भाजपा नेता से बदसलूकी मामले में लीपापोती शुरू

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locationभारत
userRP Raghuvanshi
calendar28 Jun 2022 05:49 PM
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\n\nरामनिवास यादव की ओर से जिलाधिकारी को दी गई शिकायत में कहा गया था कि गौर चौकी पर पहुंचकर मैंने सचिन पवार से कहा, यह पुलिस चौकी हमारे खेतों के क्षेत्र में नहीं है। आपने मेरे पिताजी और भाई को यहां क्यों बुलाया है। इस पर सचिन पवार में मुझसे परिचय मांगा। मैंने उन्हें बताया कि मैं भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा में नोएडा महानगर का अध्यक्ष हूं। यह सुनते ही सचिन पवार ने गाली गलौज करना शुरू कर दिया। सचिन पवार ने कहा कि नेतागिरी को घुसेड़ दूंगा। जाकर अपने जिला अध्यक्ष विजय भाटी और महानगर अध्यक्ष मनोज गुप्ता से पूछ, यहां सचिन पवार बैठा हुआ है। मैं कोई भाजपा वाजपा को मानने वाला नहीं हूं। जब अपनी पर आऊंगा तो कोई भाजपा वाला तुझे नहीं बचा पाएगा।'\n\nयह मुद्दा राजनीति व प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ था। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या एक अदने से सरकारी कर्मचारी की इतनी हिम्मत हो सकती है कि वह सरेआम भाजपा अध्यक्ष को न केवल धमकी दे, बल्कि गालियां तक दे डाले? भाजपा नेता के पिता से 1 लाख रूपये की रिश्वत मांगे और उसके विरूद्ध कोई सख्त कार्यवाही न हो? सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि यह कैसी सरकार है जिसमें सत्तारूढ़ पार्टी के जिलाध्यक्ष का खुद का जायज काम भी एक छोटा सा कर्मचारी तक करने को तैयार नहीं है। ऐसे अध्यक्ष अथवा नेता आम जनता, पार्टी कार्यकर्ताओं तथा अपने समर्थकों का क्या भला कर पाएंगे। एक सवाल यह भी है कि जिस पार्टी के लिए भाजयुमो अध्यक्ष ने गालियां खाई हैं उसकी मदद करने के लिए पार्टी नेतृत्व आगे क्यों नहीं आ रहा है?\n\nभाजपा व भाजपाई मौन\nछोटे-छोटे मुददों को तिल का ताड़ बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी व पार्टी के तमाम नेता अपने अध्यक्ष के साथ हुई बदसलूकी पर भी  मौन.... साधकर बैठे हुए हैं। किसी भी स्तर से ना तो इस मामले में कार्यवाही की सिफारिश हुई है और ना ही कोई बयाान तक सामने आया है। पूरी पार्टी ने भाजयमुो अध्यक्ष से पल्ला झाड़ लिया है। राजनीतिक पंडितों का मत है कि इस मुददे को लेकर भाजपा का आम कार्यकर्ता आक्रोश में है, किन्तु बेचारा आम कार्यकर्ता करे भी तो क्या करे ?\n\nयह क्या सजा है ?\nइस प्रकरण में मीडिया की सुर्खियां बनने के बाद जिलाधिकारी सुहास एल.वाई. ने आरोपी नायब तहसीलदार को तहसील से हटाकर अपने कार्यालय से अटैच कर दिया है। सवाल यह भी पूछाा जा रहा है कि क्या प्रशासन ने उसे दोषी मान लिया है ? यदि दोषी मान लिया है तो क्या किसी नेता के साथ खुलेआम बदसलूकी करने की सजा मात्र एक स्थान से हटाकर दूसरे स्थान तक भेजना भर पर्याप्त है।
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चेतना दृष्टि
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