Suicide : डराने लगे हैं देश में आत्महत्या के आंकड़े, एक साल में बढ़ी 06 फीसदी संख्या
भारत
RP Raghuvanshi
28 Nov 2025 10:02 PM
New Delhi : नई दिल्ली। देश में आत्महत्या से होने वाली मौतों के आंकड़े डराने लगे हैं। साल दर साल तेजी से बढ़ रहे इन आंकड़ों में हालांकि आत्महत्या के कारणों की चर्चा नहीं की गई है, लेकिन इनमें छात्रों और छोटे कारोबारियों की संख्या सबसे अधिक है। इन आंकड़ों ने यह सोचने पर विवश किया है कि कहीं इन मौतों के पीछे मानसिक दबाव और आर्थिक विपन्नता तो नहीं?
देश में आत्महत्या से हुई मौत को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकान वाले हैं। एनसीआरबी के नए रिकॉर्ड के मुताबिक साल 2021 में प्रति 10 लाख लोगों में 120 लोगों ने आत्महत्या की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.1 फीसदी अधिक है। मौत के ये मामले पिछले सभी वर्षों में सबसे अधिक हैं। इन मामलों में सबसे तेज वृद्धि छात्रों और छोटे उद्यमियों के बीच रही, जो रिपोर्ट के 2020 संस्करण में भी देखी गई थी। ये निष्कर्ष भारत में दुर्घटना से होने वाली मौतों, आत्महत्याओं और भारत में अपराध (सीआईआई) की 2021 की रिपोर्ट से निकाला गया है। दोनों को केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत एनसीआरबी द्वारा प्रकाशित किया गया था।
गृह मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि साल, 2021 में आत्महत्या से कुल 1,64,033 लोगों की जान गई, जो वर्ष-2020 की तुलना में 7.2 फीसदी अधिक है। वहीं, साल-2020 में 1,53,052 लोगों की जान गई थी। जबकि वर्ष-2019 में यह आंकड़ा करीब 1,39,000 था। इसके अलावा प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 120 मौतें हुईं। वर्ष-2021 में 1967 में आत्महत्या से होने वाली मौतों से भी उच्चतम दर देखी गई। देश में आत्महत्या की अब तक की दूसरी सबसे बड़ी दर 2010 में दर्ज की गई थी, जब प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 113 मौतें हुई थीं। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि सबसे कम आय वर्ग (प्रति वर्ष एक लाख से कम आय वाले लोग), जो आत्महत्या से होने वाली मौतों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा हैं और सबसे अधिक हैं।