धर्म क्या है? श्रीमद्भगवद्गीता की दृष्टि से समझिए असली अर्थ

लेकिन क्या धर्म केवल अनुष्ठानों तक सीमित है? क्या वह किसी पहचान का नाम है? यदि ऐसा होता, तो कुरुक्षेत्र की रणभूमि में खड़े अर्जुन की दुविधा का समाधान इतने गहरे और सार्वकालिक रूप में संभव न होता। गीता धर्म को संकीर्ण परिभाषाओं से निकालकर जीवन की धुरी बना देती है।

गीता के अनुसार धर्म

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locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar26 Feb 2026 01:38 PM
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