इस दौरान भाई को तिलक लगाने, आरती करने और उसकी कलाई पर राखी बांधने की रस्म पूरी की जा सकती है। अगर आप शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर रक्षाबंधन मनाना चाहते हैं तो सुबह के इसी समय को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।

रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के रिश्ते में प्यार और भरोसे का सबसे खास दिन माना जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं वहीं भाई भी बहन की हमेशा रक्षा करने का वादा करता है। इस बार रक्षाबंधन का दिन थोड़ा खास है क्योंकि इसी दिन चंद्र ग्रहण का संयोग भी बन रहा है। ऐसे में राखी बांधने के शुभ समय को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। पंचांग के अनुसार, इस बार राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ रहेगा और बहनों को 9 बजकर 48 मिनट तक यह रस्म पूरी कर लेनी चाहिए।
पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन के दिन सुबह 5 बजकर 57 मिनट से राखी बांधने का शुभ समय शुरू होगा और यह समय सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। यानी बहनों के पास राखी बांधने के लिए करीब 3 घंटे 51 मिनट का समय रहेगा। इस दौरान भाई को तिलक लगाने, आरती करने और उसकी कलाई पर राखी बांधने की रस्म पूरी की जा सकती है। अगर आप शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर रक्षाबंधन मनाना चाहते हैं तो सुबह के इसी समय को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।
रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान आदि के बाद पूजा की थाली तैयार कर लें। थाली में राखी के साथ रोली, अक्षत यानी साबुत चावल, दीपक और मिठाई रखी जा सकती है। शुभ समय शुरू होने पर बहन पहले भाई को तिलक लगाती है फिर अक्षत लगाकर आरती करती है। इसके बाद भाई की कलाई पर राखी बांधी जाती है और उसका मुंह मीठा कराया जाता है। परिवार अपनी परंपरा के अनुसार पूजा की दूसरी रस्में भी कर सकता है।
इस बार रक्षाबंधन के दिन ही साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है। यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। भारतीय समय के अनुसार इसका आंशिक चरण सुबह करीब 8 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और करीब 9 बजकर 43 मिनट पर ग्रहण अपने चरम पर पहुंचेगा। ऐसे में राखी बांधने का शुभ समय और ग्रहण का समय एक-दूसरे के काफी करीब है। यही वजह है कि इस बार राखी बांधने के समय को लेकर लोगों में ज्यादा उत्सुकता और सवाल हैं।
चंद्र ग्रहण होने के बावजूद भारत में इसे देखा नहीं जा सकेगा। जिस समय ग्रहण होगा, उस समय भारत में दिन का समय रहेगा और चंद्रमा आसमान में दिखाई नहीं देगा। इसलिए देश के ज्यादातर हिस्सों में लोग इस खगोलीय घटना को सीधे नहीं देख पाएंगे। यही बात ग्रहण से जुड़े धार्मिक नियमों को समझने में भी अहम मानी जा रही है।
चंद्र ग्रहण के साथ सूतक को लेकर भी लोगों के मन में सवाल रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक का नियम आम तौर पर दिखाई देने वाले ग्रहण से जोड़ा जाता है। चूंकि इस बार चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सामान्य धार्मिक मान्यता के अनुसार भारत में इसका सूतक मान्य नहीं माना जाएगा। हालांकि अलग-अलग परंपराओं और पंचांगों में नियमों को लेकर थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए जो परिवार अपनी स्थानीय परंपरा मानते हैं वे उसी के अनुसार निर्णय ले सकते हैं।
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