Political News : जाने क्यों दु:खी हैं भाजपा कार्यकर्ता?
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भारत
चेतना मंच
28 Mar 2022 07:59 PM
Noida : नोएडा। प्रदेश में एक बार फिर योगी आदित्यनाथ शासन के सिंघासन पर आरूढ़ हो गए हैं। पूरे प्रदेश के भाजपाई व उनके समर्थक खुश है। लगातार जश्न मनाए जा रहे हैं। इस सबके बीच गौतमबुद्धनगर जिले के भाजपा कार्यकर्ता व पार्टी के समर्थक दु:खी हैं। उनके दु:ख का कारण बेहद जायज है। जिले में पार्टी को एकतरफा ऐतिहासिक जीत दिलाने के बावजूद उनका एक भी विधायक मंत्री नहीं बन पाया।
सब जानते हैं कि एक जमाने में गौतमबुद्धनगर जिला बहुजन समाज पार्टी का गढ हुआ करता था। बसपा सुप्रीमो मायावती यहीं की मूल निवासी हैं। इस सबके विपरीत भारतीय जनता पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं की बदौलत 2017 से यह पूरा जिला भाजपा का गढ बन गया है। इस बार के चुनाव में विपक्ष की मजबूत चुनौती के बावजूद पार्टी ने तीनों सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है। नोएडा विधानसभा की सीट पर तो विधायक पंकज सिंह ने जीत के सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए ऐतिहासिक जीत हासिल की है। गुर्जर जिला होने तथा गुंर्जर समाज का पार्टी के विरूद्ध खुला बिगुल बजाने के बावजूद दादरी में तेजपाल नागर व जेवर में धीरेन्द्र सिंह की जीत को भी ऐतिहासिक ही माना जा रहा है। इतनी बम्पर जीत के बावजूद भी प्रदेश के मंत्रिमंडल में जिले से एक भी नाम न आने के कारण भाजपा के तमाम नेता, कार्यकर्ता व पार्टी समर्थक बेहद दु:खी हैं। वे अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
मंत्रिमंडल के गठन से पूर्व यह अनुमान लगाया जा रहा था कि प्रदेश में भाजपा के उपाध्यक्ष जैसे अहम पद पर आसीन तेज-तर्रार युवा नेता पंकज सिंह को उनकी ऐतिहासिक विजय के ईनाम के तौर पर पार्टी कैबिनेट मंत्री बना सकती है। उनके तमाम खास समर्थक इस बात के लिए मुतमईन थे कि उनके नेता को मंत्री अवश्य बनाया जाएगा। पिछले पूरे 5 वर्षों में उनके ऊपर कोई भी विरोधी उंगली तक नहीं उठा पाया। उन्होंने क्षेत्र के हर वर्ग के लिए अपनी उपलब्धता बनाए रखी। कोरोना की भयंकर महामारी के दौरान उनके कार्यों की खूब सराहना हुई। शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनका कार्य बेहद सराहनीय रहा। इस सबके बावजूद उन्हें मंत्रिमंडल का हिस्सा बनने से वंचित रहना पड़ा। तर्क दिया जा रहा है कि उनको मंत्री बनाने से पार्टी पर परिवारवाद का ठप्पा चस्पा हो सकता था। यह तर्क किसी के भी गले नहीं उतर रहा है। जब स्व0 कल्याण सिंह के सांसद पुत्र राजबीर सिंह के बेटे, केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के पति व दूसरे कई नेताओं के परिजनों को मंत्री बनाया जा सकता है तो फिर अपने बलबूते पर एक साफ-सुथरी राजनीति करने वाले पंकज के मामले में कुर्तक क्यों किये जा रहे हैं। उनके पिता तो उनके चुनाव में वोट तक मांगने नहीं आए थे।
इसी प्रकार दादरी के विधायक तेजपाल नागर व जेवर के विधायक धीरेन्द्र सिंह के समर्थकों को भी अपने-अपने विधायक के मंत्री बन जाने की पूरी उम्मीद थी। तेजपाल नागर के लिए तो क्षेत्रीय सांसद भी प्रयासरत बताए जा रहे थे। तमाम उम्मीदों पर पानी फिर जाने से पार्टी के कार्यकर्ताओं में घोर निराशा है। यह निराशा आगे चलकर क्या गुल खिलाएगी कहना मुश्किल है।