नई दिल्ली। नोएडा एक्सप्रेस-वे स्थित एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के 40 मंजिला ट्विन टावर 16 (अपेक्स) और 17 (स्यान) को ढहाए जाने के अपने पहले के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने आज इस इस मामले में दायर संशोधन याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुपरटेक को किसी तरह की राहत देने से इनकार करते हुए सुपरटेक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी से सवाल किया कि आखिर यह याचिका विचारयोग्य कैसे है? जवाब में रोहतगी ने कहा कि वह कोर्ट के आदेश की पालना की ही बात कर रहे हैं। वह टावर नंबर-17 को गिराने को तैयार हैं। रोहतगी का कहना था कि इस टावर को गिरा दिए जाने के बाद दो टॉवरों के बीच की दूरी और हरित क्षेत्र आदि के मापदंड पूरे हो जाएंगे। जवाब में पीठ ने कहा, यह तो वही बात हो गई कि आदेश का अनुपालन करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन आदेश आपकी शर्तों के मुताबिक हो। इस पर रोहतगी का कहना था कि वह यह नहीं कह रहे हैं कि आदेश का पालन नहीं करना चाहते बल्कि वह इस मामले पर संतुलित नजरिया अपनाने की मांग कर रहे हैं। वहीं आरडब्ल्यूए की ओर से पेश वरिष्ठ वकील जयंत भूषण ने सुपरटेक की याचिका का कड़ा विरोध किया। दरअसल आज सुपरटेक की ओर से प्रोजेक्ट में संभावित बदलाव की रूपरेखा पेश की गई थी।
गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2014 के फैसले को बरकरार रखते हुए गत् 31 अगस्त को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने दोनों टावरों के गिराए जाने के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा था कि सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के इन दोनों टावरों को तीन महीने के भीतर गिराए। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही यह भी कहा था कि ढहाने का कार्य नोएडा के अधिकारियों की देखरेख में होगा। सुपरटेक को इस मद में होने वाला खर्च स्वयं वहन करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) को टावरों को गिरा ने के लिए कहा था जिससे कि सुरक्षित तरीके से इनको गिराने की प्रक्रिया पूरी की जा सके। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक को दो महीने के भीतर ट्विन टावरों के फ्लैट खरीदारों को 12 फीसदी प्रति वर्ष ब्याज के साथ राशि वापस करने का भी निर्देश दिया था। कोर्ट ने बिल्डर को एक महीने के भीतर एमरॉल्ड कोर्ट ओनर रेजिडेंट्स वेलफेयर असोसिएशन को हर्जाने के तौर पर दो करोड़ रुपए का भुगतान करने का भी निर्देश दिया था।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मामले में बिल्डर और नोएडा अथॉरिटी की मिली भगत पर तल्ख टिप्पणी कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि, अथॉरिटी के मुंह-आंख-कान यहां तक कि चेहरे से भी भ्रष्टाचार टपकता है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी लोगों की दुखती रग पर एक मलहम की तरह थी। दरअसल नोएडा में लाखों ऐसे फ्लैट बायर्स हैं जिनके साथ बिल्डर ने दगा किया है। बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें 12 से 13 साल हो गए पर फ्लैट नहीं मिला। कुछ ऐसे लोग हैं जिन्हें फ्लैट तो मिले पर आधी-अधूरी सुविधाओं के साथ। इस तरह के अनेक मामले हैं जिनमें बिल्डर और अथॉरिटी अफसरों की मिलीभगत के चलते लोग अपनी जीवन भर की कमाई को गंवा बैठे हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस टिप्पणी के बाद लोगों की उम्मीद जगी है कि उनके साथ अब न्याय जरूर होगा और बिल्डरों का साथ देने वालों अफसरों पर जरूर एक्शन भी होगा।