देश की चिंता कृषि है या नहीं, उस पर गौर करना जरूरी : डॉ. जोशी
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 03:39 AM
स्वस्थ लोकतंत्र के लिए आंदोलनों का जिंदा रहना जरूरी
New Delhi : नई दिल्ली। देश के दिग्गज राजनेताओं और पत्रकारों का कहना है कि आंदोलन के ऑक्सीजन के बिना लोकतंत्र के जिंदा रहने की कल्पना ही बेमानी है। इसलिए स्वस्थ लोकतंत्र के लिए आंदोलन का जीवित रहना नितांत जरूरी है। अमर उजाला के सलाहकार संपादक विनोद अग्निहोत्री की किताब ‘आंदोलनजीवी’ के विमोचन समारोह में बुद्धिजीवियों का जमावड़ा लगा हुआ था। पाखी पब्लिशिंग हाउस की ओर से इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी (Dr. Murli Manohar Joshi)बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे।
डॉ. मुरली मनोहर जोशी (Dr. Murli Manohar Joshi) आंदोलनों के बीच में कृषि यानि खेती किसानी का जिक्र करना नहीं भूले। उन्होंने कहा कि हमारे देश की चिंता कृषि है या नहीं, पहले उस पर गौर कर लेना चाहिए। कृषि के तमाम पहलुओं की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सच है, इस समय देश नई औद्योगिक क्रांति के नए रास्ते पर चल पड़ा है। इसके केंद्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस होगी। लेकिन, यह भी सच है कि देश ने यदि कृषि को नष्ट किया तो न देश बचेगा और न ही सृष्टि बचेगी। उन्होंने कहा कि जनार्दन द्विवेदी ने विनोद अग्निहोत्री की पुस्तक की बेहतर तरीके से समीक्षा की है। विनोद अग्निहोत्री ने अपनी पुस्तक में बहुत से आंदोलनों का जिक्र किया है, बावजूद इसके वह अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाए हैं।
पूर्व राज्यसभा सांसद और जेडीयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि जब तक आंदोलनजीवी, आंदोलनकारी और आंदोलनबाज रहेंगे, तब तक देश और लोकतंत्र दोनों ही सुरक्षित रहेंगे। जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि विनोद ने परिपक्व आयु में उत्साही मन से यह किताब लिखी है। लेकिन, उन्होंने अपनी इस किताब में बड़े सरपट तरीके से एक साथ कई आंदोलनों का जिक्र कर दिया है।
पाखी प्रकाशन के संस्थापक संपादक अपूर्व जोशी ने कहा कि आंदोलन और उससे जुड़े मुद्दों पर अभी बहुत कुछ लिखा जाना शेष है। वह चाहते हैं कि इस काम को पूरा करने के लिए पत्रकार आगे आएं। कोई भी पत्रकार इस विषय पर कुछ लिखना चाहते हैं तो हम उनका स्वागत करेंगे। उन्होंने पत्रकारों का आह्वान किया कि वे लिखें, हम उसे प्रकाशित करने के लिए तैयार हैं।
विनोद अग्निहोत्री ने बताया कि उन्हें यह किताब लिखने की युक्ति कहां से सूझी। उन्होंने कहा कि अन्ना आंदोलन के समय उनके मन में विचार आया कि दो-तीन आंदोलनों का तुलनात्मक अध्ययन किया जाए। क्योंकि उन्होंने जेपी आंदोलन, किसान आंदोलन और छत्तीसगढ़ आंदोलन जैसे कई बड़े आंदोलनों को बेहद करीब से देखा है। इसके बाद उन्होंने एक रिपोर्ताज के रूप में इस किताब को तैयार किया।
समारोह में पूर्व राज्यसभा सदस्य और जेडीयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी, पूर्व सांसद व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी, वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता, किसान आंदोलन के नेता डॉ. सत्येंद्र, रण सिंह आर्या और राकेश रफीक विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इनके अलावा सांसद वरुण गांधी, मोहन प्रकाश, एस दुर्लभ, यशवर्धन आजाद, गौतम सबरवाल समेत तमाम वरिष्ठ और जानेमाने पत्रकार मौजूद थे।