
हाईकोर्ट में उपस्थित टीम गुर्जर समन्यव समिति से बाबा अनंतराम तँवर व एडवोकेट दिवाकर विधूड़ी।
फैसले को लेकर गुर्जर समाज मे जबरदस्त उत्साह है और उन्होंने कहा कि ऐतेहासिक तथ्यों के अनुसार राजपूत कोई जाति है ही नही ओर राजपूत शब्द का उल्लेख 12वी शताब्दी के बाद ही इतिहास की पुस्तकों में आता है, जबकि चंद असामाजिक तत्व बार बार "गुर्जर-प्रतिहार राजवंश" के नाम से छेड़छाड़ करके केवल अब केवल "प्रतिहार राजवंश" बताकर 300 वर्षों तक मुश्लिम आक्रांताओ से देश व धर्म की रक्षा करने वाले महानतम गुर्जर-प्रतिहार सम्राट मिहिरभोज महान ओर उनके वंशजो को भी राजपूत बताने लगे हैं.
इसी कड़ी में अब सम्राट पृथ्वीराज (Prithviraj Chauhan) को भी राजपूत घोषित कर रहें थे जबकि ऐसा नही, राजपूत समाज के इन चंद असामाजिक तत्वों की हिंदुओ को जाति के नाम पर तौड़ने की हरकतों के कारण ही उत्तरप्रदेश के दादरी में "गुर्जर सम्राट मिहिरभोज डिग्री कॉलेज" में मिहिरभोज की प्रतिमा के अनवारण के समय गुर्जर शब्द पर आपत्ति जताते हुए गुर्जर शब्द को असमाजिक तत्वों द्वारा कालिख़ पौतकर छिपा दिया गया था, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी द्वारा कालिख़ पुती प्रतिमा के अनावरण के बाद उपजे गुर्जर समाज के आक्रोश के कारण योगी सरकार ने इस त्रुटि को अपने राज्यसभा साँसद सुरेंद्र नागर को भेजकर सही कराया और गुर्जर शब्द को पुनः स्थापित कराया था जिसके बाद विवाद का पटाक्षेप हो गया था हालांकि गुर्जर समाज योगी जी व बीजेपी द्वारा इस विषय पर माफी माँगने की माँग करता रहा है।
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दिल्ली हाई कोर्ट में "गुर्जर समाज सर्व संघठन सभा एकता समन्वय समिति" की हालिया याचिका पर सुनवाई में गुर्जर समाज के द्वारा दिये गए तथ्यों को हाईकोर्ट ने सही माना फैसला गुर्जर समाज के पक्ष में गया, गुर्जर समाज ने इस जीत को ऐतेहासिक व नीतिगत जीत बताया है।