हमने विकास को पंख दिए, विवेक नहीं

विकास की अंधी दौड़ में प्रकृति, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर बढ़ते खतरे को समझने की जरूरत है। स्वतंत्र लेखक वीरेंद्र हीरालाल पथरिया का यह संपादकीय विकास और विवेक के बीच संतुलन पर गंभीर सवाल उठाता है।

Poster prepared by the Chetna Manch team for a special editorial

विशेष संपादकीय के लिए चेतना मंच की टीम द्वारा तैयार किया गया पोस्टर

locationभारत
userRP Raghuvanshi
calendar03 Sep 2026 02:39 PM
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चेतना दृष्टि
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