Surya Grahan: भारत में इस सूर्य ग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भी कई सवाल हैं। क्या इस दौरान सूतक काल लगेगा? क्या पूजा-पाठ किया जा सकता है? ग्रहण के बाद क्या करना चाहिए? आइए जानते हैं सूर्य ग्रहण से जुड़ी जरूरी बातें।

आज साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा जिसे लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है। हालांकि भारत में रात के समय होने के कारण यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। दुनिया के कुछ हिस्सों में लोग इस खास खगोलीय घटना को देख सकेंगे। NASA के अनुसार पूर्ण सूर्य ग्रहण ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, स्पेन और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से से दिखाई देगा जबकि कई दूसरे इलाकों में आंशिक ग्रहण नजर आएगा। भारत में इस सूर्य ग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भी कई सवाल हैं। क्या इस दौरान सूतक काल लगेगा? क्या पूजा-पाठ किया जा सकता है? ग्रहण के बाद क्या करना चाहिए? आइए जानते हैं सूर्य ग्रहण से जुड़ी जरूरी बातें।
आज लगने वाला सूर्य ग्रहण साल 2026 का आखिरी सूर्य ग्रहण है। भारतीय समय के हिसाब से यह ग्रहण रात में पड़ेगा इसलिए भारत से इसे देखा नहीं जा सकेगा। यही वजह है कि भारत में रहने वाले लोगों को आसमान में सूर्य ग्रहण का नजारा देखने को नहीं मिलेगा। वैज्ञानिक तौर पर सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। इस दौरान चंद्रमा की छाया पृथ्वी के कुछ हिस्सों पर पड़ती है और वहां से देखने पर सूर्य कुछ समय के लिए ढका हुआ दिखाई देता है।
इस बार सूर्य ग्रहण का रास्ता भारत से काफी दूर रहेगा। पूर्ण ग्रहण का मुख्य क्षेत्र उत्तरी रूस, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन सहित कुछ इलाकों में रहेगा। यूरोप के कई हिस्सों, कनाडा, उत्तरी अमेरिका और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा। भारत में यह ग्रहण रात के समय होने के कारण दिखाई नहीं देगा। ऐसे में यहां लोग इसे सीधे आसमान में नहीं देख पाएंगे।
सूर्य ग्रहण से करीब 12 घंटे पहले शुरू होने वाले सूतक काल को लेकर हिंदू धर्म में अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं हैं। आम तौर पर जिस स्थान पर ग्रहण दिखाई देता है वहां सूतक से जुड़े नियमों का पालन किया जाता है। इस बार भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां सूतक काल मान्य नहीं माना जा रहा है। यानी भारत में रहने वाले लोगों को ग्रहण के कारण सामान्य पूजा-पाठ या रोजमर्रा के काम रोकने की जरूरत नहीं है। हालांकि, जो लोग अपनी पारिवारिक या धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं, वे अपनी आस्था के अनुसार नियम मान सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण के समय मंत्र जाप और भगवान का ध्यान करने की परंपरा रही है। कुछ लोग इस समय पूजा-पाठ करने के बजाय ध्यान और मंत्र जाप करना पसंद करते हैं लेकिन भारत में इस बार ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसलिए यहां पूजा-पाठ को लेकर किसी तरह की रोक नहीं मानी जा रही है। श्रद्धालु अपनी मान्यता और परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करने, घर की साफ-सफाई करने और जरूरतमंद लोगों को दान देने की परंपरा है। कुछ लोग पूजा स्थल की सफाई करके भगवान की पूजा भी करते हैं। हालांकि, ये धार्मिक परंपराएं हैं और इन्हें मानना व्यक्ति की अपनी आस्था पर निर्भर करता है। वैज्ञानिक नजरिए से ग्रहण के बाद किसी खास तरह की सफाई या स्नान करना जरूरी नहीं है।
पूर्ण सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है और पृथ्वी के कुछ हिस्सों से सूर्य का चमकीला हिस्सा दिखाई नहीं देता। इस दौरान कुछ समय के लिए दिन में अंधेरा जैसा माहौल बन सकता है। NASA के मुताबिक, पूर्ण ग्रहण के दौरान सबसे ज्यादा खास पल वह होता है जब चंद्रमा सूर्य के पूरे चमकीले हिस्से को ढक लेता है। इस बार कई जगहों पर पूर्ण ग्रहण की अवधि दो मिनट से भी कम रहेगी।
अगर कोई व्यक्ति ऐसे स्थान पर है जहां सूर्य ग्रहण दिखाई दे रहा है, तो उसे बिना सुरक्षा के सीधे सूर्य की ओर नहीं देखना चाहिए। आंशिक ग्रहण को देखने के लिए सुरक्षित सोलर व्यूइंग ग्लास या उचित सोलर व्यूअर का इस्तेमाल करना जरूरी है। NASA भी सूर्य को सीधे देखने से बचने और सुरक्षित उपकरणों का इस्तेमाल करने की सलाह देता है। भारत में इस ग्रहण को देखा नहीं जा सकेगा इसलिए यहां लोगों को इसे देखने के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं है।
विज्ञापन