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Raskhan Krishna Devotee: रसखान श्रीकृष्ण की लीलाओं से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने ब्रज को ही अपना घर बना लिया। वृंदावन, गोकुल और यमुना तट का वर्णन उनकी रचनाओं में बार-बार दिखाई देता है।

भारतीय भक्ति साहित्य में कुछ नाम ऐसे हैं जिन्हें सदियों बाद भी श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जाता है। उन्हीं में से एक नाम रसखान का भी है। श्रीकृष्ण के प्रति रसखान की भक्ति इतनी गहरी थी कि आज भी उनके पद और सवैये ब्रजभूमि में बड़े प्रेम से गाए और सुनाए जाते हैं। रसखान का जीवन इस बात का उदाहरण माना जाता है कि सच्ची भक्ति किसी जाति, भाषा या धर्म की सीमाओं में बंधी नहीं होती। उनका नाम आते ही मन में श्रीकृष्ण के प्रति समर्पण, प्रेम और ब्रज की मधुर स्मृतियां जीवंत हो उठती हैं।
रसखान का वास्तविक नाम सैयद इब्राहिम माना जाता है। वे हिंदी साहित्य के भक्ति काल के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं। उनके जीवन के शुरुआती वर्षों के बारे में अलग-अलग मत मिलते हैं लेकिन इतना स्पष्ट रूप से माना जाता है कि बाद में वे श्रीकृष्ण भक्ति से जुड़े और ब्रजभूमि की ओर आकर्षित हुए। समय के साथ उन्होंने अपना अधिकांश जीवन वृंदावन और ब्रज क्षेत्र में बिताया। उनके काव्य में श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम, समर्पण और भक्ति की झलक साफ दिखाई देती है।
कहा जाता है कि रसखान श्रीकृष्ण की लीलाओं से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने ब्रज को ही अपना घर बना लिया। वृंदावन, गोकुल और यमुना तट का वर्णन उनकी रचनाओं में बार-बार दिखाई देता है। उनकी कविताओं में केवल भगवान कृष्ण ही नहीं बल्कि ब्रज की गायें, ग्वालबाल, यमुना, कुंज और वृंदावन की गलियां भी विशेष स्थान रखती हैं। ऐसा लगता है जैसे उन्होंने ब्रज को सिर्फ देखा नहीं बल्कि उसे पूरी तरह जी लिया था।
रसखान की रचनाओं का मुख्य केंद्र भगवान श्रीकृष्ण रहे। उन्होंने कृष्ण की बाल लीलाओं, रासलीला, दानलीला और ब्रज की अनेक घटनाओं का भावपूर्ण वर्णन किया है। उनके काव्य में भगवान कृष्ण एक ऐसे प्रियतम, मित्र और आराध्य के रूप में दिखाई देते हैं जिनके प्रति कवि का प्रेम पूर्ण समर्पण में बदल चुका है। उनकी भाषा सरल और भावनाओं से भरी हुई है इसलिए आज भी उनके पद पाठकों और श्रोताओं के मन को छू लेते हैं।
हिंदी साहित्य में रसखान का विशेष स्थान है। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'प्रेमवाटिका' और 'सुजान रसखान' का उल्लेख मिलता है। इन रचनाओं में प्रेम और भक्ति का सुंदर संगम दिखाई देता है। रसखान का नाम केवल एक कवि के रूप में नहीं बल्कि प्रेम और भक्ति के प्रतीक के रूप में भी लिया जाता है। उनकी रचनाएं यह संदेश देती हैं कि ईश्वर तक पहुंचने का सबसे सरल मार्ग प्रेम और समर्पण है। यही कारण है कि सदियों बाद भी उनके पद साहित्य प्रेमियों, शोधकर्ताओं और श्रीकृष्ण भक्तों के बीच समान रूप से लोकप्रिय हैं।
मथुरा और ब्रज क्षेत्र में रसखान की स्मृतियां आज भी सुरक्षित हैं। उनकी समाधि ब्रज क्षेत्र में स्थित है और वहां श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनके काव्य का पाठ किया जाता है।
रसखान को इसलिए याद किया जाता है क्योंकि उन्होंने अपने काव्य के माध्यम से श्रीकृष्ण के प्रति अपने प्रेम को अमर बना दिया। उनकी रचनाएं केवल साहित्य नहीं हैं बल्कि भक्ति और समर्पण की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। जब भी श्रीकृष्ण भक्ति साहित्य की चर्चा होती है रसखान का नाम बड़े सम्मान और श्रद्धा के साथ लिया जाता है। ब्रज की मिट्टी, यमुना का किनारा और श्रीकृष्ण की लीलाएं आज भी उनकी कविताओं के माध्यम से लोगों के हृदय में जीवित हैं।
श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त रसखान की समाधि मथुरा जनपद के गोकुल क्षेत्र में स्थित मानी जाती है। ब्रजभूमि से उनके गहरे लगाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपना अधिकांश जीवन यहीं बिताया और अंततः इसी पवित्र भूमि में उनकी स्मृति आज भी सुरक्षित है। उनकी समाधि पर श्रद्धालु और साहित्य प्रेमी पहुंचते हैं तथा उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ब्रज के संतों और भक्त कवियों में रसखान का नाम आज भी बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है।
रसखान की कई रचनाएं आज भी लोगों की जुबान पर हैं लेकिन उनका सबसे प्रसिद्ध पद माना जाता है-
"मानुष हौं तो वही रसखान, बसौं ब्रज गोकुल गांव के ग्वारन।
जो पशु हौं तो कहा बस मेरो, चरौं नित नंद की धेनु मझारन॥
पाहन हौं तो वही गिरि को, जो धरयो कर छत्र पुरंदर धारन।
जो खग हौं तो बसेरो करौं, मिलि कालिंदी कूल कदंब की डारन॥"
इस पद में रसखान ने अपनी सबसे बड़ी इच्छा व्यक्त की है। वे कहते हैं कि, यदि मनुष्य जन्म मिले तो ब्रज में रहना चाहेंगे, यदि पशु बनें तो नंद बाबा की गायों के बीच रहना चाहेंगे, यदि पत्थर बनें तो गोवर्धन पर्वत का हिस्सा बनना चाहेंगे और यदि पक्षी बनें तो यमुना किनारे कदंब के पेड़ पर बसेरा करना चाहेंगे। यह पद श्रीकृष्ण और ब्रजभूमि के प्रति उनके अटूट प्रेम का सबसे सुंदर उदाहरण माना जाता है।
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