ओशो तो वास्तव में जीवन के उस सच्चे रहस्य को उद्घाटित करते हैं जिस रहस्य को दुनिया के तमाम महापुरूष पूरी तरह से उद्घाटित नहीं कर पाए थे। ओशो ने आसान भाषा तथा अपने तर्कों के द्वारा जीवन के परम सत्य को प्राप्त करने का मार्ग बताने का बड़ा काम किया है।

Osho : ओशो (Osho) एक Sex गुरू थे। ओशो Sex की बात करके धर्म भ्रष्ट करने का काम करते रहे। ओशो धर्म तथा अध्यात्म में Sex को लाने वाले धर्म गुरू रहे हैं। ऐसे अनेक सवाल ओशो के ऊपर उठाए जाते हैं। क्या वास्तव में ओशो Sex गुरू थे? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने ओशो के अनेक अनुयायियों के साथ लम्बी बातचीत की है। इस बातचीत तथा रिसर्च के दौरान हमें ओशो के जीवन पर आधारित एक प्रमाणिक वीडियो मिला है। इस वीडियो को सुनकर यह स्पष्ट होता है कि वास्तव में ओशो को Sex गुरू कहने वाले लोग दरअसल ओशो को जानते ही नहीं हैं।
हाल ही में Deepcast-5 नामक यूट्यूब चैनल ने ओशो के प्रसिद्ध शिष्य समर्थ गुरू उर्फ सिद्धार्थ औलिया का एक लम्बा इंटरव्यू प्रसारित किया है। ओशो के शिष्य समर्थ गरू उर्फ सिद्धार्थ ओलिया ‘‘समर्थ गुरूधारा’’ (Samarthgurudhara) के नाम से ओशो के द्वारा दिए गए ज्ञान को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। यूट्यूब पर प्रसारित इस वीडियो में पूरे प्रमाण तथा तथ्यों के साथ यह साबित किया गया है कि ओशो के साथ Sex गुरू का टैग जोडऩा सरासर गलत है। ओशो तो वास्तव में जीवन के उस सच्चे रहस्य को उद्घाटित करते हैं जिस रहस्य को दुनिया के तमाम महापुरूष पूरी तरह से उद्घाटित नहीं कर पाए थे। ओशो ने आसान भाषा तथा अपने तर्कों के द्वारा जीवन के परम सत्य को प्राप्त करने का मार्ग बताने का बड़ा काम किया है।
आपको बता दें कि भगवान रजनीश के नाम से चर्चित रहे ओशो का असली नाम चंद्र मोहन जैन था, ओशो 20वीं सदी के सबसे चर्चित आध्यात्मिक गुरुओं में से एक रहे हैं। उनके बारे में आज भी यह धारणा फैली हुई है कि वह “Sex Guru” थे — यानी ऐसा गुरु जिन्होंने Sex को ही आध्यात्मिकता का केंद्र माना। Samarthgurudhara ने इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि यह धारणा गलतफहमी और घटित मिथकों पर आधारित है, न कि उनके वास्तविक विचारों पर वीडियो के अनुसार, Osho ने सेक्स को कभी सतही इच्छाओं के रूप में प्रस्तुत नहीं किया। बल्कि उन्होंने इसे मानव ऊर्जा का एक रूप बताया — जिसे समझकर और उसे नियंत्रित करके व्यक्ति गहरे ध्यान और समाधि की ओर बढ़ सकता है। उनके अनुसार, “संभोग से समाधि की ओर” (Sexual Energy से Spiritual Awareness तक) का मार्ग है, न कि केवल यौन सुख का प्रचार। उनकी यह सोच पारंपरिक धार्मिक दृष्टिकोणों से बिलकुल अलग थी, क्योंकि उन्होंने सेक्स के विषय को एक ऊर्जा रूप में देखा, न कि केवल सामाजिक या नैतिक सीमा में बांधा गए व्यवहार के रूप में।
Osho वास्तविकता में ध्यान (Meditation), जागरूकता (Awareness) और व्यक्ति की आंतरिक स्वतंत्रता पर जोर देते थे। वे मानते थे कि व्यक्ति की इच्छाओं को दबाने से हम वास्तविकता से पीछे हटते हैं; बल्कि उन्हें समझकर उनसे ऊपर उठना चाहिए। उनकी शिक्षाओं में ध्यान के विभिन्न रूप थे, जिनका उद्देश्य था व्यक्ति की मानसिक सीमाओं को तोड़ना और उसे असली आत्म-अनुभूति तक पहुंचाना। ओशो की मीडिया में प्रस्तुत की गई छवियाँ — खासकर उनकी बोल्ड टिप्पणियाँ और शारीरिक मानव स्वाभाव पर खुले विचारों ने वर्षों तक लोगों में यह भ्रम फैलाया कि वे व्यक्ति को मात्र यौन क्रिया तक सीमित मानते थे। इस इंटरव्यू ने इस झूठे आरोप को तोड़ते हुए बताया कि यह उनके सिखाए आध्यात्मिक संदेश का विकृत रूप है।
यूटयूब पर प्रसारित इंटरव्यू से यह स्पष्ट होता है कि: ओशो कभी केवल ‘Sex Guru’ नहीं थे; वे एक विचारक, आध्यात्मिक चिंतक और ध्यान के प्रसिद्ध गुरु थे। उनका लक्ष्य लोगों को मन की सीमाओं से परे ले जाना था न कि सिर्फ यौन विचारधारा पर ध्यान केंद्रित करना। जो लोग आज “Sex Guru” का लेबल लगाते हैं, वे ओशो के पूरे दर्शन को नहीं समझ पाए हैं। इस रिसर्च के आधार पर स्पष्ट कहा जा सकता है कि Osho जैसे व्यक्तित्व और उनकी शिक्षाएँ आज भी विवादों और विमर्शों का केंद्र बनी हुई हैं। इस इंटरव्यू ने उन मिथकों और गलत धारणाओं को चुनौती दी है, जिन पर सालों से आधारित सोच कायम थी। चेतना मंच के पाठकों के लिए यह कहानी यह याद दिलाती है कि किसी भी महान व्यक्तित्व को केवल एक पहलू से परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए — बल्कि उनके जीवन के व्यापक संदर्भ, दर्शन और सूक्ष्म विचारों को समझना महत्वपूर्ण है।
यूटयूब पर प्रसारित ओशो के शिष्य समर्थ गुरू उर्फ सिद्धार्थ ओलिया के इंटरव्यू में बताया गया है कि ओशो के प्रवचनों का संकलन करके 600 से भी अधिक पुस्तकें प्रकाशित की गई हैं। उन्होंने बताया कि ओशो ने 9 हजार से अधिक प्रवचन दिए हैं। संभोग से समाधि की ओर तो ओशो की छोटी सी प्रवचन माला का हिस्सा है। इंटरव्यू में समर्थ गुरू ने बताया कि काम यानि Sex की उर्जा ही जीवन का आधार है। Sex की उर्जा को अधोगामी बनाने की बजाय उधो गामी बनाकर मानव जीवन का सम्पूर्ण रूपांतरण करके परम सत्य को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि ओशो की संभोग से समाधि की ओर पुस्तक में इसी विषय पर पूरी बातचीत की गई है। Osho