
Presidential Election 2022: पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव को संपन्न होने के बाद अब देश में एक और अहम चुनाव होने वाला है। यह वह चुनाव है, जिस पर न केवल हर भारतीय, बल्कि विदेशों की भी नजर टिकी होती है। इस चुनाव के संपन्न होने के बाद जो व्यक्ति देश के सर्वोच्च पद पर प्रतिष्ठित होता है, वह बेहद ही अहम होता है। यह चुनाव है, राष्ट्रपति चुनाव (Presidential Election)। राष्ट्रपति के चुनाव में अब केवल तीन माह का ही समय शेष रह गया है। सत्ताधारी दल समेत अन्य दलों के प्रतिनिधि भी इस चुनाव में प्रतिभाग करते हैं।
आपको बता दें कि जुलाई 2022 में राष्ट्रपति का कार्यकाल खत्म हो रहा है। पूरे देश में राष्ट्रपति चुनाव के लिए कुल 10,98,882 वोट हैं। जबकि देश में एक सांसद के वोट की वैल्यू 708 है।राज्यसभा सीट 233 है, जबकि लोकसभा की 543 सीटे हैं। इसके अलावा देश के सभी राज्यों की विधानसभा सीटों की संख्या 4,120 है।
राष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा, राज्यसभा और राज्यों के विधानसभा के सदस्य वोट डालते हैं। 245 सदस्यों वाली राज्यसभा में अभी 230 सांसद हैं। आने वाले दो महीनों में खाली सीटों पर चुनाव होने हैं। राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत 12 राज्यसभा सांसद राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डालते हैं। वहीं, 543 सदस्यों वाली लोकसभा में अभी 540 सांसद हैं। तीन सीटें खाली हैं। देश की सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के एक विधायक के वोट की वैल्यू सबसे ज्यादा 208 होती है। वहीं, इसके बाद झारखंड और तमिलनाडु के एक विधायक के वोट की वैल्यू 176 तो महाराष्ट्र के एक विधायक के वोट की वैल्यू 175 होती है। बिहार के एक विधायक के वोट की वैल्यू 173 होती है। सबसे कम वैल्यू सिक्किम के विधायकों की होती है। यहां के एक विधायक के वोट की वैल्यू सात होती है। इसके बाद नंबर अरुणाचल और मिजोरम के विधायकों का आता है। यहां के एक विधायक के वोट की वैल्यू आठ होती है।
उत्तर प्रदेश की भूमिका यूपी में सांसद का कुल वोट 42,480 हैं। वहीं यूपी देश में सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला राज्य है। राज्य के एक विधायक की वोट का वैल्यू 208 है। जबकि राज्य में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश विधानसभा के कुल वोट का वेटेज 83,824 होता है। जो कि किसी भी अन्य राज्य की तुलना में काफी ज्यादा है।
अब बात राज्य में हर पार्टी के सांसदों के वोटों के वैल्यू की कर लें। उत्तर प्रदेश में कुल 80 सांसद हैं। यहां सबसे ज्यादा बीजेपी के 62 सांसद हैं। जबकि राज्य में एक सांसद के वोट का वेटेज 708 है। ऐसे में भाजपा सांसदों के वोट का कुल वेटेज 43,896 है, जबकि भाजपा गठबंधन की एक अन्य पार्टी अपना दल के दो सांसद हैं। अपना दल के इन दो सांसदों के वोट का वेटेज 1416 हो जाता है। भाजपा के बाद सबसे ज्यादा सांसद बसपा के हैं। राज्य में बसपा के दस सांसद हैं, जिनके वोट का वेटेज 7,080 है। इसके अलावा सपा के पांच सांसदों के वोट का वेटेज 3,540 है। वहीं कांग्रेस के एक मात्र सांसद होने के कारण उसके पास 708 वोट का वेटेज है।
यूपी में एक विधायक के वोट का वेटेज 208 होता है। राज्य में कुल 403 विधानसभा सीट है। इसमें से सबसे ज्यादा 255 विधायक भाजपा के पास हैं। तो राज्य में बीजेपी विधायकों के वोट का कुल वेटेज 53,040 हुआ। एनडीए गठबंधन के दूसरे दल अपना दल (सोनेलाल) के पास राज्य में 12 विधायक हैं तो उनके वोट का वेटेज 3,060 होता है। एनडीए गठबंधन के साथी निषाद पार्टी के पास राज्य में छह विधायक हैं। जिससे उनके वोट का वेटेज 1,248 है। ऐसे में एनडीए के कुल 273 विधायकों के वोट का वेटेज 57,348 हो जाता है। विपक्ष का कितना है वोट वेटेज
एनडीए के खिलाफ यूपी में मुख्य विपक्षी सपा गठबंधन की बात करें तो समाजवादी पार्टी के पास 111 विधायक हैं। सपा के कुल विधायकों के वोट का वेटेज 23,088 है। इसी गठबंधन के एक अन्य दल रालोद के पास आठ विधायक हैं तो उनके वेटेज 1,664 हो जाता है। इस गठबंधन के सुभासपा के पास छह विधायक हैं, जिनके वोट का वेटेज 1,248 होता है। इसके अलावा बसपा के पास राज्य में मात्र एक विधायक है तो उसके विधायकों के वोट का वेटेज 208 है। वहीं कांग्रेस को दो विधायकों के वोट का वेटेज 416 और राजा भैया के जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी के विधायकों के दो विधायकों के वोट का वेटेज भी 416 है।