Sawan Putrada Ekadashi: सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान सुख, परिवार की खुशहाली और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। माना जाता है कि श्रद्धा से भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत रखने से संतान से जुड़ी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

सावन पुत्रदा एकादशी को भगवान विष्णु की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। हर साल की तरह इस बार भी कई लोगों के मन में सवाल है कि व्रत 22 अगस्त को रखा जाए या 23 अगस्त को। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 23 अगस्त को सुबह 2:00 बजे शुरू होगी और 24 अगस्त को सुबह 4:18 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के नियम के कारण सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त को ही रखा जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान सुख, परिवार की खुशहाली और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। माना जाता है कि श्रद्धा से भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत रखने से संतान से जुड़ी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। यही वजह है कि यह एकादशी दंपत्तियों और परिवार के लिए विशेष महत्व रखती है।
व्रत वाले दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें। उन्हें पीले फूल, तुलसी दल और फल अर्पित करें तथा विष्णु सहस्रनाम या भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी 24 अगस्त को द्वादशी तिथि में किया जाएगा। पारण का शुभ समय दोपहर 1:41 बजे से शाम 4:16 बजे तक रहेगा।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।
विज्ञापन