 में रहने वाले गुलशन शर्मा ने कहा कि यह सबसे बड़ा सेक्टर हैं। ए से लेकर जेड तक पॉकेट हैं। यहां बेहद अनियमित ढंग से पार्क के नजदीक वेंडर जोन बना दिया गया है। वेंडर जोन की वजह से यहां सेक्टर की महिलाएं और लड़कियां परेशान हैं। यह परिचर्चा डेढ़ घंटे से भी अधिक समय तक चली। --