
Punjab Results : पंजाब विधानसभा (Punjab Results) को लेकर अब तस्वीर पूरी तरह से साफ हो गई है। 117 सीटों पर हुए चुनाव में (Punjab Results) 91 सीटों पर आम आदमी पार्टी ने रिकार्ड जीत दर्ज की है। यहां पर भगवंत मान शुक्रवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। भगवंत मान की जीत पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए विपक्षी दलों पर कटाक्ष भी किए हैं।
पंजाब में पूरी तरह आम आदमी पार्टी का झाड़ू चली है। 117 विधानसभा सीटों पर 20 फरवरी को मतदान हुआ था। राज्य में इस बार 71.95 प्रतिशत मतदान हुआ था। चुनाव से पहले यहां पर आप की ओर से भगवंत मान को सीएम प्रत्याशी घोषित किया गया था। भगवंत मान को यहां की जनता ने पसंद किया और आप को पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने का मौका प्रदान किया। भगवंत मान शुक्रवार को पंजाब के नए सीएम के रुप में शपथ ग्रहण करेंगे। शपथ समारोह भी राजभवन की जगह शहीदे आजम भगत सिंह के पैतृक गांव खटकड़ कलां में होगा। इससे पहले सीएम की शपथ राजभवन में होती रही है। शपथ लेने से पहले मान शहीदी स्मारक पर माथा टेकने भी जाएंगे।
2017 में हुए विधान सभा चुनाव में काँग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में जोरदार जीत हासिल किया था। 117 सदस्यीय विधान सभा में काँग्रेस के 77 विधायक जीते थे जबकि शिरोमणि अकाली दल - भाजपा गठबंधन केवल 18 सीटों तक सिमट गया था और आम आदमी पार्टी बीस सीट जीतकर विधान सभा में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी।
पंजाब की राजनीति से जुड़ी दिलचस्प बातें
1. 2017 के विधानसभा चुनावों में, कांग्रेस पार्टी का वोट शेयर 66% था। ये कांग्रेस का दूसरा बड़ा वोट शेयर था। 1992 के चुनावों में कांग्रेस का वोट शेयर 74% था। राज्य के 22 मुख्यमंत्रियों में से 14 मुख्यमंत्री कांग्रेस पार्टी के रहे हैं।
2. भारत की अनुसूचित जाति (दलित) की आबादी का पंजाब में अनुपात (31.9%) सबसे ज्यादा है। हालांकि, जाट सिख (जनसंख्या का 20%) यहां की राजनीति पर हावी है। चरणजीत सिंह चन्नी राज्य के पहले दलित मुख्यमंत्री हैं। ज्ञानी जैल सिंह पंजाब के अंतिम गैर-जाट सिख मुख्यमंत्री (1972-77) थे।
3. सतलुज नदी के साउथ बेल्ट से पंजाब विधानसभा में 69 सदस्य जाते हैं। आम तौर पर, जो भी इस क्षेत्र में जीतता है उसके पास सरकार बनाने का अच्छा मौका होता है। हालांकि, 2007 में उपवाद भी दिखा था। यहां कांग्रेस ने जीत हासिल की थी, लेकिन शिअद-भाजपा गठबंधन सत्ता में आया था।
4. स्वतंत्र भारत में पंजाब राज्य में बनी पहली सरकार में, मुख्यमंत्री गोपी चंद भार्गव के नेतृत्व में कांग्रेस और अकालियों के बीच गठबंधन हुआ था। लेकिन, यह लंबे समय तक नहीं चला। सिखों की सुरक्षा की मांग से इनकार के बाद अप्रैल 1949 में सरकार गिर गई थी। इसके चलते राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। उस समय कैप्टन अमरिंदर सिंह शिअद से कांग्रेस में चले गए थे।
5. पंजाब ने भारत को एक राष्ट्रपति दिया है - ज्ञानी जैल सिंह। जैल सिंह 1982 से 1987 तक राष्ट्रपति रहें। वह भारत के पहले और एकमात्र सिख राष्ट्रपति हैं। पंजाब ने भारत को एक प्रधान मंत्री भी दिया है - डॉ मनमोहन सिंह जो दो कार्यकाल, 2004-14 के लिए इस पद पर थे।
6. मुहम्मद जिया-उल-हक 1978 से 1988 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहें। जिया-उल-हक अविभाजित भारत में 1924 में पंजाब राज्य के जालंधर में पैदा हुए थे। पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री, इमरान खान के परिवार के मातृ पक्ष जालंधर से हैं। वे विभाजन के दौरान लाहौर चले गए थे।
6. 1966 में संसद ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम पारित किया था। इसके बाद, मॉडर्न स्टेट ऑफ पंजाब और नए राज्य हरियाणा के निर्माण का रास्ता खुला। तब से लेकर अब तक यहां हर मुख्यमंत्री सिख रहा है।
पंजाब के सियासी हालात ग्राफिक्स से समझिए पंजाब में पिछले 5 चुनाव का वोटिंग ट्रेंड देखें तो कांग्रेस और अकाली दल ही सत्ता में काबिज रहे हैं। वहीं, इस बार वोटिंग में पिछली बार से 5% की कमी आई थी। पिछले चुनाव यानी 2017 में कांग्रेस ने 77 सीटों पर बंपर जीत हासिल कर सरकार बनाई थी।
प्रमुख चेहरे
नवजोत सिंह सिद्धू(कांग्रेस) 6,750 वोटों से हारे डॉ. चरणजीत सिंह(आप) 7,942 वोटों से जीते चरणजीत सिंह चन्नी(कांग्रेस) 7,942 वोटों से हारे कैप्टन अमरिंदर सिंह(पीएलसी) हारे सुखबीर सिंह बादल(शिअद) 30,930 वोटों से हारे भगवंत सिंह मान(आप) 58,206 वोटों से जीते प्रकाश सिंह बादल(शिअद) हारे