Sawan Shivratri: साल 2026 की सावन शिवरात्रि इस बार खास रहने वाली है क्योंकि इस दिन भद्रा काल भी रहेगा। ऐसे में श्रद्धालुओं के बीच यह सवाल बना हुआ है कि जलाभिषेक और पूजा के लिए कौन सा समय सबसे शुभ रहेगा और किन समयों में सावधानी बरतनी चाहिए।

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इसी पवित्र महीने में आने वाली सावन शिवरात्रि का शिव भक्तों को पूरे साल इंतजार रहता है। इस दिन देशभर में श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं और भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि सावन शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। साल 2026 की सावन शिवरात्रि इस बार खास रहने वाली है क्योंकि इस दिन भद्रा काल भी रहेगा। ऐसे में श्रद्धालुओं के बीच यह सवाल बना हुआ है कि जलाभिषेक और पूजा के लिए कौन सा समय सबसे शुभ रहेगा और किन समयों में सावधानी बरतनी चाहिए। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, सही मुहूर्त में पूजा करने से पूजा का महत्व और बढ़ जाता है।
पंचांग के अनुसार, सावन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त 2026 को सुबह 4 बजकर 43 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि 12 अगस्त को रात 1 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि और निशिता काल को ध्यान में रखते हुए सावन शिवरात्रि का पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन शिव मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ देखने को मिलेगी। श्रद्धालु भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करेंगे।
इस साल सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया रहेगा। पंचांग के अनुसार, भद्रा काल 11 अगस्त को सुबह 4 बजकर 56 मिनट से शुरू होकर दोपहर 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा काल में कई शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि भगवान शिव की पूजा, मंत्र जाप और भक्ति करने पर भद्रा का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं माना जाता है। भक्त इस दौरान भी भगवान शिव का ध्यान और आराधना कर सकते हैं।
सावन शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए शुभ समय का विशेष महत्व माना जाता है। अगर आप महादेव का जलाभिषेक करने की तैयारी कर रहे हैं तो ब्रह्म मुहूर्त को सबसे अच्छा समय माना गया है। 2026 में सावन शिवरात्रि के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 23 मिनट से लेकर सुबह 6 बजे तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। वहीं रात में गोधूलि मुहूर्त रात 9 बजकर 13 मिनट से 9 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। भगवान शिव की विशेष रात्रि पूजा के लिए निशिता मुहूर्त का भी महत्व होता है। यह मुहूर्त 12 अगस्त की रात 12 बजकर 5 मिनट से रात 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
सावन शिवरात्रि पर रात में चार प्रहर की पूजा करने की परंपरा काफी पुरानी है। धार्मिक मान्यता है कि शिवरात्रि की रात भगवान शिव की आराधना करने से विशेष फल प्राप्त होता है। पहले प्रहर की पूजा शाम 7 बजकर 4 मिनट से रात 9 बजकर 45 मिनट तक की जा सकेगी। इसके बाद दूसरे प्रहर की पूजा रात 9 बजकर 45 मिनट से रात 12 बजकर 26 मिनट तक होगी। तीसरे प्रहर की पूजा रात 12 बजकर 26 मिनट से सुबह 3 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। वहीं चौथे और अंतिम प्रहर की पूजा सुबह 3 बजकर 7 मिनट से सुबह 5 बजकर 49 मिनट तक की जाएगी।
सावन शिवरात्रि के दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और भगवान शिव का ध्यान कर व्रत का संकल्प लेते हैं। इसके बाद शिवलिंग पर जल और दूध से अभिषेक किया जाता है। पूजा में बेलपत्र, भस्म, फूल, फल और दीपक अर्पित करने की परंपरा है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त महामृत्युंजय मंत्र और भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र "ॐ नमः शिवाय" का जाप करते हैं। माना जाता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा भगवान शिव को प्रिय होती है।
सावन शिवरात्रि पर पूजा करते समय शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना अच्छा माना जाता है लेकिन भगवान शिव की भक्ति में सबसे अधिक महत्व श्रद्धा और विश्वास का होता है। भक्त अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं। साल 2026 की सावन शिवरात्रि भद्रा काल के कारण चर्चा में है लेकिन महादेव की आराधना के लिए यह दिन बेहद पवित्र माना जाएगा। इस दिन सही समय पर जलाभिषेक और विधि-विधान से पूजा करने से भक्त भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करेंगे।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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