इसी बीच चेतना मंच के संपादक आरपी रघुवंशी ने नागरिकों से रक्षाबंधन के पावन पर्व को लेकर अनावश्यक भ्रम और तनाव से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने की रस्म नहीं बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का पवित्र संकल्प है।

ग्रेटर नोएडा: भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन आज पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। रक्षाबंधन को लेकर इस बार 27 और 28 अगस्त की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी रही। हालांकि पंचांग के अनुसार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को रक्षाबंधन मनाया जा रहा है और इस दिन राखी बांधने के समय भद्रा की बाधा नहीं है। उपलब्ध पंचांग के अनुसार दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में राखी बांधने का प्रमुख समय सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया गया है। इसी बीच चेतना मंच के संपादक आरपी रघुवंशी ने नागरिकों से रक्षाबंधन के पावन पर्व को लेकर अनावश्यक भ्रम और तनाव से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने की रस्म नहीं बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का पवित्र संकल्प है।
आरपी रघुवंशी ने कहा कि रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का अत्यंत पवित्र पर्व है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसके सुख, समृद्धि, दीर्घायु और मंगल की कामना करती है। भाई भी बहन की रक्षा, सम्मान और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेता है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और अलग-अलग माध्यमों से मुहूर्त को लेकर तरह-तरह की जानकारियां सामने आती रहती हैं। नागरिकों को अपुष्ट जानकारियों से भ्रमित होने के बजाय प्रमाणिक पंचांग या विद्वान आचार्य की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए। आरपी रघुवंशी ने कहा, “रक्षाबंधन पावन और पवित्र त्योहार है। इसका मूल भाव भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और स्नेह है। इसलिए लोगों को मुहूर्त को लेकर अनावश्यक तनाव लेने के बजाय पर्व की भावना को समझना चाहिए। यदि किसी परिवार की अपनी धार्मिक परंपरा है तो उसके अनुसार राखी बांधना चाहिए और समय को लेकर प्रमाणिक पंचांग की जानकारी को आधार बनाना चाहिए।”
इस वर्ष रक्षाबंधन की तारीख को लेकर भी लोगों में काफी चर्चा रही। पंचांग आधारित जानकारी के अनुसार 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाया जा रहा है। 27 अगस्त को भद्रा की स्थिति होने के कारण 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाने की बात कही गई है। 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख मुहूर्त के तौर पर सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक का समय बताया गया है। इसलिए नागरिकों को 27 अगस्त और 28 अगस्त की तारीख को लेकर चल रही पुरानी या अपुष्ट सूचनाओं से भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है।
आरपी रघुवंशी ने कहा कि राखी का धागा भले ही छोटा होता है, लेकिन इसके साथ जुड़ी भावनाएं बहुत बड़ी होती हैं। यह धागा भाई-बहन के बीच बचपन की यादों, पारिवारिक संस्कारों और जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाने के संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब परिवारों के पास एक-दूसरे के लिए समय कम होता जा रहा है, ऐसे त्योहार रिश्तों को फिर से मजबूत करने का अवसर देते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि रक्षाबंधन के दिन परिवार के बुजुर्गों का आशीर्वाद लें, भाई-बहन आपस में प्रेम और सम्मान बनाए रखें तथा जरूरतमंद लोगों के साथ भी खुशियां साझा करें।
चेतना मंच के संपादक ने नागरिकों को विशेष रूप से सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली धार्मिक और ज्योतिष संबंधी अपुष्ट जानकारियों से सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी त्योहार के संबंध में तारीख, तिथि, भद्रा या मुहूर्त की जानकारी के लिए प्रमाणिक पंचांग को आधार बनाया जाना चाहिए। अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय और स्थानीय गणना के कारण समय में थोड़ा अंतर संभव है।
आरपी रघुवंशी ने कहा कि रक्षाबंधन को केवल भाई की ओर से बहन की रक्षा के संकल्प तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। आज के दौर में यह पर्व भाई-बहन के बीच सम्मान, समानता, सहयोग और भावनात्मक सुरक्षा का भी संदेश देता है। उन्होंने कहा कि भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प ले तो बहन भी भाई के सुख-दुख में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प ले। यही रिश्ते की वास्तविक खूबसूरती है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि रक्षाबंधन को दिखावे के बजाय प्रेम और आत्मीयता के साथ मनाएं।
“रक्षाबंधन की सबसे बड़ी खूबसूरती किसी खास धागे या महंगे उपहार में नहीं, बल्कि उस भावना में है जो भाई-बहन को जीवनभर एक-दूसरे से जोड़े रखती है। इस पवित्र पर्व पर मन में प्रेम रखें, रिश्तों में विश्वास रखें और परिवार में खुशियां बांटें।”
आरपी रघुवंशी, संपादक, चेतना मंच
चेतना मंच परिवार की ओर से सभी नागरिकों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं। पर्व को श्रद्धा, प्रेम और पारिवारिक सौहार्द के साथ मनाएं तथा धार्मिक समय को लेकर किसी भी भ्रम की स्थिति में प्रमाणिक पंचांग या स्थानीय विद्वान की सलाह को प्राथमिकता दें।
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