देश में अक्सर उपचुनाव होते रहते हैं। क्या आप जानते हैं कि उपचुनाव क्यों होते हैं इनमें चुना उम्मीदवार क्या पांच तक पद पर बना रहता है?

बांकीपुर (बिहार) और दतिया (मध्य प्रदेश) विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव की मतगणना 3 अगस्त 2026 को जारी है। शुरुआती रुझानों में बांकीपुर में जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर आगे चल रहे हैं, जबकि दतिया में कांग्रेस के घनश्याम सिंह और भाजपा के आशुतोष तिवारी के बीच कड़ी टक्कर दिख रही है। देश में अक्सर उपचुनाव होते रहते हैं। क्या आप जानते हैं कि उपचुनाव क्यों होते हैं इनमें चुना उम्मीदवार क्या पांच तक पद पर बना रहता है?
उपचुनावों में जीतने वाले विधायक को पूरा नया पांच साल का कार्यकाल नहीं मिलता। वे केवल मौजूदा विधानसभा का बचा हुआ कार्यकाल पूरा करते हैं। संविधान के अनुसार राज्य विधानसभा का सामान्य कार्यकाल पहली बैठक से पांच वर्ष का होता है। उपचुनाव से भरी गई सीट उसी असेंबली का हिस्सा होती है, इसलिए नया सदस्य उसी शेष अवधि तक ही विधायक रहता है।
संसदीय उपचुनाव में भी यही व्यवस्था लागू होती है। लोकसभा में जीतने वाले सांसद मौजूदा लोकसभा का बचा हुआ कार्यकाल ही पूरा करते हैं। राज्यसभा में चुने गए सदस्य को पूर्व सदस्य के बचे हुए छह वर्ष का हिस्सा मिलता है, पूरा नया कार्यकाल नहीं।
उपचुनाव कब होते हैं?
उपचुनाव तब होते हैं जब सीट कार्यकाल खत्म होने से पहले खाली हो जाती है—मृत्यु, इस्तीफा, लोकसभा या राज्यसभा चुनाव जीतने, अयोग्यता या दल-बदल के कारण। अगर बचा हुआ कार्यकाल एक साल से कम हो तो उपचुनाव जरूरी नहीं। सीट खाली होने के छह महीने के अंदर चुनाव कराना होता है।
मौजूदा उपचुनाव का कार्यकाल
बांकीपुर सीट नितिन नवीन के भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद खाली हुई। दतिया सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की अयोग्यता (सजा के कारण) से खाली घोषित हुई। बिहार विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 2025 के चुनाव के बाद शुरू हुआ है। यहां जीतने वाले विधायक अगले चुनाव (लगभग 2030) तक ही रहेंगे। मध्य प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 2023–2028 का है, इसलिए दतिया के विजेता 2028 तक विधायक रहेंगे।
इन दोनों सीटों के साथ ही गुजरात के वडोदरा जिले की मांजलपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को हुए उपचुनाव के लिए भी वोटों की गिनती हो रही है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री योगेश पटेल का लंबी बीमारी के बाद दो जून को निधन हो जाने की वजह से इस सीट पर उपचुनाव कराना आवश्यक हो गया था।
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