मंगलवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने खुद कहा कि जितनी लम्बी बहस कुत्तों के ऊपर सुनी है उतनी लम्बी बहस उन्होंने कभी भी इंसानों के ऊपर नहीं सुनी।

Supreme Court stray dogs case : भारत में इन दिनों कुत्ते बहुत खास हो गए हैं। भारत के सुप्रीम कोर्ट से लेकर सडक़ तक कुत्तों की ही चर्चा हो रही है। आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि भारत में जो काम इंसानों के लिए कभी नहीं हुआ वही काम भारत के कुत्तों के लिए हो गया है। इतना ही नहीं भारत की सबसे बड़ी अदालत यानि भारत का सुप्रीम कोर्ट कुत्तों के लिए लड़ाई लडऩे वाली सबसे बड़ी संस्था बन गई है।
आपको बता दें कि भारत के सुप्रीम कोर्ट में पिछले 6 महीने से कुत्तों का मामला छाया हुआ है। यह मामला आवारा कुत्तों से जुड़ा हुआ है। सडक़ों पर घूमने वाले आवारा कुत्तों को लेकर भारत के सुप्रीम कोर्ट में इतनी लम्बी बहस हो चुकी है जितनी लम्बी बहस भारत में कभी इंसानों के लिए नहीं हुई। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने खुद कहा कि जितनी लम्बी बहस कुत्तों के ऊपर सुनी है उतनी लम्बी बहस उन्होंने कभी भी इंसानों के ऊपर नहीं सुनी।
आवारा कुत्तों को लेकर भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला सुनाया। देशभर में लावारिस कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अब ऐसे मामलों में राज्य सरकार और स्थानीय नगरीय निकायों को भारी मुआवजा चुकाना होगा। अदालत ने कहा, कुत्ते के काटने पर उन्हें खाना खिलाने वाले लोगों और संगठनों की भी जवाबदेही तय की जाएगी। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की विशेष पीठ इस मुद्दे पर स्वत:संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही थी। जस्टिस नाथ ने कहा, लावारिस कुत्ते के हमले में किसी बच्चे या बुजुर्ग की मौत होती है या वह गंभीर जख्मी होता है, तो हम तय करेंगे कि राज्य सरकार और स्थानीय निकाय उन्हें भारी मुआवजा दें, क्योंकि उन्होंने कोते पांच साल में नियम लागू करने कौ अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई है। जस्टिस नाथ ने कुत्तों को खाना खिलाने वालों को भी चेतावनी दी, यदि वे इन जानवरों की चिंता करते हैं, तो उन्हें अपने घरों में रखें। सडक़ों पर खुला छोडक़र लोगों की डराने और काटने देना मंजूर नहीं है।
इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संदीप मेहता ने भी चिंता जताते हुए पूछा, जब नौ साल का बच्चा कुत्ते के हमले का शिकार होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। आप चाहते हैं कि हम आंखें मूंद लें। लावारिस कुत्ते किसी के स्वामित्व में नहीं होते और यदि कोई उन्हें पालना चाहता है, तो उसे कानून के तहत लाइसेंस लेकर पालतू बनाना चाहिए। पीठ नवंबर, 2025 में दिए अपने आदेश के अनुपालन की निगरानी कर रही है, जिसमें बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और अन्य सार्वजनिक संस्थानों से लावारिस कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि कुत्तों का टीकाकरण और नियमों के तहत नसबंदी की जाए और उन्हें उसी स्थान पर वापस न छोड़ा जाए। Supreme Court stray dogs case