
Uttar pradesh : देश के सबसे बडे़ प्रदेश, उत्तर प्रदेश में पुन: सत्ता हासिल करने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) हाईकमान अब लोकसभा चुनावों की तैयारियों में जुट गई है। परंतु इसके लिए उसे यूपी में भाजपा को प्रदेश अध्यक्ष की तलाश है। इन दिनों नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर मंथन का दौर चल रहा है। उम्मीद है कि अगले सप्ताह यूपी भाजपा (BJP state president) को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल जाएगा।
गत विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह की कुशल जुगलबंदी से भाजपा को प्रदेश में फिर से सत्ता हासिल हुई है। जिसके परिणामस्वरूप योगी आदित्यनाथ को फिर से मुख्यमंत्री के पद पर जबकि प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह को सरकार में उनके साथ मंत्री बनाया गया। अब जबकि स्वतंत्रदेव सिंह सरकार में शामिल हो चुके हैं। इसलिए पार्टी संविधान के अनुसार वह दो पदों पर काबिज नहीं हो सकते है।
उत्तर प्रदेश में भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर दिल्ली से लेकर लखनऊ तक कई राउन्ड की बैठकें भी हो चुकी हैं जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश , संगठन मंत्री सुनील बंसल और वर्तनाम प्रदेश अध्यक्ष स्वंतत्र देव सिंह शामिल हो चुके हैं।
जानकारों का कहना है कि जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी के पास दो रास्ते हैं एक किसी ब्राम्हण को प्रदेश की कमान सौपी जाए जिससे सवर्ण वोटों को आकर्षित किया जाए तो दूसरा विकल्प गैर-यादव ओबीसी के नेता को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए जिससे सपा और बसपा को और कमजोर किया जा सके।
उम्मीद की जा रही है कि भाजपा पिछड़ा वर्ग के व्यक्ति पर ही दांव लगाएगी। इसके पीछे सरकार और संगठन में एक सवर्ण और एक ओबीसी का फार्मूला रखने की है। पहले भी भाजपा इस तरह के प्रयोग करती रही है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि प्रदेश अध्यक्ष के दावेदारों में पूर्व मंत्री श्रीकांत शर्मा प्रदेश उपाध्यक्ष विजय बहादुर पाठक, भाजपा के महासचिव अश्विनी त्यागी और अमरपाल मौर्या के अलावा बस्ती से पार्टी सांसद हरीश द्विवेदी, केंद्रीय मंत्री और लोध नेता बीएल वर्मा, भानु प्रताप वर्मा और कन्नौज से सांसद सुब्रत पाठक मुख्य रूप से शामिल हैं।