UP Election 2022 : के नए साल के साथ ही 5 राज्यों की विधानसभा के चुनाव की घोषणा चुनाव आयोग (Election commission) ने कर दी। उस के बादसे अब तक उत्तर प्रदेश में 4 टर्म में वोटिंग संपन्न हुई है। अभी 3 टर्म में मतदान होने हैं।
अब यूपी के पूर्वांचल की ओर बढ़ चला है, जहां हमेशा से बाहुबलियों नेताओ का बोल बाला रहा है। ऐसे बाहुबली नेता जो जेल में रहे हों या जेल के बाहर, सत्ता दल में रहे या विपक्ष में लेकिन उनकी तू ती हमेशा बोली है।
पूर्वांचल के इन्हीं बाहुबलियों नेताओ के इर्दगिर्द उत्तर प्रदेश की सियासत भी घूमती आ रही है। इस बार विधान सभा चुनाव (UP Election) में इन बाहुबलियों का क्या है हाल? कौन किसको चुनौती दे रहा है? और कौन कहां से मैदान में उतरा है? देखते है !
चिल्लूपार से विनय शंकर तिवारी सपा से ब्राह्मण चेहरा
गोरखपुर के बाहुबली हरि शंकर तिवारी भले ही इस बार चुनावी मैदान में नहीं उतरे हों पर उनकी परंपरागत चिल्लूपार सीट से शंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर मैदान में हैं।
इस सटी पर 37 साल से ब्राह्मण ही विधायक बनते आ रहा है। ब्राह्मणों की नाराजगी को देखते हुए विनय शंकर तिवारी समाजवादी पार्टी (सपा) के सबसे बड़े ब्राह्मण चेहरा है।
विनय शंकर तिवारी को बहुजन समाज पार्टी ने निष्कासित कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थामा. वहीं भारतीय जनता पार्टी ने यहां से पूर्व मंत्री राजेश त्रिपाठी को टिकट दिया है तो बहुजन समाज पार्टी ने राजेंद्र सिंह उर्फ पहलवान सिंह को मैदान में भेजा है।
गोसाईगंज में चुनाव अभय सिंह बनाम खब्बू तिवारी
मुख्तार अंसारी के खास गुर्गे अभय सिंह की चुनावी सियासी परीक्षा भी 5 वें चरण में होनी है। अभय सिंह अयोध्या के गोसाईगंज सीट (Gosaiganj seat) से समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में हैं।
अभय सिंह के सामने भारतीय जनता पार्टी के पूर्व एमएलए इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी की पत्नी आरती तिवारी को मैदान में उतारा हैं।
इस वजह से अभय सिंह का सीधा मुकाबला भले ही आरती तिवारी से हो पर साख जेल में बंद खब्बू तिवारी की सीट दांव पर लगी है। बीते सप्ताह प्रचार के दौरान दोनों ही पक्षों में भिड़ंत हो गई थी।
पथराव और फायरिंग भी हुआ था, जिसके बाद पोलिस ने अभय सिंह को गिरफ्तार कर लिया था पर कोर्ट ने अभय सिंह को रिहा कर दिया था।
जौनपुर की रारी सीट से बाहुबली धनंजय सिंह जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के टिकट पर मैदान में उतरे हैं। धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला रेडी हल ही में हुए पंचायत चुनाव के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गईं।
2017 में धनंजय सिंह निषाद पार्टी (Nishad Party) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे, हालांकि समाजवादी पार्टी के पारसनाथ यादव से वे हार गए थे।
इस बार भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन के चलते निषाद पार्टीने दागी उम्मीदवारों (tainted candidate) को किनारे कर दिया था। इस वजह से धनंजय सिंह को टिकट नहीं मिल पाई। मालमू हो कि एक मामले में आरोपित पूर्व सांसद धनंजय सिंह के खिलाफ 23 फरवरी को एसीजेएम तृतीय कोर्ट ने गिरफ्तारी वॉरंट जारी किया है।