Ramadan 2026: रमजान 2026 का पाक महीना भारत में शुरू हो चुका है और मुसलमानों ने सहरी के साथ पहला रोजा रखा है। इस पवित्र महीने में रोजेदार सुबह सहरी करते हैं और सूर्यास्त के बाद इफ्तार के साथ रोजा खोलते हैं। रमजान इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना है और इसे बेहद रहमतों और बरकतों वाला महीना माना जाता है।

रमजान का महीना आते ही फिजा में एक अलग ही सुकून और रूहानी एहसास घुल जाता है। सुबह की सहरी से लेकर शाम की इफ्तार तक पूरा दिन इबादत, सब्र और खुद पर काबू रखने का पैगाम देता है। भारत में आज (जुमेरात) से रमजान की शुरुआत हो चुकी है। रोजा रखने वाले लोगों ने सुबह सहरी के साथ अपने पहले रोजे की नीयत की और अब शाम को इफ्तार के साथ पहला रोजा खोला जाएगा। माह-ए-रमजान सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं बल्कि अपने दिल और किरदार को बेहतर बनाने का मौका भी है।
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार रमजान नौवां महीना होता है और इसे बेहद पाक माना जाता है। मान्यता है कि इसी महीने में अल्लाह ने पैगंबर मोहम्मद साहब पर कुरआन-ए-पाक नाजिल किया था। यही वजह है कि इस पूरे महीने को इबादत, तिलावत और दुआओं का महीना कहा जाता है। भारत में चांद दिखाई देने के बाद आज पहला रोजा रखा गया है। आमतौर पर भारत में सऊदी अरब के एक दिन बाद चांद नजर आता है इसलिए यहां रोजे की शुरुआत भी एक दिन बाद होती है।
रोजे की शुरुआत सहरी से होती है। सूर्योदय से पहले खाया जाने वाला खाना सहरी कहलाता है। आज सुबह 05 बजकर 22 मिनट तक सहरी का समय था। इसके बाद पूरे दिन रोजेदार कुछ भी खाते-पीते नहीं हैं। शाम को सूर्यास्त के बाद रोजा खोला जाता है जिसे इफ्तार कहते हैं। आज पहले रोजे का इफ्तार शाम 06 बजकर 14 मिनट पर होगा। इफ्तार के वक्त लोग खजूर और पानी से रोजा खोलते हैं और फिर नमाज अदा करते हैं।
रमजान में रोजा रखना हर बालिग मुसलमान पर फर्ज माना गया है लेकिन इसका असली मकसद सिर्फ भूखा रहना नहीं है। रोजा इंसान को सब्र सिखाता है और बुरी आदतों से दूर रहने की ताकत देता है। ‘तकवा’ यानी परहेजगारी इस महीने की सबसे बड़ी सीख है। जब इंसान अपनी भूख और प्यास पर काबू कर सकता है तो वह गुस्से, झूठ और लालच जैसी बुराइयों पर भी आसानी से काबू पा सकता है।
यह महीना इंसानियत और मदद का भी पैगाम देता है। रमजान में लोग ज्यादा से ज्यादा दान करते हैं, जरूरतमंदों की मदद करते हैं और अपने रिश्तों को मजबूत बनाने की कोशिश करते हैं। मस्जिदों में नमाज और तरावीह का खास इंतजाम होता है। घरों में भी इबादत का माहौल रहता है। रमजान हमें यह याद दिलाता है कि असली खुशी सिर्फ अपने लिए जीने में नहीं बल्कि दूसरों का ख्याल रखने में है। यह महीना आत्मशुद्धि, सादगी और इंसानियत का प्रतीक है। जैसे-जैसे दिन बीतता है रोजेदारों का हौसला और भी मजबूत होता है और इबादत का जज्बा और गहरा होता जाता है।