2022 चुनाव से पहले योगी मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ है। 7 नए मंत्री बनाए गए हैं। नए मंत्रियों के माध्यम से योगी ने ब्राह्मण, दलित, महिला और पिछड़ों को साधने का प्रयास किया है। कांग्रेस से भाजपा में गए जितिन प्रसाद को ब्राह्मण चेहरे के रूप में पेश किया जाएगा। इस विस्तार में एकमात्र जितिन प्रसाद ही हैं जिन्हें कैबिनेट मिनिस्टर बनाया गया है, बाकी सभी छह राज्य मंत्री बने हैं।
योगी मंत्रिमंडल में 7 चेहरों को शामिल किया गया है, इनमें दो पूर्वांचल से, दो पश्चिम उत्तर प्रदेश से और दो रुहेलखंड से हैं जबकि एक अवध से है। इन सभी की छवि अपने क्षेत्र के दिग्गज नेता की है और कुल मिलाकर इन सभी का 60 से 70 सीटों पर प्रभाव है।
जितिन प्रसाद कांग्रेस में रहकर भी ब्राह्मण राजनीति करते रहे हैं लेकिन देखना दिलचस्प होगा कि जितिन प्रसाद पाला बदलने के बाद भाजपा को कितने ब्राह्मण वोट ट्रांसफर करा पाते हैं। उत्तर प्रदेश में 10 से 12% ब्राह्मण हैं। उल्लेखनीय है कि 2007 में बसपा की सरकार ब्राह्मणों के बलबूते बहुमत में आई थी। 2012 में ब्राह्मणों ने ही ओबीसी के साथ मिलकर अखिलेश को मुख्यमंत्री बनवाया था। 2017 में ब्राह्मणों ने भाजपा के पक्ष में वोट डाले। उसके बाद से स्थितियों में बदलाव आया है, ब्राह्मण चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश का नया मुख्यमंत्री ब्राह्मण हो। लेकिन शायद ही कोई दल ब्राह्मणों की मांग पूरी करेगा। भाजपा से उम्मीद करना ही बेकार है क्योंकि यदि सरकार बनी तो योगी के अतिरिक्त किसी और का मुख्यमंत्री बनना असंभव ही है।
गाजीपुर सदर से विधायक संगीता बलवंत बिंद को मंत्री इसलिए बनाया गया है क्योंकि भाजपा इनकी मार्फत गैर यादव पिछड़ी जातियों को साधना चाहती है। पिछले साढे 4 साल से गाजीपुर जिले से कोई मंत्री नहीं बनाया गया था, चुनाव आए तो क्षेत्र के बिंद, केवट, निषाद कश्यप वोटों का ध्यान आया। क्या मात्र 3-4 महीने में संगीता बिंद चमत्कार दिखा पाएंगी।
हाथरस जिले से विधान परिषद सदस्य धर्मवीर प्रजापति मंत्री बनकर ओबीसी मतदाताओं को रिझाने का काम करेंगे। हाथरस, अलीगढ़, कासगंज, एटा जिले में एक समय ओबीसी वोट बैंक पर कल्याण सिंह का जबरदस्त प्रभाव था, अब भाजपा धर्मवीर प्रजापति को "नए कल्याण सिंह" के रूप में पेश कर बड़ी संख्या में ओबीसी वोट पाने की उम्मीद कर रही है।
गोंडा जिले के निवासी पलटूराम दलित हैं और बलरामपुर सदर सुरक्षित सीट से विधायक हैं। कहते हैं पलटू राम का बलरामपुर और गोंडा जिले में खासा प्रभाव है। भाजपा का इन्हें मंत्री बनाकर क्षेत्र की दलित वोटों पर कब्जा करने के प्रयास है।
मेरठ की हस्तिनापुर सीट से विधायक दिनेश खटीक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों की नाराजगी से होने वाले नुकसान की भरपाई अधिक से अधिक दलित वोट दिला कर देंगे, ऐसा भाजपा का सोच है। वैसे भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश दलित बहुल क्षेत्र को है ही।
छत्रपाल गंगवार को मंत्री बनाने के पीछे कुछ दूसरा ही गणित है। केंद्रीय मंत्रिमंडल से बरेली के केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार को हटाया गया है। छत्रपाल को संतोष गंगवार की भरपाई के रूप में देखा जा रहा है। बरेली, पीलीभीत, बदायूं, लखीमपुर खीरी, रामपुर और शाहजहांपुर में गंगवार अच्छी संख्या में हैं। भाजपा इन क्षेत्रों की वोटों को अपनी झोली से छिटकने नहीं देना चाहती है। छत्रपाल के सामने भाजपा को ये वोट दिलाने की चुनौती है।
सोनभद्र से पहली बार भाजपा ने संजीव कुमार गोंड के रूप में कोई मंत्री बनाया है। अनुसूचित जाति जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष गोंड पर आदिवासियों को साधने की जिम्मेदारी है। गोंड काफी पिछड़े हुए हैं और सोनभद्र, बलिया, चंदौली, मिर्जापुर जनपदों में इनकी आबादी 3% है। गोंड को मंत्री बनाकर भाजपा इस जाति के वोटरों को अपने पक्ष में करना चाहती है।
यह जानना भी दिलचस्प होगा कि प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने का दावा करने वाली प्रदेश की भाजपा सरकार में 45% मंत्रियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं और यह भी कि योगी मंत्रिमंडल में 80% मंत्री करोड़पति हैं।