Online Betting : एनसीआर में खूब फल फूल रहा है ऑनलाइन सट्टे का अवैध का धंधा
भारत
चेतना मंच
01 Aug 2022 09:19 PM
राजकुमार चौधरी
New Delhi: नई दिल्ली। पाठकों ने अनेक बार सुना होगा सट्टे और जुए की लत किसी को भी बर्बाद कर सकती है। इसी ने दुनिया का सबसे बडा युद्ध महाभारत तक करा दिया था। अब यदि आपको ये पता चले कि सट्टा खेलना बहुत आसान हो गया है तो आप अवश्य चौंक जाएंगे। चौंकना स्वाभाविक भी है। एक तरफ हम अधिक शिक्षित और सफल हो रहे हैं तो दूसरी ओर सट्टे जैसे घटिया खेल को आसान बनाकर खेल रहे हैं। जी हां, एक दो नहीं लाखों घरों को बर्बाद करने वाला सट्टे का खेल अब बहुत ही आसान हो गया है। पहले तो कुछ लोग सट्टा लुक छिपकर यह अवैध धंधा चलाते थे और भोले भाले अनपढ़ लोगों को इसके जाल में फंसाकर बर्बाद कर देते थे। अब तो अपने आपको पढ़ा लिखा बताने वाले तथाकथित लोग बाकायदा इन्टरनेट की मदद से अपने फोन पर ही सट्टे का गंदा धंघा चला रहे हैं। इंटरनेट पर एक पूरा माफिया तंत्र सट्टे का कारोबार चला रहा है।
पुष्ट जानकारी के अनुसार सट्टा मटका ऑनलाइन एप(satta matka online app), रायल सट्टा(royal betting,), कल्याण सटटा एप (kalyan satta app) एवं सट्टा किंग (satta king) नामक एक दर्जन से अधिक ऑनलाइन एप इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। इन एप के जरिए कोई कहीं से भी बैठकर सट्टा खेल सकता है। बिना मेहनत के अधिक पैसा कमाने की चाह रखने वालों को अपने चंगुल में फंसाने के लिए एक सट्टा माफिया गिरोह एनसीआर में भी सक्रिय हैं। इस गिरोह के तार गांव गली तक भी जुड़ने लगे हैं। ये गिरोह पुलिस की आंखों में धूल झोंककर अपने कारोबार को दिन दूना रात चौगुना फैला रहा है।
बता दें कि आईपीसी और सीआरपीसी के तहत 1867 में सार्वजनिक जुआ अधिनियम पेश किया था। सट्टा खेलते समय पकड़े गए लोग जेल जा सकते हैं या जुर्माना भर सकते हैं। तकनीकी तौर पर हम जितने मजबूत हो रहे हैं, उसका एक पहलू ये भी है कि अब अपराध का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। एनसीआर के कई इलाकों में इंटरनेट के जरिए सटटा खेलने के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। इन दिनों सट्टा किंग जैसे एप लोगों को सट्टा खेलने की सुविधा मुहैया करा रहे हैं। खोड़ा कालोनी, गाजियाबाद के विजयनगर, सिंहानी गेट, भौपुरा, पसौंडा, इंदिरापुरम सहित कई इलाके हैं जहां सट्टा किंग सक्रिय हैं।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा, जेवर, दनकौर, जारचा में भी कई इलाके ऐसे हैं, जहां ये गिरोह सक्रिय हैं। हालांकि इस बारे में पुलिस के एक अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि सच ये है कि सट्टे में लुटने के बाद कोई पीड़ित इसलिए भी पुलिस के पास शिकायत नहीं करता, क्योंकि उसे खुद मालूम है कि वह गुनहगार है। इसलिए इस तरह के गिरोह फल फूल रहे हैं। कैसे खेला जाता है सट्टा, सटटा किंग जैसे एप के लिंक सट्टेबाज गिरोह वा्टसएप ग्रुपों पर भेजते हैं। इस लिंक को सुबह और देर रात भेजा जा रहा है। क्योंकि यही वो समय होता है, जब आम आदमी अपने वाट्सएप को जरूर चेक करता है। जो सट्टा खेलने के इच्छुक होते हैं वो इस एप के जरिए गिरोह तक पहुंचकर पैसा लगाते हैं। और जीत व हार के इस खेल का हिस्सा बन जाते हैं। सौ रुपये से शुरू होकर जीत या हार की बाजी लाखों रुपये तक जाती है। जिन लोगों को इंटरनेट यूज करना नहीं आता है, उनके लिए माफिया के एजेंट मौजूद रहते हैं। ये एजेंट एक निर्धारित कोड वर्ड के साथ सट्टा खेलने के इच्छुक लोगों से संर्पक करते हैं। और उन्हीं के सामने एप पर पैसा लगाकर उन्हें इस खेल के धंधे में फंसा लेते हैं। ये पूरा अवैध कारोबार पुलिस की जानकारी में भी रहता है। तकनीकी तौर पर कमजोर हमारी पुलिस इस सट्टा माफिया का कुछ नहीं बिगाड़ पा रही है। हां कुछ पुलिस अधिकारी व कर्मचारी माफिया के एजेंटों को पहचानते भी हैं। उनसे सट्टे के राज उगलवाने की बजाय ये अधिकारी और कर्मचारी उनके फेंके हुए टुकडे निगलकर मजे कर रहे हैं।